
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)16 सितंबर।हिन्दी राष्ट्रीय एकता के मूल को सींचती और दृढ करती है। यह भारत की सामाजिक संस्कृति की प्रतीक है।आज नई पीढ़ी के लिए हिन्दी भारत बोध और राष्ट्रीय अस्मिता का साधन है।ये बातें भोजपुर जिला हिन्दी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष प्रो बलिराज ठाकुर ने हिन्दी दिवस पर बम बम पैलेस में आयोजित हिन्दी दिवस समारोह की अध्यक्षता करते हुए कही। प्रो ठाकुर ने कहा कि इस भाषा का ज्ञान मानवता की सारी अच्छाइयों को लेकर आता है। इसकी उन्नति के जरिए मानव जाति की प्रगति निश्चित है।
समारोह के मुख्य अतिथि जे .पी विश्वविद्यालय छपरा के पूर्व कुलपति डॉ० दुर्ग विजय सिंह ने कहा कि विश्व पटल पर हिन्दी का वैभव दिखलायी पड़ना हमारे लिए गर्व की बात है ।यह खुशी की बात है कि आज हमारा देश हिंदी को विश्व के मंच पर खड़ा करने का उत्तर दायित्व ले चुका है। विशिष्ट अतिथि आचार्य भारत भूषण पाण्डेय ने कहा कि आज भी हम पर अंग्रेजी की दासता हावी है।कवि समीक्षक जितेंद्र कुमार ने कहा कि बनारसी प्रसाद भोजपुरी गंभीर साधनारत साहित्यकार थे जिनकी रचनाऐं अभी भी मूल्यांकन की बाट जोह रही हैं। डाॅक्टर अयोध्या प्रसाद उपाध्याय ने विस्तार से भारतेंदु हरिश्चंद्र के योगदान की चर्चा की। भोजपुरी विभागाध्यक्ष प्रो० दिवाकर पांडेय ने राजभाषा और राष्ट्रभाषा की समस्याओं पर विस्तार से प्रकाश डाला और उसके समाधान हेतु आवश्यक कदम उठाने की बात भी कही। सम्मेलन के प्रधानमंत्री डॉ नंद जी दुबे ने अतिथियों का स्वागत किया। संचालन राकेश तिवारी और धन्यवाद ज्ञापन रंग जी सिंह ने किया।शिवदास सिंह और शशिकांत तिवारी ने सम्मेलन की सदस्यता बढ़ाने पर जोर दिया। दूसरे सत्र में काव्य पाठ करने वालों में मधु मिश्र, जनार्दन मिश्र,जगत नंदन सहाय,डॉ किरण कुमारी, अरविंद सिंह ,डॉo विश्वनाथ चौधरी, डॉo रेणु मिश्र,श्री शरद जी, राम विनय पांडेय, तथा डॉo अयोध्या प्रसाद उपाध्याय और नर्मदेश्वर उपाध्याय ने श्रोताओं को अपनी कविताओं से रस विभोर कर दिया।
