
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)18 अप्रैल।मेदनीपुर धाम अवस्थित श्रीराम भक्त हनुमान मंदिर परिसर में आयोजित श्रीमद्भागवत सप्ताह यज्ञ के तीसरे दिवस जीयर स्वामी जी महाराज के कृपा पात्र ब्रह्मपुरपीठाधीश्वर आचार्य धर्मेन्द्र जी महाराज ने वेदव्यासजी के मन मे उत्पन्न विषाद को मिटाने व शांति हेतु देवर्षिनारद जी द्वारा बताए गये मार्ग पर प्रकाश डालते हुए द्रौपदी, उत्तरा,सुभद्रा और कुंती के दिव्य चरित्र की कथा कही।पुनः देवर्षिनारद के तीन जन्मो की कथा सुनाते हुए विदुर मैत्रेय संवाद की चर्चा करते हुए कहा कि जो है नही,पर है .जैसा लगता है ,वह माया है।माया से छुटकारा पाने का उपाय है.माया पति की शरणागति।आचार्य जी ने कहा भगवान को साधन से नही, साधना से नहीं, वरन भाव से ,भक्ति से ,गुरू कृपा से प्राप्त किया जा सकता है।राम ही केवल प्रेम पिआरा, जान लेहु जो जाननि हारा।श्रृष्टि विस्तार कथा करते हुए मनु शतरूपा के पुत्र उत्तानपाद, प्रिय व्रत और पुत्रियां देवहूति, आकुति ,प्रसुति के वंश की दिव्य कथा,सती चरित्र का वर्णन ,शिवपार्वती विवाह की झांकी प्रस्तुत करते हुए विवाह संस्था में प्रविष्ट कुरीतियों के निवारणार्थ आग्रह भी किया।
श्रीमद्भागवत का पाठ परायण पं.त्रिगुण शास्त्री, पूजन अर्चन का कार्य अमरनाथ शास्त्री संपादित कर रहे हैं।नाल पर प्रजापति,बैंजू पर उदय कुमार और हारमोनियम पर निराला बाबा संगत कर रहे है। संकलनकर्ता सुमन रामानुज वैष्णव दास।
