शालिनी ओझा/05 नवंबर।एंजायटी, क्रोध, डिप्रेशन के आज हर एकल परिवार में एक दो मरीज जरूर है और घर में कितने लोग… मात्र चार या तीन। इसमें दो मरीज ही हैं।
संतुलित खान पान और योग से हम शारीरिक बीमारी से एक हद तक तो दूर रह सकते हैं पर..मानसिक बीमारी का क्या? लोग खुश होने के लिए क्लब पार्टी, किटी पार्टी, जुआ ,शराब इत्यादि का सहारा लेते हैं पर क्या इससे हम एंजायटी और डिप्रेशन को दूर रख पा रहे हैं?यह सोचनीय प्रश्न है।
पहले इस बीमारी का कोई नाम भी नहीं जानता था और इन सब का मात्र एक कारण है एकल परिवार का बढ़ना।कहते हैं मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और समाज की प्राथमिक इकाई परिवार है और परिवार वह जिसमें चाचा, ताऊ, बुआ, मौसी, दादी, मां, पापा यानी एक संपूर्ण संयुक्त परिवार। समुचित विकास हेतु प्रत्येक व्यक्ति के लिए आर्थिक, शारीरिक, मानसिक, सुरक्षा का वातावरण होना नितांत आवश्यक है। संयुक्त परिवार में रहते हुए परिजनों के कार्यों का वितरण आसान हो जाता है साथ ही भावी पीढ़ी को सुरक्षित वातावरण एवं स्वास्थ् पालन पोषण द्वारा मानव का भविष्य भी सुरक्षित होता है। उसके विकास का मार्ग प्रशस्त होता है परिवार में रहते हुए ही भावी पीढ़ी को उचित मार्ग निर्देशन देकर जिंदगी जीने का हुनर सिखाया जाता है।
भले ही एकल परिवार बहुतायत में है नौकरी ,स्वतंत्रता , कृषि के प्रति अलगाव, पलायन के कारण कोई भी हो जिसके कारण आज एकल परिवार की संख्या बढ़ रही है लेकिन सही मायनो में संयुक्त परिवार को ही संपूर्ण परिवार माना जाता है। एकल परिवार तो बस मजबूरी का रूप है औद्योगिक विकास के चलते संयुक्त परिवार का बिखरना जारी है। संयुक्त परिवार के बिखरने के कारण और उसके अस्तित्व पर मंडराते खतरे के कई कारण हुए हैं।
रोजगार
बढ़ती जनसंख्या तथा घटते रोजगार के कारण परिवार के सदस्यों को गांव से शहर और शहर से बड़े शहर की ओर पलायन। विदेश जाना भी इसी कड़ी की आवश्यकता है।
बढ़ता उपभोक्तावाद
संयुक्त परिवार टूटने का यह भी एक महत्वपूर्ण कारण है अधिक सुविधाएं पाने की लालसा ने व्यक्ति को महत्वाकांक्षी बना दिया है ,लोगो में सहनशक्ति का ह्रास हुआ है और स्वार्थपरता बढती जा रही है अब इंसान खुशियां परिवार में नहीं बल्कि सुख सुविधा जुटा कर पूरा कर रहा जो संयुक्त परिवार के बिखरने का कारण बन रहा है।
एकल परिवार में रहते हुए मानव भावनात्मक रूप से विकलांग होता जा रहा जिम्मेदारियों के बोझ के कारण अत्यधिक तनाव सहन करना पड़ रहा है।
अब आप देखिए ना.. बुआ, चाचा, चाची, मामा मासी से अपने दिल की बात कह देने से मानसिक बीमारियां नहीं होती थी अब इसके लिए भी बाहर के लोगों को ढूंढ उनसे परेशानियां बता दिल का बोझ हल्का करते हैं और फिर.. वह बात सरेआम हो जाने पर शर्मिंदगी झेलनी पड़ती है.। संयुक्त परिवार का महत्व एकल परिवार में रहने वाले लोग बखूबी समझते हैं।आज संयुक्त परिवार के अनेक फायदे नजर आते हैं।
सुरक्षा और स्वास्थ्य।
परिवार के प्रत्येक सदस्य की सुरक्षा की जिम्मेदारी सभी परिजन मिलजुल कर निभाते हैं किसी भी सदस्य की स्वास्थ्य सुरक्षा, आर्थिक समस्या पूरे परिवार की समस्या होती है कोई भी परेशानी सरलता से सुलझा ली जाती है यदि कोई सदस्य गंभीर बीमारी से जुझता है तो परिवार के सभी सदस्य अपने सहयोग से उसकी बीमारी से निजात दिलाने की हर संभव कोशिश करते हैं।
कार्यों का विभाजन।
संयुक्त परिवार में सभी के कार्यों का विभाजन हो जाता है क्षमता के मुताबिक व सदस्य अपने हिस्से आने वाले काम को सहजता से कर अन्य जिम्मेदारियों से मुक्त हो तनाव मुक्त रहता है परिवार के सभी सदस्यों की आवश्यकताओं की पूर्ति अपेक्षाकृत अधिक हो सकती है और जीवन उल्लास पूर्ण व्यतीत होता है।
कम व्यय
संयुक्त परिवार में रहकर कम मात्रा में वस्तु की खरीद होती हैं जिसमें वह कम होता है जैसे फ्रिज, टीवी, कार ,एसी, बिजली बिल.. कम बजट में उच्च शैली के साथ जीवन यापन किया जा सकता है।
भावी पीढ़ी का समुचित विकास।
संयुक्त परिवार में बच्चों का शारीरिक, मानसिक, चारित्रिक विकास उत्तम होता है दादा ,दादी का अनुभव बुआ, चाचा का दुलार। एक ने डाटा तो दूजे ने समझा दिया को अब नेटफ्लिक्स और हिंसात्मक वीडियो गेम ने अपना अधिकार बना लिया है एकल परिवार में मां-बाप का प्यार ही ढंग से नहीं मिल पाता क्योंकि ज्यादातर दोनों वर्किंग होते हैं।
संयुक्त परिवार के सभी सदस्य एक दूसरे के व्यवहार भाव पर निगरानी बनाए रखते हैं किसी सदस्य के अवांछनीय गतिविधि पर अंकुश लगा रहता है कोई सदस्य और असामाजिक कार्य नहीं कर पाता वरिष्ठ सदस्यों के भय और इज्जत के कारण शराब, नशा या अन्य बुराइयों से बचा रहता है सभी सदस्यों के साथ रहने से परिवार में एकता रहती है जिससे दूसरे व्यक्ति इस परिवार पर अनर्गल आक्षेप नहीं लगा पाते। संयुक्त परिवार की गरिमा बेमिसाल होती है जो एकल परिवार में कभी नहीं हो सकती।
