आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)19 जून।बदलते जीवन शैली और खानपान के कारण इन दिनों हमारे स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां बढ़ी है ।जिस कारण लोगों में बीमारियों बढ़ते जा रही है और दवाइयां मजबूरी । ऐसे में हमारे स्वास्थ्य के क्षेत्र में मकई का रेशा वरदान साबित हुआ है । मकई के रेशा जो हम फेंक दिया करते हैं उस पर किए गए शोध में जो खुलासे हुए हैं उसमें प्रमुख हैं इंटरनेशनल जनरल ऑफ़ पैरासिटिक साइंस एंड रिसर्च बेंगलुरु भारत द्वारा 1 सितंबर 2021 को छपे आर्टिकल के अनुसार मकई के रेशे के औषधीय गुणों पर किया गया शोध से पता चलता है की मकई के रेशे का चाय (काढ़ा) हमारे सेहत के लिए वरदान है ।वर्ष 2009 से प्राकृतिक चिकित्सक के रूप में सेवा दे रहे आयुष कॉलेज हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर के निदेशक डॉ पी पुष्कर ने बताया कि मकई के रेशा से बना काढ़ा से अब तक सैकड़ो पीड़ितों को गंभीर रोगों के निजात में संतोष जनक परिणाम देखने को मिला है । गंभीर बीमारियों में त्वचा रोग, डायबिटीज, आर्टरी ब्लॉकेज, किडनी स्टोन, जोड़ों में दर्द अर्थराइटिस, से लेकर डायलिसिस तक की पीड़ितों को अपनी रोग से छुटकारा मिला है। इन्होंने बताया अब तक मकई के रेशों से बना काढ़ा के लाभ पर दर्जनों शोध पत्र प्रकाशित हो चुके हैं । सभी शोधकर्ताओं ने इसे औषधि गुणों से परिपूर्ण और कई गंभीर बीमारियों के निदान में वरदान बताया है।यह गुर्दे की पथरी,रक्त शर्करा नियंत्रण,रक्तचाप प्रबंधन,त्वचा संबंधी रोगों,सूजन संबंधी,जोड़ का दर्द आदि में काफी लाभदायक सिद्ध हुआ है।
