
RKTV NEWS/हनुमानगढ़(राजस्थान)26 अक्टूबर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में कृषि विभाग उर्वरकों की कालाबाजारी और जमाखोरी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाईयां कर रहा हैं। जिले में संयुक्त निदेशक कृषि (विस्तार) योगेश कुमार वर्मा के निर्देशन में लगातार औचक निरीक्षण किए जा रहे हैं। श्री वर्मा ने बताया कि मैसर्स पवन कुमार, विष्णु कुमार पुरानी धानमंडी संगरिया के परिसर का उर्वरक निरीक्षकों के साथ निरीक्षण किया।
यहां यूरिया का अवैध भंडारण पाया गया। दो गोदामों में लगभग 8 से 10 हजार बैग पाए गए, जो कि फर्म के लाईसेंस में सम्मिलित नहीं थे। यहां विभिन्न तरह की अनियमितताएं भी पाई गई। इस आधार पर उर्वरक निरीक्षक ने फर्म के उर्वरक अनुज्ञा पत्र संख्या एनईडब्ल्यू 613 को निलंबन करने के लिए अनुशंषा की। इसके आधार पर तत्काल प्रभाव से आगामी आदेशों तक अनुज्ञा पत्र निलंबित किया गया है।
औचक निरीक्षण जारी, सख्त होगी कार्रवाई
श्री वर्मा ने कहा कि बाहरी देशों से डीएपी देश में नहीं आ रहा है। राज्य सरकार ने इस अंदेशे को ध्यान रखते हुए अवैध भंडारण पर कार्यवाही शुरू कराने के निर्देश दिए है। मुख्यमंत्री ने भी वीसी से उर्वरक वितरण प्रबंधन करने और जमाखोरी पर कठोर कार्यवाही के निर्देश दिए। इसलिए अवैध भंडारण नहीं किया जाए।
संयुक्त निदेशक ने बताया कि जिले में डीएपी के विकल्प के रूप में एनपीके, एसएसपी की पर्याप्त उपलब्धता की गई है। सहायक निदेशक कार्यालय स्तर पर कंट्रोल रूम बनाए गए हैं। जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए टीमें प्रतिदिन 20-25 निरीक्षण कर रही हैं। अनियमितताएं पाए जाने पर सेल स्टाॅप, कारण बताओ नोटिस एवं लाईसेंस निलम्बित जैसी कार्यवाही अमल में लाई जाएगी। प्रत्येक मंडी स्तर पर भी प्रभारी अधिकारी मय टीम लगाए गए है। उनकी देखरेख में ही उर्वरकों का वितरण कराया जा रहा है।
बिजाई के लिए पर्याप्त उर्वरक
श्री वर्मा ने किसानों को जानकारी दी है कि हनुमानगढ एक कृषि प्रधान जिला है। इस बार रबी में लगभग 6.70 लाख हेक्टेयर में बुवाई के लक्ष्य रखा गया है। इसमें अक्टूबर के मध्य से अंत तक सरसों लगभग 2.50 लाख हैक्टेयर में बिजाई होने का अनुमान है। इसके लिए लगभग 15000-18000 मैट्रिक टन फास्फोरस की आवश्यकता होगी। इसके लिए डीएपी के साथ एनपीकेएस श्रेणी के उर्वरक, सिंगल सुपर फास्फेट, ट्रिपल सुपर फास्फेट आदि की पर्याप्त व्यवस्था है। नवंबर में गेंहू की बिजाई के लिए भी पर्याप्त मात्रा में फास्फोरिक जनित उर्वरक उपलब्ध है।
अधिक राशि पर बिक्री, तो सूचना दें
संयुक्त निदेशक ने बताया कि सामान्यत तीन कट्टे एसएसपी एवं एक कटटा यूरिया के उपयोग से डीएपी से भी अच्छे परिणाम प्राप्त होते हैं। जिले में एनपीकेएस श्रेणी के विभिन्न ग्रेड उर्वरक अभी 20 हजार टन में उपलब्ध है। इनकी निरंतर आपूर्ति हो रही हैं। ऐसे में किसी भी प्रकार की समस्या नहीं आएगी। जिले में फास्फोरस के वैकल्पिक उर्वरकों की भी पर्याप्त उपलब्धता है। उन्होंने बताया कि यदि किसी जगह अधिक राशि पर ब्रिकी की सूचना हो तो निकटतम सहायक निदेशक अथवा कृषि पर्यवेक्षक को सूचना दी जाए।
