
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)09 अक्टूबर।मंगलवार को संत रविदास जनसेवा संगठन भोजपुर एवं टीम मदर टेरेसा सेवाकर्मी भोजपुर आरा के सयुक्त तत्वावधान में 108वां लवारिस पुरुष शव का दाह संस्कार स्थानीय आरा गांगी मुक्ति धाम श्मशान घाट पर किया गया। ऐसे कार्यक्रम को सम्मान घाट तक पहुंचने वाले समाजसेवी अमरदीप कुमार ने बताया कि आज एक साथ तीन लावारिस शवों का अंतिम संस्कार हुआ ।जिसमें एक शव 50 वर्षीय पुरुष नगर थाना आरा दूसरा 20 वर्षिय युवक का जो जीआरपी आरा तथा तीसरा 30 वर्षीय शव जो सदर अस्पताल अधीक्षक कार्यालय से पोस्टमार्टम करने के बाद मिला।
जिसने भी इस मानव को धरती पर लाया कभी सोचा होगा कि इसको घाट तक पहुंचने वाला भी कोई नहीं मिलेगा,समाज इसे पशुओं को खाने के लिए छोड़ देगा या सड़ गल कर मिट्टी में मिल जायेगा। ऐसे ही लावारिसों का वारिस बनकर एक बेरोजगार युवा दिन भर लगा रहता है। इससे पागलपन कहें या सेवा का नशा। बातचीत के क्रम में राष्ट्रीय सागर अखबार को बताया कि मैं तो खुद बेरोजगार हूं लेकिन जहां कहीं से भी खबर मिलती है कि यहां ऐसे लावारिस लाश पड़ी है तो उसे ससम्मान नियमतः हिंदू धार्मिक रीति रिवाज के अनुसार अंतिम संस्कार करता है। यह भी सच है कि इसके लिए मैं टीम के संरक्षक और अन्य लोगों से आर्थिक सहयोग मिलता है। तभी ये कार्य संभव हो पा रहा है। केवल दाह संस्कार ही नहीं बल्कि इस प्रकार के मरीजों की जो लाचार है, जिनको कोई पूछता नहीं उन्हें दवा ,जरूरत पर ड्रेसिंग, वस्त्र , खाना इत्यादि की भी का भी सहयोग करता हूं। यही मेरी दिनचर्या और फकीरी में भी सेवा का कार्य कर रहा हूं।अपनी व्यथा और अंतिम बातों को समाप्त करते हुए कहा की –
कबीरा खड़ा बाजार में लिए लुकाठी हाथ
जो घर आपन जारियो चलो हमारे साथ।
मुझे लावारिसों का वारिस बनने में ना कोई कोई इलाज है ना कोई डर, बल्कि सबसे कहता हूं कि आप शारीरिक मानसिक आर्थिक सहयोग कर पुण्य के भागी बने। समय बहुत बलवान है,पता नहीं भगवान की दृष्टि कब किस पर कुपित हो जाए ,क्षण भर में राजा से रंक बना सकते हैं तो वारिश से लावारिस भी। मानव सेवा का संकल्प ले और परोपकारी बनकर आत्मिक सुख शांति समृद्धि पायें। अब तक 108 लाशों का अंतिम संस्कार किया जा चुका है।
