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समलैंगिक विवाह के मुद्दे पर केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में कहा की राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सुने बिना फैसला नहीं हो सकता।

RKTV NEWS/ नयी दिल्ली,19अप्रैल।सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने नया हलफनामा दायर कर सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को समलैंगिक विवाह को मान्यता देने की मांग वाली याचिकाओं में पक्षकार बनाने का आग्रह किया है। केंद्र का कहना है कि भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची में समवर्ती सूची में “विवाह” शामिल है। इस प्रकार, याचिकाओं के न्यायनिर्णयन के लिए सभी राज्यों के साथ परामर्श आवश्यक है। समवर्ती सूची की प्रविष्टि 5 में विवाह और तलाक शामिल हैं; शिशुओं और नाबालिगों; दत्तक ग्रहण; वसीयत, निर्वसीयतता और उत्तराधिकार; संयुक्त परिवार और विभाजन; सभी मामले जिनके संबंध में न्यायिक कार्यवाही में पक्ष इस संविधान के प्रारंभ से ठीक पहले उनके व्यक्तिगत कानून के अधीन हैं।केंद्र का कहना है कि उपरोक्त प्रविष्टि 5 का प्रत्येक घटक आंतरिक रूप से परस्पर जुड़ा हुआ है और किसी एक में कोई भी परिवर्तन अनिवार्य रूप से दूसरे पर व्यापक प्रभाव डालेगा।

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