भद्रकाली अंबालम, सर्पकावु व चुंडन वल्लम में हुई विधि-विधान से पूजा; चेंडा वादन व लोकगीतों ने बाँधा समां।
भोपाल/मध्यप्रदेश (मनोज कुमार प्रसाद)07 सितंबर।इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय, भोपाल के तटीय ग्राम मुक्ताकाश प्रदर्शनी परिसर में आयोजित ‘ओणम उत्सव 2026’ रविवार को पारंपरिक श्रद्धा, उल्लास और मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ संपन्न हुआ। यह भव्य आयोजन इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय एवं ऑल इंडिया मलयाली एसोसिएशन (AIMA) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया था, जिसमें यूनाइटेड मलयाली एसोसिएशन का भी सहयोग रहा।
पुजारी संतोष शांति ने कराया विधि-विधान से पूजन
उत्सव के अंतर्गत संग्रहालय परिसर में स्थापित भद्रकाली अंबालम, चुंडन वल्लम (पारंपरिक सर्प-नौका) तथा सर्पकावु (पवित्र उपवन) में मुख्य पुजारी संतोष शांति द्वारा वैदिक एवं पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ विशेष पूजा एवं धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराए गए। सर्पकावु में नागदेवता का पूजन कर प्रकृति, पर्यावरण और लोक आस्था के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की गई। इस दौरान केरल के पारंपरिक वाद्य ‘चेंडा’ की गूंज ने संपूर्ण वातावरण को भक्तिमय बना दिया। अनुष्ठान के उपरांत उपस्थित श्रद्धालुओं को पारंपरिक प्रसाद वितरित किया गया।
लोकगीतों ने बिखेरे केरल की संस्कृति के रंग
समारोह में केरल के सुप्रसिद्ध लोकगीत ‘कुट्टनादन पुंजयिले’ की लयबद्ध प्रस्तुति ने समां बाँध दिया। इस प्रस्तुति के माध्यम से चुंडन वल्लम (नौका दौड़ परंपरा), भद्रकाली अम्मा की वंदना तथा केरल की समृद्ध सामुदायिक जीवनशैली की जीवंत झलक देखने को मिली।
सांस्कृतिक विरासत और संवाद का सशक्त माध्यम है ओणम: प्रो. (डॉ.) अमिताभ पांडे
कार्यक्रम के महत्व को रेखांकित करते हुए संग्रहालय के निदेशक प्रो. (डॉ.) अमिताभ पांडे ने कहा, “ओणम केवल एक पर्व नहीं, बल्कि सामूहिकता, प्रकृति के प्रति सम्मान और देश की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता का अनुपम उत्सव है। मानव संग्रहालय का मुख्य ध्येय विभिन्न समुदायों की जीवंत सांस्कृतिक परंपराओं को सहेजना और उनके माध्यम से सांस्कृतिक संवाद व एकात्मता को बढ़ावा देना है। इस प्रकार के आयोजन सांस्कृतिक समझ को और अधिक सुदृढ़ बनाते हैं।”
प्रकृति और लोक आस्था के अटूट रिश्ते का प्रतीक: हेमंत बहादुर सिंह परिहार
संग्रहालय के जनसंपर्क अधिकारी हेमंत बहादुर सिंह परिहार ने उत्सव के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया, “ओणम राजा महाबली की स्मृति, सामाजिक समरसता, समृद्धि एवं उल्लास का प्रतीक है। मानव संग्रहालय में आयोजित यह उत्सव केरल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के साथ-साथ प्रकृति, लोक आस्था और मानव समुदाय के पारंपरिक संबंधों को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का एक अत्यंत महत्वपूर्ण अवसर सिद्ध हुआ है।”
विशिष्ट अतिथियों की रही गरिमामयी उपस्थिति
कार्यक्रम के सफल संचालन एवं संयोजन में कार्यक्रम संयोजक राजेश गौतम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इस अवसर पर यूनाइटेड मलयाली एसोसिएशन के ओ. डी. जोसेफ, ऑल इंडिया मलयाली एसोसिएशन (AIMA) के सचिव पी. अनिल नायर एवं संयुक्त कोषाध्यक्ष सी. सुनील सी.पी. सहित बड़ी संख्या में केरल के भोपाल निवासी नागरिकों, संग्रहालय के अधिकारियों-कर्मचारियों और शोधार्थियों ने सपरिवार उत्साहपूर्वक सहभागिता की।

