
आरा/भोजपुर 19 अक्टूबर। जाने मार द लोग…. ये संबोधन था दर्द से कराह रही एक लावारिस महिला का जिसे समाज सेवी अमरदीप कुमार जय ने इलाज हेतु सदर अस्पताल आरा में भर्ती कराया था।स्थानीय सदर अस्पताल प्रशासन पर आरा के समाजसेवी अमरदीप कुमार जय ने जन सुविधाओं के लिए निर्मित चिकित्सीय उपचार के लिए अपनाई जा रही दोहरी नीति पर क्षोभ जाहिर किया है।
समाजसेवी अमरदीप कुमार जय ने एक विज्ञप्ति के माध्यम से बताया है की सदर अस्पताल के आपातकालीन मुख्य द्वार के पास कई दिनों से पड़ी लाचार बेबस महिला जिसके पैरों में जख्म था जिसे उन्होंने अपनी सेवा भावना और मानवता के नाते सदर अस्पताल में इलाज हेतु भर्ती कराया था जिसे अस्पताल प्रशासन द्वारा कल बाहर निकाल दिया गया।

अमरदीप जय ने इस अमानवीय व्यवहार पर क्षोभ प्रकट करते हुए इसकी कड़ी निन्दा करते हुए कहा की क्या इस दुनिया में बेबस लाचार और लावारिस लोगो को जीने का अधिकार नहीं? क्या वो सरकारी चिकित्सा सुविधा पाने के अधिकृत नहीं ? उन्होंने कहा की ऐसी घटना मानवता को शर्मशार करती है जो हमारे समाज को कलंकित कर रही है।
