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भोपाल:स्वर्गीय जगदीश किंजल्क के कहानी संग्रह ‘अमानत’ का हुआ भव्य लोकार्पण।

भोपाल/ मध्यप्रदेश (मनोज कुमार प्रसाद)13 सितंबर।मनोज श्रीवास्तव की अध्यक्षता में स्वर्गीय किंजल्क जी के कहानियों के संग्रह अमानत का गरिमामय और भव्य समारोह 13 सितंबर 2025 को दुष्यंत संग्रहालय में संपन्न हुआ जिसमें मुख्य अतिथि की भूमिका मुकेश वर्मा ने निभाई साथ ही शशांक, विजय लक्ष्मी विभा और प्रियदर्शी खैरा विशिष्ट अतिथि के तौर पर उपस्थित रहे। पुस्तक की समीक्षा गोकुल सोनी ने की और संचालन का कार्यभार दिनेश प्रभात ने संभाला। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन से हुई तत्पश्चात डॉक्टर सस्मिता श्रीवास्तव ने सरस्वती वंदना की प्रस्तुति दी। किंजल्क जी की छोटी पुत्रवधू विधि राय खरे ने स्वागत भाषण दिया। पुस्तक की संपादिका राजो किंजल्क ने अपने उद्बोधन में पुस्तक की रूपरेखा और भूमिका के संबंध में बताया। किंजल्क जी के बड़े सुपुत्र अंशुल खरे ने उनकी कहानी का मंच पर पाठ किया और उनके छोटे सुपुत्र अद्वैत खरे ने अपने पिता को कविता के माध्यम से श्रद्धांजलि अर्पित की।
अपने उद्बोधन में अध्यक्ष मनोज श्रीवास्तव ने किंजल्क जी की कहानियों के बारे में चर्चा करते हुए बताया कि कहानियां बहुत ही ह्रदयपर्शी हैं और आज भी प्रासंगिक है। उन्होंने एक कहानी का उल्लेख किया जो कि बंटवारे की त्रासदी को उजागर करती है, और उन्होंने ये भी कहा कि लेकर आजकल के साहित्यकार ऐसे विषयों को नहीं उठाते हैं।
अपने उद्बोधन में मुख्य अतिथि मुकेश वर्मा ने कहा – वैसे तो वो प्रत्येक विधा में लिखते थे परन्तु उनकी मुख्य विधा कहानी ही थी और वो एक सफल कहानीकार थे।
उद्बोधन की श्रृंखला में विशिष्ट अतिथि शशांक जी ने किंजल्क जी को याद करते हुए कहानियों पर विस्तार से चर्चा की, साथ ही उन्होंने किंजल्क जी की परिचर्चाओं पर जो आज भी प्रासंगिक हैं और समाज को आईना दिखाने का काम करती हैं, उनको भी प्रकाशित करने का सुझाव दिया।
सुप्रसिद्ध कवयित्री विजय लक्ष्मी विभा जो कि किंजल्क जी की बड़ी बहन भी हैं उन्होंने अपने उद्बोधन करते हुए बताया कि जगदीश किंजल्क की कहानियों का सफर जब शुरू हुआ तब वो बी.ए. के छात्र थे। जब वो कोर्स पढ़ने के लिए बैठते थे लेकिन कहानियों लिखने लग जाते थे। तो वो प्राय: पिताजी स्व. श्री अंबिका प्रसाद दिव्य से उनकी शिकायत करती थी तो पिताजी मुस्कुराते हुए किंजल्क को डांटते थे और मुझे ये जाता देते थे कि उन्हें किंजल्क का कहानी लिखना अच्छा लग रहा है, और परोक्ष रूप से उन्हें प्रोत्साहन मिलता रहा।
गोकुल सोनी ने पुस्तक की समीक्षा की एवं सर्वप्रथम किंजल्क जी के साथ अपने संस्मरणों को याद किया तत्पश्चात कुछ कहानियों पर प्रकाश डालते हुए किंजल्क जी उत्कृष्ट कहानियों को उपस्थित अतिथियों से पढ़ने का आग्रह किया। साथ ही उन्होंने कहा कि किंजल्क जी की कहानियां उस कालखंड को सफलता से प्रतिबिंबित करती हैं और इन प्रेम केंद्रित कहानियों को पढ़ कर गुलशन नंदा की याद आ जाती है।
दिनेश प्रभात ने अपने उद्बोधन में कहा कि उन्होंने जिंदगी में मैने पहला पुरुष ऐसा देखा है जिसकी आवाज कोयल से भी ज्यादा मीठी थी और आचरण खरगोश की तरह था जिसको खुल्ले में छोड़ दो तो बलिया उछलता था और हाथ फेर दो तो दुबक जाता था।
अंत में किंजल्क जी की बड़ी पुत्रवधू डॉक्टर सौम्या खरे ने आभार व्यक्त करते हुए सभी को धन्यवाद दिया।
कार्यक्रम में साहित्य और कला जगत की अनेक हस्तियां मौजूद थीं। अभिषेक वर्मा, प्रकाश खरे, अनीह खरे, अमिताभ श्रीवास्तव, वी अनमोल खरे, अवनीन्द्र खरे, डॉक्टर नमिता श्रीवास्तव, मीना राय आदि कार्यक्रम में उपस्थित रहे।

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