पटना/बिहार (राकेश मंगल सिन्हा) 4 जून। भारतीय राजनीति एक ऐसे मोड़ पर पहुँच गई है जिसमें नीतीश जी एक ऐतिहासिक भूमिका निभा सकते हैं। नीतीश जी के साथ मैंने लंबे अरसे तक राजनीति की है। मैं जानता हूँ कि नीतीश जी अंदर से सेकुलर हैं। एनडीए गठबंधन का हिस्सा होने के बावजूद भी वे कभी भी अपने सेकुलर एजेंडा से पीछे नहीं हटे। उक्त विचार राजद के वरिष्ठ नेता, पूर्व मंत्री और पूर्व सांसद शिवानंद तिवारी ने व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि इस चुनाव अभियान के बीच राजस्थान में प्रधानमंत्री मोदी जी ने मुसलमानों के खिलाफ जैसी भाषा का प्रयोग किया, वह अकल्पनीय था। कोई सेकुलर व्यक्ति इस तरह की भाषा को सहन कैसे कर सकता है। नीतीश जी महात्मा गाँधी को अपना आदर्श मानते हैं। उन्होंने कहा कि मोदी जी कहते हैं कि गाँधी को दुनिया ने एटिनबरो के फ़िल्म के बाद जाना। इसके पहले दुनिया गाँधी को नहीं जानती थी। लोहिया जी ने कहा था कि गाँधी जैसा व्यक्ति हज़ार-दो हज़ार साल में कभी पैदा होता है। उन्होंने कहा कि जो आदमी गाँधी जी को नहीं जानता है तथा हमारे देश की विरासत से अनजान है, वह देश का प्रधानमंत्री है। इसको देश का दुर्भाग्य नहीं तो क्या कहा जायेगा। उन्होंने कहा कि भले ही हमारा देश ग़रीब है तथा पिछड़ा है लेकिन जब-जब लोकतंत्र पर संकट आया है, देश की जनता ने अपनी समझदारी और परिपक्वता का परिचय दिया है। इस चुनाव का जनादेश भी इसी तरह का है। चार सौ पार का दंभ भरने वाले और इसके सहारे देश को हिंदू राष्ट्र बनाने की घोषणा करने वालों के दंभ को देश की जनता ने तोड़ा है। इस ऐतिहासिक पल में नीतीश जी को एक ऐतिहासिक भूमिका निभाने का अवसर मिला है। एक पुराने साथी और सहकर्मी होने के नाते मैं नीतीश जी से आदर के साथ अनुरोध करूँगा कि आज की विशेष परिस्थिति में अपनी भूमिका पर पुनर्विचार करें।
