
पटना/ बिहार (राकेश मंगल सिन्हा) 17 मई। शनिवार को सुहागिन महिलाओं ने पारंपरिक रूप से खुशी-खुशी उत्सवी माहौल मे वट सावित्री पूजा की। हिंदू धर्म में वट सावित्री व्रत सुहागिनों द्वारा मनाया जाने वाला एक अत्यंत महत्वपूर्ण त्योहार है। पति की लंबी उम्र, उत्तम स्वास्थ्य और अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए यह व्रत रखा जाता है। यह व्रत हर साल ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं वट (बरगद) वृक्ष की पूजा करती हैं और सावित्री- सत्यवान की पौराणिक कथा सुनती हैं। सुहागन महिलाएं बरगद के पेड़ के तने पर कच्चा सूत या कलावा लपेटते हुए 7 या 11 बार परिक्रमा करती हैं। वटवृक्ष को जल, रोली, अक्षत, फूल और फल अर्पित करती हैं। साथ ही सावित्री व्रत की पौराणिक कथा सुनती हैं। पौराणिक कथा के अनुसार प्राचीन काल में सावित्री नाम की एक अत्यंत पतिव्रता स्त्री थी। उनके पति सत्यवान की मृत्यु अल्पायु मे ही हो गई। यमराज जब सत्यवान के प्राण लेने आये तो सावित्री भी उनके पीछे-पीछे यमलोक की ओर चल पड़ी। सावित्री की निष्ठा और पतिव्रता धर्म से प्रसन्न होकर यमराज ने उनसे तीन वर मांगने को कहा। बताया जाता है कि सावित्री ने अपने सास-ससुर के लिए राज्य, अपने माता-पिता के लिए संतान और अपने पति सत्यवान के जीवन का वरदान मांगा। यमराज को विवश होकर सत्यवान के प्राण लौटाने पड़े। यह घटना वट वृक्ष के नीचे हुई थी। कहा जाता है कि इसीलिए महिलाएं वट सावित्री पूजा मे वट वृक्ष की पूजा करती हैं। बहुत महिलाएं वट वृक्ष की पूजा अर्चना के बाद पति की पूजा भी करती हैं और ईश्वर से पति के खुशहाली एवं दीर्घायु होने की कामना करती हैं। बहुत सुहागन महिलाओं द्वारा पति को भगवान के रूप मे मान कर उनकी पूजा की जाती है जिसमें पुष्प, अछत, दीप, और अन्य पूजा सामग्री का उपयोग होता है।
बिहार प्रदेश चित्रगुप्त वंशज के प्रदेश अध्यक्ष प्रो लक्ष्मण कुमार श्रीवास्तव “नंदू” ने वट सावित्री पूजा के पावन अवसर पर सभी माताओं एवं बहनों को वट सावित्री व्रत एवं पूजा की हार्दिक शुभकामना देते हुए उनके अक्षुण सुहाग की कामना की है।
