डॉ० राजेन्द्र प्रसाद
हे देश रत्न, है नमन तुम्हें, तुम हो महान, तुम हो महान; संन्यासी, तुम प्रतीक सादगी के, गाँधीवाद के तुम प्रतीक, तुम से है, यह देश महान; तुम हो महान, तुम हो महान ।
तुम हो वह परीक्षार्थी बेवाक, रहे परीक्षक जिस पर आवाक, गाँवों की गरिमा तुमसे बड़ी हुई, और पतलुन पड़ी छोटी, धोती से, हे सभापति संविधान-सभा के, तेरी तो मानस ही हुई बड़ी, हर पोथी से, तुम हो महान, तुम हो महान ।
तुम तो आजादी के परवाने हो, माँ की जंजीरों को काटने वाले हो; विधि-वेत्ता मूर्धन्य तुम्हीं हो, तुम तो निर्बल के पालने वाले हो, तुम हो महान, तुम हो महान ।
जिरादेई के पंछी वन, दूरी दिल्ली की नाप लिया; जब हुई सांझ आ लौट नीड़ को, आश्रम-सा कुटिया को आबाद किया। तुम हो महान, तुम हो महान ।
हमला हुआ हिमालय पर सुन बोले, मेरी अस्थि ले लो, निकला एक हुंकार, दधिची की अस्थि कोले लो;
मारो, दुश्मन को मार भगाओ हिमालय से, अब तो साँसों को कुछ देर जरा सा थमने दो,
आया झंझावात इसिबीच, लगे रोकने लोहिया, जलते दीप को, रोक न पाये, बुझ गयी दीप तो क्या, स्नेह की बाती को हर साल पिरोते जायेंगे,
तेरी सिखों की संबल से, हर कठिन राहों को नापते जायेंगे।
हे देश रत्न है नमन तुम्हें, तुम हो महान, तुम हो महान ।

(उक्त कविता ख्यातिप्राप्त लेखक,कवि,व्यंग्यकार,समीक्षक, अनुवादक “डॉ कृष्ण दयाल सिंह”जो एक अवकाश प्राप्त डाक सेवा अधिकारी भी है, उनके साहित्य काल के शुरूआती दौर में 09 फरवरी 1998 को प्रकाशित की गई कविता संग्रह पुस्तक “यत्र-तत्र”से ली गई है और यह कवि की उक्त संग्रह की दसवीं रचना है। RKTV NEWS नित्य इनके संग्रहित पुस्तक से क्रमवार एक एक रचना प्रकाशित करेगी। इनकी कई रचनाएं विभिन्न पत्र पत्रिकाओं और समाचार पत्रों में प्रकाशित होती रहती है साथ ही इनके दर्जनों पुस्तक भी प्रकाशित हो चुके है, वर्तमान में बिहार राज्य के भोजपुर जिला अंतर्गत आरा के वशिष्ठपुरी में निवास करते है। सुझाव और संपर्क हेतु: 9570805395)


