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होली में फगुआ ..झुमेला बबुआ!

पटना/बिहार (राकेश मंगल सिन्हा) 25 मार्च। आजकल होली की धूम मची है। सभी होली के रंग में रंगीन बने हैं। तन से लेकर मन तक होली के रंग से सराबोर है। क्या शहर, क्या गांव – फगुनहट की बयार में सभी बह रहे हैं। वसंतोत्सव और फाल्गुन के महीने में अन्योन्याश्रय संबंध है। अगर यूं कहा जाय कि वसंतोत्सव और फाल्गुन दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं तो इसमें कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। वसंत पंचमी के दिन माॅ शारदे की पूजा अर्चना में अन्य पूजा सामग्री के साथ-साथ अबीर और गुलाल भी चढ़ाया जाता है। इसी दिन से होली की शुरुआत हो जाती है। ग्रामीण क्षेत्रों में तो लोग बसंत पंचमी को छोटी होली भी कहते हैं।
वसंत के मौसम में पेड़ पौधों में कोपलें फूटने लगते हैं। पुरानी पत्तियाॅ झड़ जाती हैं और नई पत्तियाॅ आ जाती हैं। पेड़ पौधे नये परिधान में दिखने लगते हैं। कड़ाके की ठंढ के बाद वसंतोत्सव और फाल्गुन के महीने में प्रकृति मनुष्यों में नई स्फूर्ति, ऊर्जा और उल्लास का संचार करती है। इसी उत्साह और उमंग को होली के माध्यम से प्रकट किया जाता है। होली के इस खुमार से कोई भी अछूता नहीं रहता है। रंगों के इस त्योहार में तन से मन तक रंगों में डूबे रहते हैं। सभी एक ही रंग में रंगे दिखते हैं- “जित देखौं तित लाल”। भोजपुरी में एक कहावत है – “फागुन में बुढ़वो देवर लागेलन”।
होली मे रंग और राग दोनों का विशेष महत्व है। होली रंगों का त्यौहार रंगोत्सव तो है ही।

बिहार एक गांव में एकजुट हो फगुआ गाने में मस्त ग्रामीण।

फाल्गुन के महीने में फगुआ या फाग गाने की पुरानी परंपरा है। गाँव के चौपाल में, किसी देवस्थल में, किसी सार्वजनिक स्थल पर या किसी व्यक्ति विशेष के दलान में फागुन महीने में फगुआ गाया जाता है। पर आज के भाग दौड़ की जिंदगी, बेरोजगारी, रूपये-पैसे के पीछे भाग- दौड़ और प्रतिस्पर्धा के इस दौर में अब फगुआ गाने की प्रथा भी विलुप्त होने के कगार पर है। फगुआ गाने के दौरान ढोलक, ढोल-मजीरा, झाल जैसे अन्य उपकरणों की भी आवश्यकता होती है। अकेले नहीं बल्कि समूह में गाया जाता है फगुआ या फाग। समयाभाव या नौकरी-चाकरी करने के कारण उतने लोग एक साथ जुट ही नहीं पा रहे हैं। नये जनरेशन के बच्चों में तो फगुआ या फाग गाने के प्रति उत्साह और इच्छा भी नहीं दिख रहा है। अगर ऐसा ही रहा तो फाल्गुन में फगुआ या फाग गाने की प्रथा खत्म होने लगे तो इसमें कोई आश्चर्य नहीं होगा।

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