
RKTV NEWS/रांची (झारखंड)06 फ़रवरी।बुधवार को रांची प्रेस क्लब सभागार में डी ए वी उरीमारी हजारीबाग के पूर्व प्राचार्य डॉ गोवर्धन सिंह के द्वारा लाइफ ट्रांसफॉर्मिंग टेक्नोलॉजी (जीवन रूपांतरण तकनीक)विषय पर संगोष्ठी आयोजित हुई। मुख्य अतिथि डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय के कुलपति (प्रो.) डॉ. तपन कुमार शांडिल्य थे। विशिष्ट अतिथि के रूप में रांची विश्वविद्यालय हिन्दी विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष (प्रो) डॉ. जंग बहादुर पाण्डेय ,वाई बी एन के चेयरमैन डॉ. रामजी यादव, झारखंड खुला विश्वविद्यालय रांची के विशेषज्ञ डॉ मोहन लाल साहू थे। राजकमल सरस्वती विद्या मंदिर धनबाद के पूर्व प्राचार्य डॉ वासुदेव प्रसाद ने संगोष्ठी की अध्यक्षता की। संगोष्ठी में भरेचनगर डी ए वी के पूर्व प्राचार्य पी के मिश्रा, झारखंड लोक सेवा आयोग के प्रशाखा पदाधिकारी डॉ. विष्णु जायसवाल डी ए वी के संगीत शिक्षक प्रत्युष कुमार , पत्रकार जयंत कुमार आदि की गरिमा मरी उपस्थिति रही। विषय प्रवेश कराते हुए डॉ गोवर्धन सिंह ने कहा कि ट्रांसफॉर्मिंग लाइफ टेक्नोलॉजी का उद्देश्य संस्कार से संसार को समझना है। संस्कार से ही व्यक्ति के व्यक्तित्व का रूपांतरण हो सकता है। छात्रों के प्रथम गुरु उनके माता पिता ही हैं।मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए डॉ तपन कुमार शांडिल्य ने कहा कि टेक्नोलॉजी हमें पुरातन से नूतन को समझने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि परिवर्तन के तीन आधार होते हैं- पहला समाज के आधार पर परिवर्तन, दूसरा पारंपरिक परिवर्तन और तीसरा पारिवारिक परिवर्तन। तीनों स्थितियों में शिक्षा ही व्यक्ति के व्यक्तित्व रुपांतरण का मूलाधार है।उन्होंने लाइफ ओर टेक्नोलॉजी को आज के परिवेश में परिभाषित किया और विस्तार से चर्चा की। डा जंग बहादुर पाण्डेय ने कहा कि व्यक्ति के व्यक्तित्व का रूपांतरण आचार विचार और संस्कार से ही संभव है।डा रामजी यादव ने कहा कि चरित्र निर्माण के लिए ईमानदारी और नैतिकता अपेक्षित है। अध्यक्षता कर रहे डा वासुदेव प्रसाद ने कहा कि प्राचीन शिक्षा मूल्य परक एवं नैतिकता परक थी आज की शिक्षा व्यावसायिक और रोजगार परक हो गई है।जबकि भारतीय शिक्षा का उद्देश्य नौकरी नहीं, अपितु चरित्र निर्माण एवं आदर्श नागरिक बनाना है। आगत अतिथियों का भव्य स्वागत शाल , स्मृति चिन्ह एवं पुष्प गुच्छ से डा गोवर्धन सिंह ने, स्वागत गान डी ए वी नीरजा के विद्यार्थियों ने, अतिथियों का शानदार एवं जानदार परिचय डा जे बी पाण्डेय ने,समवेत संचालन डा ओम प्रकाश और डा रजनी सिंह ने और धन्यवाद ज्ञापन डा निवेदिता सिंह ने किया। पूर्णाहुति समवेत राष्ट्र गान से हुआ।
