RKTV NEWS/अनिल सिंह, 07 जनवरी।बिहार राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य में आवश्यक सुधार के लिए आहार विविधता अपनाकर आवश्यक परिवर्तन लाया जा सकता है। इसी के तहत जीविका परियोजना में स्वयं सहायता समूहों और उनके ग्राम संगठनो के द्वारा आजीविका संवर्धन के साथ ही साथ समुदाय में स्वास्थ्य, पोषण और स्वच्छता पर जागरूकता और व्यवहार परिवर्तन के लिए लगातार प्रयास किये जा रहे हैं।इन प्रयासों को और मजबूती देने के लिए ग्राम संगठन स्तर पर पिछले 6 साल से लखीसराय जिले के भी सभी सातों प्रखंडो और उससे जुड़े गांवो में हर घर स्वास्थ्य एवं पोषण अभियान (पारिवारिक आहार विविधता अभियान) जारी है।यह अभियान जीविका दीदियों द्वारा ग्राम संगठन के माध्यम से चलाया जा रहा है।इस अभियान में गर्भवती एवं धात्री माता (0-6 माह के बच्चे) एवं 6-23 माह के बच्चों की माताएँ लक्षित हैं।
इस अभियान में पोषण के पंच सूत्र (पाँच विषयों) को शामिल किया गया है जिसके अंतर्गत
1. स्तनपान: जन्म के तुरंत बाद एवं 6 माह तक केवल और केवल माँ का दूध
2. पूरक आहार: 6 माह पूरा होते हीं बच्चों को पूरक आहार देना चाहिए, 7 खाद्य समूहों में से कम से कम 4 खाद्य समूहों को शामिल कर बच्चो के लिए पूरक आहार बनाना चाहिए।
3. माताओं के लिए खाद्य विविधता: 10 में से कम से कम 5 खाद्य समूह का खाना खाना चाहिए।
4. पोषण–बगीचा: प्रत्येक घर में पोषण बगीचा लगाना ताकि प्रत्येक मौसम में कम से कम तीन फल या सब्जी मिल सके।
5. हाथों की साफ सफाई एवं शौचालय का उपयोग: खाना बनाने, खाने एवं बच्चों को खिलाने से पहले साबुन से हाथ धोना चाहिए, परिवार के सभी सदस्यों को साबुन से कम से कम 20 सेकेंड तक हाथ बराबर धोना चाहिए।

मनीष भाटिया , प्रबंधक, स्वास्थ्य एवं पोषण ( प्रभारी) बताते हैं कि इस अभियान की मुख्य गतिविधि पोषण पंच सूत्र पर सभी स्वयं सहायता समूहों में चर्चा कर लाभार्थियों की सूची का निर्माण करना एवं तत्पश्चात उन चिन्हित लाभर्थियों का ग्राम संगठन की स्वास्थ्य उप-समिति की दीदियों द्वारा गृह भ्रमण कर पुनः जागरूक करना है।गृह भ्रमण के दौरान लीफलेट के माध्यम से खाद्य समूहों की जानकारी दी जा रही है साथ ही साथ खाद्य समूहों से सम्बंधित स्टीकर भी लाभार्थियों के घर चिपकाया जा रहा है।उन्होंने बताया की इसी दौरान उस घर में उपलब्ध खाद्य सामग्री द्वारा खाद्य प्रदर्शन भी किया जा रहा है साथ हीं साथ लघु फिल्मों के माध्यम से भी जागरूकता फैलाई जा रही है।अभियान के दौरान उपस्थित महिलाओं एवं युवतियों से हाथों की सफाई की विभिन्न प्रक्रिया को भी बताया जा रहा है इस अभियान को सफलता पूर्वक चलाने के लिए जिला स्तर के प्रबंधक एवं प्रखंड स्तर के कर्मियों समेत सभी कैडरों को प्रशिक्षित किया गया है।
रौशन कुमार, प्रबंधक, संचार, जीविका बताते हैं कि इस अभियान के दौरान जो भी कैडर यथा एम्.आर.पी. सी.एन.आर.पी, एवं सी.एम् को बेहतर क्रियान्वित करते है को समय-समय पर प्रोत्साहित करने के उदेश्य से सम्मानित भी किया जाता रहा है। पारिवारिक विदित हो की आहार विविधिता अभियान अंतर्गत लखीसराय जिला में कुल 665 सी.एम्. 15 मास्टर संसाधन सेवी एवं 61 सामुदायिक संसाधन सेवी को व्यवहार परिवर्तन हेतु पांच प्रकार के माड्यूल पर प्रशिक्षण दिया गया है।
प्रशिक्षित कैडर जीविका से संबद्ध कुल 8 हजार 2 सौ 60 समूहों और उससे जुड़े लाभार्थियों के घर-घर जाकर बेहतर स्वास्थ्य एवं पोषण हेतु जागरूक कर रही हैं l इस अभियान के व्यापक परिणाम भी मिलने लगे हैं।श्वेता कुमारी , मास्टर संसाधन सेवी बताती हैं कि जब से हम सभी अभियान चला रहे हैं, ग्रामीण महिलाओं में अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता आई है। समय दर समय पर महिलाएं हम सभी कैडर से खान-पान एवं व्यवहार परिवर्तन को लेकर सलाह लेती हैं। गर्भावस्था के दौरान भी दवा एवं अन्य समस्याओं पर भी पूछती हैं।पारिवारिक आहार विविधिता अभियान का असर ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक तौर पर दिख रहा है।

