खैरागढ़ में हिन्दी व तमिल भाषा में हुआ नाट्य मंचन।
खैरागढ़ (छग)/रवींद्र पांडेय। भारत रंग महोत्सव के चौथे दिन संस्कृत कवि भास द्वारा रचित मध्यम व्यायोग का नाट्य मंचन किया गया। वहीं पांचवें दिन पुदुचेरी के प्रसिद्ध रंग निर्माता रामसामी एस. द्वारा रचित नदपावादाई नाटक का मंचन किया गया। मध्यम व्यायोग की प्रस्तुति हिन्दी भाषा में तथा नदपावादाई की प्रस्तुति तमिल भाषा में हुई। संस्कृत कवि भास द्वारा रचित मध्यम व्यायोग महाभारत के वन पर्व के एक प्रसंग का रचनात्मक पुनर्कथन है। यह घटोत्कच और उसके पिता भीम के बीच नाटकीय मुठभेड़ का वर्णन करता है, जिसमें भाईचारा, बलिदान और योद्धा के कर्तव्य जैसे विषयों की खोज की गई है। यह नाटक शास्त्रीय और लोक नाट्य परंपराओं का एक सहज संयोजन है, जिसमें लोक संगीत, नृत्य और शास्त्रीय नाटक के तत्व शामिल हैं। यह अनूठा मिश्रण भारतीय रंगमंच की विविधता को प्रदर्शित करते हुए एक जीवंत लेकिन गहन भावनात्मक कथा प्रदान करता है।
नदपावादाई एक महिला के बारे में रंग प्रस्तुति है
पुदुचेरी के प्रसिद्ध रंग निर्माता रामासामी एस द्वारा निर्मित नदपावादाई नाटक में एक महिला के बारे में एक रंग प्रस्तुति को दर्शाया गया है, जो अपने गांव के लोगों का अंतिम संस्कार करती है, जो कि पारंपरिक रूप से पुरुषों के लिये आरक्षित भूमिका है। उन सांस्कृतिक मानदंडों को चुनौती देते हुए जो आमतौर पर महिलाओं को श्मशान से रोकते हैं, उसे अपने परिवार के पुरुष सदस्य की मृत्यु के बाद, इन अनुष्ठानों का नृतृत्व करने के लिए नामित किया गया है।
यह नाटक इस पुरुष प्रधान मंडल में उसकी अनूठी स्वीकृति की जांच करता है और उसके जीवन के सामाजिक आर्थिक आयामों की पड़ताल करता है। अधिकार और करिश्मे के साथ वह पूर्ण सार्वजनिक दृश्य में अनुष्ठानों का नेतृत्व करती है, दूसरों को निर्देशित करती है और समारोहों को सशक्त प्रदर्शनों में बदल देती है।

