
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)10 अक्टूबर। बुधवार को आस्था के स्तंभ, सनातन धर्म ध्वजवाहक, आचार्य जीयरस्वामी जी महाराज के कृपा पात्र ब्रह्मपुर पीठाधीश्वर,विद्या वाचस्पति आचार्य डा धर्मेन्द्र जी महाराज ने शिवशक्ति हनुमतधाम कारीसाथ मे आयोजित श्रीमद्भागवत कथा मे दशम् स्कंध की कथा में बताया कि श्रीमद्भागवत में भगवान के 24 अवतारों की चर्चा है।सभी अवतारों का अपना अपना महत्व व हेतु है,पर नवम् स्कंध मे सूर्य वंश मे अवतरित श्रीराम और चन्द्र वंशमे अवतरित श्री कृष्ण की अवतरण का हेतु और लीलाएं अद्भुत, अद्वितीय ,अविस्मरणीय व परम कल्याणकारी हैं। दोनो ही अवतार मध्यान मे होते हैं,पर अंतर यह है कि श्रीराम जी दिन के मध्य में और श्रीकृष्ण रात्रि के मध्य में प्रकट होते है।दूसरी बात यह है कि श्रीराम शुक्ल पक्ष के नवमी तिथि को प्रकट होते हैं जबकि श्रीकृष्ण कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि में।तीसरी बात श्रीराम अवध के राज महल में प्रकट होते हैं जबकि श्रीकृष्ण मथुरा के कारागार में।चौथी बात है श्रीराम धनुर्धर हैं जबकि श्रीकृष्ण मुरलीधर।पाचवीं बात यह है दोनों ही चरवाहे हैं अंतर इतना ही है श्रीराम वंदर भालुओं के चरवाहा हैं तो श्रीकृष्ण गाय बच्छड़ो के।छठवीं बात है दोनो ही बिहारी है,एक अवधबिहारी तो वृंदावन बिहारी।सातवीं बात है दोनों ही भक्तों के हितकारी, कल्याण कारी और मंगलभवन, अमंगलहारी हैं। दोनों की लीलाएं मनोहारी है।आगे चन्द्र वंश की कथाक्रमानुसार कहते हुए आचार्य जी ने कहा जब नारायण की इच्छा हुई श्रृष्टि विस्तार की तो उनके नाभि कमल से ब्रह्मा जी,ब्रह्माजी से अत्री जी,अत्रीजी से चन्द्रमा, चन्द्रमा से तारा, तारा से बुद्ध, बुद्ध से ईला, ईला से पुरूरवा,पुरूरवा से ययाति हुये।इस प्रकार इस वंश मे उनका, अंधक,दुंदुभी, अरिद्योत, पुनर्वसु,आहुक हुये।आहुक से देवक और अग्रसेन हुये।देवक को चारपुत्र व सात पुत्रियां हुई ,छोटी पुत्री का नाम देवकी पड़ा जो सूरसेन के पुत्र वसुदेव से विवाहित हुई। इन्हीं देवकी वसुदेव से आठवीं संतान के रूप में मथुरा के जेल में भादो मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि मे मध्य रात्री में प्रकट हुए।जेल के सभी कैदी सो गये ताले खुल गयेऔर हरि प्रेरणा से वसुदेव जी यमुना पार कर नंदयशोदा के घर गोकुल में पहुंचा दिये कृष्ण को और यशोदा के घर प्रकटी लाडली को लेकर जेल वापस हो गये ।सभी कैदी जगे,कंश आया और देवकी के पहले छवों संतानों के तरह लाडली को मारना चाहा,पर वह लाडली उसके हाथो से छूट आसामान मे चली ,अष्ट भूजी बनं,बोली रे!कंस तू मुझे क्या मारेगा ,तूझे मारने वाला धरती पर आ चूका है।कंस की चिंता और बढी और सभी बालक जो पैदा हुये है ,मार देने पर विचार किया ।इधर नंद बाबा के घर खूब उत्सव मना…. भये प्रकट गोपाला, दीनदयाला, यशुमति हितकारी… भादो के रतिया भयावन त घटा घनघोर घेरे हो..नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल….अँगने मे बधाइयां बाजे.. ब्रज मे होरही ,जयजयकार नंद घर लाला जायो है…आदि मांगलिक सोहर ,बधाइयां गीत होती रही भक्त झूमते रहे,इन्द्रदेव न वर्षा कर भगवान का स्वागत करते रहे । श्रीकृष्ण के प्राकट्य को झांकी के द्वारा मनोहारी प्रस्तुति दिल्ली से आये श्रृंगारी रघुनंदन स्वामी जी द्वारा किया गया।देर रत तक कथा चलती रही भक्त आनंदित होते रहे। कार्यक्रम को सफल बनाने में मेजर राणा प्रताप सिंह सुरेंद्र सिंह बीरबल सिंह अशोक सिंह गोरा डॉक्टर मुन्ना सिंह राम यश सिंह कैलाश सिंह जय नारायण सिंह श्रीनिवास सिंह रेणुका देवी नीलम सिंह ब्लू देवी आदि का महत्वपूर्ण योगदान रहा। मेजर राणा प्रताप ने बताया कि आयोजन में नगर रामलीला समिति ट्रस्ट की अध्यक्ष डॉक्टर अर्चना सिंह ,डॉक्टर द्विजेंद्र किरण सहित अन्य गणमान्य लोगों की प्रतिदिन उपस्थिति से कार्यक्रम में चार चांद लगते रहा।
ऐसा ही कार्यक्रम साल में दो-तीन बार होता है। समापन पर रुद्राभिषेक का भी आयोजन है।
