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बिहार:डॉ० ए.पी.जे. अब्दुल कलाम साइंस सिटी का सिविल कार्य 80% पूर्ण, जल्द बनकर होगा तैयार: मंत्री सुमित कुमार सिंह

RKTV NEWS/पटना(बिहार)23 सितम्बर।राज्य के छात्र/छात्राओं में विज्ञान के प्रति अभिरूचि पैदा करने तथा वैज्ञानिकों द्वारा प्रतिपादित किए गए सिद्धांतों का आम जन-जीवन में हो रहे प्रयोगों को प्रदर्शित करने हेतु सैदपुर, पटनामें डॉ० ए०पी० जे० अब्दुल कलाम साइंस सिटी का निर्माण किया जा रहा है। निर्माण कार्य में Civil Works का कार्य 80% पूर्ण है एवं exhibit का कार्य प्रक्रियाधीन है।
आज विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग, बिहार, पटना द्वारा सूचना एवं जन-सम्पर्क विभाग के सहयोग से सूचना भवन के ‘संवाद कक्ष में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस को माननीय मंत्री, विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग, बिहार, सुमित कुमार सिंह द्वारा सम्बोधित करते हुए उपर्युक्त बातें कही गई। उन्होंने विभाग की महत्वपूर्ण गतिविधियों एवं उपलब्धियों की विस्तार से जानकारी दी जो निम्नवत् हैः-
राज्य सरकार के सात निश्चय कार्यक्रम 1 के अन्तर्गत युवा उपमिशन “अवसर बढ़े आगे पढ़े के तहत सरकारी क्षेत्र में राज्य के सभी 38 (अड़तीस) जिलों के लिए 38 राजकीय अभियंत्रण महाविद्यालय तथा 46 राजकीय पोलिटेकनिक संस्थान स्थापित एवं संचालित है। वर्तमान में सभी 38 राजकीय अभियत्रण महाविद्यालय तथा 45 राजकीय पोलिटेकनिक संस्थान अपने भवन में संचालित है। राजकीय पोलिटेकनिक, बाढ़ के भवन का निर्माण कार्य प्रगति पर है। वर्तमान में राजकीय पोलिटेकनिक बाढ़ पाटलिपुत्रा, पटना में स्थित राजकीय पोलिटेकनिक पटना-13 के परिसर से संचालित है।
उक्त संस्थानों में गुणवत्तापूर्ण तकनीकी शिक्षण के लिए उच्च स्तरीय प्रयोगशाला, कर्मशाला, पुस्तकालय एवं स्मार्ट क्लास की व्यवस्था किए जाने हेतु सभी अभियंत्रण महाविद्यालयों के लिए वित्तीय वर्ष 2023-24 में कुल राशि रू० 171.90 करोड़ मात्र तथा वित्तीय वर्ष 2024-25 में कुल राशि रू० 105.9407 करोड़ मात्र एवं सभी पोलिटेकनिक संस्थानों के लिए वित्तीय वर्ष 2023-24 में कुल राशि रू० 81.4899 करोड़ मात्र तथा वित्तीय वर्ष 2024-25 में कुल राशि रू० 103.42693 करोड़ मात्र की स्वीकृति प्रदान की गई है।
विभाग के अधीन सभी अभियंत्रण महाविद्यालय एवं पोलिटेकनिक संस्थानों में क्रमशः 500Mbps एवं 300Mbps की इंटरनेट कनेक्टिविटी के साथ नेटवर्किंग एवं वाई-फाई की सुविधा प्रदान किये जाने के उद्देश्य से दो वर्षों (वित्तीय वर्ष-2023-24 तथा 2024-25) में कुल अनुमानित राशि रू0 47.15 करोड़ मात्र की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है। विभागान्तर्गत संस्थानों में कार्यरत शिक्षकों के कौशल विकास के लिए महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाये जा रहे है। इसके तहत आई-हब दिव्य संपर्क, आई०आई०टी० रूड़कीद्वारा राजकीय अभियंत्रण महाविद्यालयों के 300 शिक्षकों को नवीनतम विधाओं यथा-IOT, Mobile and Web Development इत्यादि में प्रशिक्षण दिया गया। इस हेतु विभाग द्वारा रू0 4,94,80,000.00 मात्र की प्रशासनिक स्वीकृति वित्तीय वर्ष-2022-23 में दी गई है।
संस्थानों को पूर्णतः आवासीय बनाने के उद्देश्य से पूर्व में निर्मित आवासीय भवनों के अतिरिक्त छात्र/छात्राओं एवं शिक्षकों के आवासन एवं अन्य गतिविधियों हेतु अतिरिक्त भवनों का निर्माण कराया जा रहा है। इस हेतु विगत दो वर्षों में बख्तियारपुर अभियंत्रण महाविद्यालय, बख्तियारपुर के लिए कुल रू० 49.73 करोड़, राजकीय अभियंत्रण महाविद्यालय, वैशाली के लिए रू० 71.28 करोड़, राजकीय अभियंत्रण महाविद्यालय, सुपौल के लिए कुल रू० 26.02 करोड़ एवं राजकीय अभियंत्रण महाविद्यालय, समस्तीपुर के लिए रू० 74.63 करोड़ मात्र की स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है।

इस अवसर पर सचिव, विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग, बिहार, डॉ० प्रतिमा ने विभाग की अन्यान्य जानकारियां देते हुए बताया कि राज्य के छात्र/छात्राओं के साथ आमजनों में खगोलीय विज्ञान में अभिरूचि जागृत करने के उद्देश्य से पटना तारामंडल आधुनिकीकरण के उपरांत आमजनों के लिए संचालित है। साथ हीं दरभंगा में तारामंडल सह- विज्ञान संग्रहालय एवं गया सब रीजनल साइंस सेंटर का निर्माण किया गया है।
सुशासन के कार्यक्रम सात निश्चय-2 (2020-25) के तहत अभियंत्रण शिक्षा को सुदृढ़ करने हेतु बिहार अभियंत्रण विश्वविद्यालय की स्थापना की गयी है। विश्वविद्यालय के भवनों का निर्माण मीठापुर, पटना में कराया जा रहा है। इस हेतु कुल रू० 66.92 करोड़की योजना की स्वीकृति प्रदान की गयी है।
उद्योग के मांग के अनुरूप कुशल एवं दक्ष मानवबल तैयार किये जाने हेतु परंम्परागत विधाओं के साथ नवीनतम विधाओं में प्रशिक्षण के लिए सुशासन के कार्यक्रम (2020-25) के तहत सात निश्चय-2 अन्तर्गत सभी राजकीय पोलिटेकनिक संस्थानों में उभरते हुए तकनीक में उच्चस्तरीय “सेंटर ऑफ एक्सलेंस आई. आई. टी. पटना के सहयोग से संचालित हैं। प्रथम चरण में ये “सेंटर ऑफ एक्सेलेंस” इलेक्ट्रीकल वेहिकल, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इन्टरनेट ऑफ थिंग्स, रोबोटिक्स, 3 डी प्रिन्टिग, ड्रोन टेक्नोलॉजी इत्यादि के क्षेत्र में विकसित किए गए हैं जिसकी कुल लागत 97.00 करोड़ है। द्वितीय चरण में ट्रांसफार्मर निर्माण एवं मरम्मती तथा ऑप्टिकल फाईबर को शामिल किया गया है जिसकी कुल लागत 122.86 करोड़ है।
विगत दो वर्षों में राजकीय अभियंत्रण महाविद्यालयों में कुल 1458 पदों पर तथा राजकीय पोलिटेकनिक संस्थानों में कुल 727 पदों पर शिक्षकों की नियुक्ति की जा चुकी है। इन नियुक्तियों में राज्य सरकार द्वारा प्रावधानित 35% क्षैतिज आरक्षण के फलस्वरूप राजकीय अभियंत्रण महाविद्यालय एवं राजकीय पोलिटेकनिक संस्थानों में क्रमशः 398 एवं 261 महिला शिक्षकों की नियुक्ति की गई है। अभियंत्रण महाविद्यालयों एवं राजकीय पोलिटेकनिक संस्थानों में कार्यालय, पुस्तकालय, कर्मशाला एवं प्रयोगशाला आदि केरिक्त पदों यथा अनुदेशक के 723 पद, प्रयोगशाला सहायक के 1092 पद, सहायक पुस्तकालयअध्यक्ष के 122 पद, फिजिकल ट्रेनिंग अनुदेशक के 84 पद. आशुलिपिक के 77 पद, निम्नवर्गीय लिपिक के 281 पद, कार्यालय परिचारी के 238 पद, पर शीघ्र नियुक्ति हेतु अधियाचना संबंधित आयोग को प्रेषित की जा चुकी है।शैक्षणिक सत्र 2024-25 में प्रथम वर्ष में नामांकन हेतु राजकीय अभियंत्रण महाविद्यालयों में स्नातक स्तर पर सीटों की संख्या 14469 तथा राजकीय पोलिटेकनिक संस्थानों में सीटों की संख्या 17054 है। साथ ही कुल 10 राजकीय अभियंत्रण महाविद्यालयों में स्नातकोत्तर (M.Tech) के विभिन्न पाठ्यक्रमों में कुल 612 सीट पर शैक्षणिक सत्र 2024-25 से पठन-पाठन प्रारंभ है। शैक्षणिक सत्र-2024-25 के लिए कांउसलिंग जारी है और अबतक बी.टेक के लिए 12280 सीटे, पोलिटेकनिक के लिए 13912 एवं एम.टेक के लिए-386 सीटें आवंटित की जा चुकी है। उल्लेखनीय है कि बी.टेक एवं एम. टेकपाठ्यक्रमों में एक तिहाई सीट छात्राओं के लिए क्षेत्रिज रूप से आरक्षित है। शैक्षणिक सत्र 2023-24 में अभियंत्रण महाविद्यालयों में कुल 8429 रेगुलर एवं 2572 लेटरल इंट्री के माध्यम से छात्र-छात्राओं का नामांकन हुआ है। राजकीय पोलिटेकनिक संस्थानों में शैक्षणिक सत्र 2023-24 में कुल-14017 रेगुलर एवं 1161 लेटरल इंट्री के माध्यम से छात्र-छात्राओं का नामांकन हुआ है। विभागान्तर्गत नामांकन की प्रक्रिया विहार संयुक्त प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा पर्षद (B.C.E.C.E) बोर्ड के द्वारा ऑनलाईन कांउसलिंग से छात्रों के मेघा सह विकल्प के आधार पर किया जाता है।
राज्य प्रावैधिकी शिक्षा पर्षद बिहार (एस.बी.टी.ई. बिहार) विभाग का अंग है। इसका दायित्व त्रि-वर्षीय डिप्लोमा पाठ्यक्रमो का संबंधन, विषयवार पाठ्यक्रम तैयार करना एवं परीक्षा संपन्न कर छात्र-छात्राओं को डिग्री प्रदान करना है। सभी राजकीय पोलिटेकनिक एवं निजी पोलिटेकनिक संस्थान हेतु O.B.E (outcome based education) यथा परिणाम आधारित शिक्षा तैयार कर इसी सत्र से लागू कर दिया गया है। एस.बी.टी.ई. बिहार से संबद्धता प्राप्त नवीन राजकीय पोलिटेकनिक पटना-13 को तीन शाखाओं-असैनिक अभियंत्रण, यांत्रिक अभियंत्रण एवं इलेक्ट्रॉनिक्स अभियंत्रण में N.B.A Accreditation प्राप्त हुआ है। उल्लेखनीय है कि एस.बी.टी.ई. बिहार को हाल ही में तीन वर्षों के लिए B.I.S ISO 9001.2015 Certification प्राप्त हुआ है।
राजकीय अभियंत्रण महाविद्यालयों एवं पोलिटेकनिक संस्थानों में शिक्षण शुल्क लगभग शुन्य है। अभियंत्रण महाविद्यालयों में शिक्षण शुल्क प्रतिमाह 10 रूपये एवं पोलिटेकनिक संस्थानों में 05 रूपये है। अध्ययनरत छात्र/छात्राओं को स्टुडेन्ट क्रेडिट कार्ड योजना की सुविधा भी उपलब्ध है।
विभाग द्वारा एन.आई.टी. पटना के परिसर में Incubation Centre के निर्माण हेतु रू0 47.76 करोड़ की योजना की स्वीकृति प्रदान की गई है। Incubation Centreका कार्य राज्य में उद्योग के लिए “Start up” एवं अन्यनवाचार के लिए प्लैटफॉर्म प्रदान करना होगा। वित्तीय वर्ष 2024-25 में इस हेतु सहायक अनुदान स्वरूपरूप कुल रू0 27.41 करोड़ विमुक्त किये गये है।
परामर्श / Consultancyनीति का निरूपण राजकीय अभियंत्रण महाविद्यालय एवं राजकीय पोलिटेकनिक संस्थानों में उपलब्ध मानव संसाधन एवं आधारभूत संरचना के कुशलतम उपयोग के लिए किया गया है। इस नीति के तहत राजकीय अभियंत्रण महाविद्यालय एवं राजकीय पोलिटेकनिक संस्थानों द्वारा सरकार के विभिन्न विभागों, निजी संस्थानों एवं उद्योगों को चार श्रेणीयों यथा (1) अनुसंधान एवं विकास (Research & Development) (II) परीक्षण (Testing) (III) सेवा (Service) (IV) विनिर्माण (Manufacturing) में परामर्श सेवाएँ उपलब्ध कराई जाती है।
विभागान्तर्गत संचालित राजकीय अभियंत्रण महाविद्यालयों एवं पोलिटेकनिक संस्थानों को देश के प्रतिष्ठित संस्थानों के समान स्थापित करने तथा बहुआयामी विकास हेतु संस्थान स्तर पर कार्य योजनाओं के निर्माण, उसके क्रियान्वयन एवं अन्य अनुषांगिक कार्य हेतु प्रक्रियात्मक स्वायत्तता प्रदान किए जाने के उद्देश्य से प्रत्येक संस्थान में ‘संस्थान विकास सोसाईटी का गठन किया जा रहा है। राजकीय अभियंत्रण महाविद्यालयों एवं पोलिटेकनिक संस्थानों में पदस्थापित शिक्षकों द्वारा रोस्टर तैयार कर कक्षा-9, 10, 11 एवं 12 के स्थानीय स्कूल के छात्र/छात्राओं को गणित, विज्ञान, रसायन, भौतिकी एवं अंग्रेजी विषय में अध्ययन एवं अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं हेतु मार्ग दर्शन प्रदान किए जाने के उद्देश्य से ‘पहल’ कार्यक्रम चलाया जा रहा है।
विभाग द्वारा राजकीय अभियंत्रण महाविद्यालयों एवं राजकीय पोलिटेकनिक संस्थानों में खेल-कूद एवं अन्य प्रतियोगिता “उमंग” कार्यक्रम का आयोजन सफलता पूर्वक किया गया। इस हेतु प्रमण्डल स्तर पर प्रतियोगिता के आयोजन के लिए प्रत्येक नोडल संस्थान को रु० 10.00 लाख एवं राज्य स्तर पर प्रतियोगिता के आयोजन के लिए नोडल संस्थान को रू० 20.00 लाख मात्र की राशि आवंटित की गई थी।
राजकीय अभियंत्रण महाविद्यालय एवं राजकीय पोलिटेनिक संस्थानों में शिक्षकों एवं छात्र-छात्राओं हेतु बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली अनिवार्य रूप से लागू की गई है एवं विभाग द्वारा इसका नियमित अनुश्रण किया जा रहा है।

सभी राजकीय अभियंत्रण महाविद्यालयों एवं पोलिटेनिक संस्थानों में छात्र-छात्राओं के भाषायी कौशल एवं Softskill विकसित करने हेतु Language lab का अधिष्ठापन किया गया है। साथ ही छात्र-छात्राओं के शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य हेतु नियमित योग का कार्यक्रम भी संचालित है।विभागन्तर्गत राजकीय अभियंत्रण महाविद्यालयों एवं राजकीय पोलिटेकनिक संस्थानों में शैक्षणिक सत्र-2023-24 में क्रमशः 3479 एवं 4718 कुल-8197 छात्र/छात्राओं का नियोजन प्रतिष्ठित कम्पनियों जैसे T.C.S, Tech Mahindra, Accenture, Hitachi, Bajaj Auto, Tata Electronics Solution Ltd, Motherson Automotive Pvt.Ltd. इत्यादि में हुआ है।
विगत वर्षों में विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग द्वारा किये जा रहे अभिनव प्रयासों से राज्य में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए पर्याप्त अवसर उपलब्ध हुये है। विभाग राज्य में तकनीकी शिक्षा के आधारभूत संरचना को सुदृढकरने की दिशा में अग्रसर है।
इस अवसर पर उदयन मिश्रा, निदेशक, विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग, चन्द्रशेखर सिंह, सचिव, राज्य प्रावैधिक शिक्षा पर्षद, बिहार, पटना तथा अनन्त कुमार, परियोजना निदेशक, बिहार कॉउन्सिल ऑन साइंस एण्ड टेक्नोलॉजी, पटना, सहित विभाग के विभिन्न योजनाओं के नोडल पदाधिकारीगण उपस्थित थे।

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