
RKTV NEWS/बक्सर ( बिहार)06 जुलाई।लालबाबा आश्रम बक्सर में चल रहे श्रीमद्भागवत सप्ताह यज्ञ लालबाबा आश्रम, सतीघाट ,बक्सर में संचालित कथा के तीसरे दिन शनिवार को जीयर स्वामी जी महाराज के कृपा पात्र ब्रह्मपुरपीठाधीश्वर ज.गु.रा.विद्या वाचस्पति आचार्य धर्मेन्द्र जी महाराज ने वेदव्यासजी के मन मे उत्पन्न विसाद को मिटाने व शांति हेतु देवर्षिनारद जी द्वारा बताए गये मार्ग पर प्रकाश डालते हुए द्रौपदी, उत्तरा,सुभद्रा और कुंती के दिव्य चरित्र की कथा कही।देवर्षिनारद के तीन जन्मो की कथा सुनाते हुए विदुर मैत्रेय संवाद की चर्चा करते हुए कहा कि जो है नही,पर है .जैसा लगता है ,वह माया है।माया से छुटकारा पाने का उपाय है.मायापति की शरणागति।जैसे ही जीव मायापति के शरण मे जाता है वैसे ही माया मानव जीवन मे बाधक नहीं,वरन साधक ,सहयोगी बन जाती है।
आचार्य जी ने कहा भगवान को साधन से नही, साधना से नहीं, वरन भाव से ,भक्ति से ,गुरू कृपा से प्राप्त किया जा सकता है।राम ही केवल प्रेम पिआरा, जान लेहु जो जाननि हारा। श्रृष्टि विस्तार कथा करते हुए मनु शतरूपा के पुत्र उत्तानपाद, प्रिय व्रत और पुत्रियां देवहूति, आकुति ,प्रसुति के वंश की दिव्य कथा को प्रस्तुत किया।सती चरित्र का वर्णन करते हुये शिवपार्वती विवाह में प्रविष्ट कुरीतियों के निवारणार्थ तिलक दहेज मुक्त ,प्रदर्शन रहित विवाह संस्कार संवर्धन हेतु आग्रह किया।श्रीमद्भागवत का मूल पाठ पंडित अशोक द्विवेदी द्वारा किया जा रहा है। प्रबंध व्यवस्था में महंथ सुरेन्द्र बाबा और उनके सहयोगी, यज्ञ समिति के स्थानीय भक्त व क्षेत्रीय लोग भक्ति भाव से सक्रिय सहयोग कर रहे हैं।
