आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)24 मई।घुसिया विक्रमगंज रोहतास मे आयोजित श्रीमद्भागवत सप्ताह यज्ञ के चतुर्थ दिवस पर गुरूवार को ब्रह्मपुरपीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानुजाचार्य विद्या वाचस्पति आचार्य धर्मेन्द्र जी महाराज ने कहा कि नारायण बडे कृपालु है।उनकी कृपा सब पर बरसती रहती है।बस शर्त इतना ही है श्रद्धा से उन्हे याद किया जाय।याद करने में देरी हो सकती है।उनके दया करने में देर नही होती।इसके प्रमाण मे गजेन्द्र मोक्ष की कथा कही।श्रीमद्भागवत की कथा व नारायण नाम मे इतनी शक्ति है कि पापी भी नारायण नाम से गोविंद लोक का अधिकारी बन जाता है।इस कथन की पुष्टि में अजामिल मोक्ष की कथा कही ।आचार्य जी ने आगे प्रह्लाद चरित्र को कहते हुए कहा कि कोई जरूरी नहीं है कि उत्तम कुल मे उत्तम संतान हो और संस्कार हीन कुल में संस्कारहीन संतान हो। इस सिद्धांत के प्रमाण में दृष्टांत देते हुए आचार्य जी ने कहा कि कश्यप ऋषि के कुल मे हिरन्याच्छ,हिरन्यकश्यपू का आना और हिरन्यकश्यपू के कुल मे भक्त राज प्रह्लाद के आने की कथा कही ।सूर्य वंश का वर्णन करते हुए अम्बरीष, सगर चरित्र पर प्रकाश डाला।फिर सागर मंथन के हेतु और मंथन से निकले रत्नो,और चारों कुम्भो की कथा कही।आगे उन्होंने गंगा अवतरण की कथा कहते हुए कहा गंगा जी दुनिया के पापियों को पाप से मुक्त करती है जबकि गंगा जब अपवित्र होती है तो वैष्णव के स्नान मात्र से पवित्र हो जाती है। वर्तमान संदर्भ मे गंगा को प्रदूषण मुक्ति पर बल दिया। आगे उन्होंने रामजन्म के विविध हेतु की चर्चा करते हुए श्रीराम की बाललीला, विवाह लीला, वन लीला, रण लीला ,राजलीला और प्रस्थान लीलाओं का सारगर्भित व्याख्या करते हुए कहा कि श्रीराम जी का पूरा जीवन मर्यादित रहा जो सनातन धर्म का व्यावहारिक स्वरुप है,अनुकरणीय है। आगे आचार्य ने श्रीकृष्ण अवतरण की पूर्व पीठिका बतायी ।कथा में प्रक्षेत्र के भक्तों की भीड़ उमड़ रही है,सब कथा सुनकर कहते सुने जा रहे हैं पहली बार इस प्रकार की रसभरी श्रीमद्भागवत की दिव्य कथा सुनने को मिल रही है।
