आदर्श विद्यार्थी बनने का मंत्र, व्यक्तित्व विकास, कम्युनिकेशन स्किल, एक्स्ट्रा एक्टिविटी को अपने जीवन मे करे चरितार्थ।

सोशल एंड इमोशनल लर्निंग के साथ नैतिक शिक्षा व नैतिक ज्ञान पर दे विशेष रूप से ध्यान:उपायुक्त

उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले जिले के विभिन्न प्रखंडो के बच्चों व शिक्षकों को उपायुक्त ने पुरिस्कृत।

विद्यार्थी केवल अकादमिक सफलता तक सीमित न रहें, एक जिम्मेदार नागरिक बनना ही शिक्षा का असली उद्देश्य: उपायुक्त

बच्चों में वैज्ञानिक सोच, नवाचार और सृजन क्षमता विकसित करना सबकी साझा जिम्मेदारी।
RKTV NEWS/देवघर (झारखंड)23 मार्च।उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी नमन प्रियेश लकड़ा आज आर. मित्रा परिसर में आयोजित जिला स्तरीय पीoएमo श्री FLN मेला सह TLM प्रदर्शनी, 2026 में शामिल हुए। इस दौरान कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलित कर उपायुक्त व उपस्थित अतिथियों ने सयुंक्त रूप से किया।
इसके अलावा कार्यक्रम के दौरान उपायुक्त नमन प्रियेश लकड़ा ने सभी को संबोधित करते हुए कहा कि इस तरह के शैक्षणिक व सांस्कृतिक कार्यक्रम बच्चों में रचनात्मकता, तार्किक सोच, आत्मविश्वास और कम्युनिकेशन स्किल को मजबूत करते हैं।
उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे केवल अकादमिक सफलता तक सीमित न रहें, बल्कि आदर्श विद्यार्थी बनकर जीवन में एक अच्छा इंसान और जिम्मेदार नागरिक बनने का लक्ष्य तय करें। आगे उपायुक्त ने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य बच्चों को समाज के प्रति संवेदनशील बनाना है। जब विद्यार्थी अपने कर्तव्यों को समझते हुए आगे बढ़ते हैं, तभी वे देश और समाज के लिए उपयोगी नागरिक बन पाते हैं।
उन्होंने बच्चों में वैज्ञानिक सोच, नवाचार और सृजन क्षमता के विकास पर विशेष जोर देते हुए कहा कि भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए यही गुण सबसे अधिक सहायक होंगे। साथ ही उन्होंने आदर्श छात्र बनने के तीन गुण को अपने जीवन में चरितार्थ करने के उद्देश्य से व्यक्तित्व विकास, कम्युनिकेशन स्किल, एक्स्ट्रा एक्टिविटी (पेंटिंग, स्पोर्ट्स, आर्ट एंड क्राफ्ट, डिबेट) पर विशेष रूप से ध्यान देने की बात कही। साथ ही बच्चों के एक्स्ट्रा एक्टिविटी की प्रोफाइलिंग जरूर करें। इससे बच्चों की छिपी हुई प्रतिभा को पहचानकर उसे सही दिशा देने में मदद मिलेगी।
रचनात्मकता और कौशल विकास पर जोर
कार्यक्रम के दौरान उपायुक्त ने कहा कि इस तरह के आयोजनों से बच्चों में न केवल आत्मविश्वास बढ़ता है, बल्कि उनकी ‘कम्युनिकेशन स्किल’ और सोचने की शक्ति भी मजबूत होती है।
उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे केवल किताबी ज्ञान और परीक्षाओं में अच्छे अंक लाने तक ही सीमित न रहें, बल्कि जीवन में एक आदर्श विद्यार्थी और जिम्मेदार नागरिक बनने का लक्ष्य निर्धारित करें।
संबोधन के दौरान उन्होंने शिक्षा के गहरे अर्थ को समझाते हुए कहा, “शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य बच्चों को समाज के प्रति संवेदनशील बनाना है।
जब विद्यार्थी अपने कर्तव्यों को समझते हुए आगे बढ़ते हैं, तभी वे देश और समाज के लिए सही मायने में उपयोगी साबित होते हैं।”
उन्होंने विशेष रूप से बच्चों में वैज्ञानिक सोच नवाचार और सृजन क्षमता के विकास पर बल दिया, जिसे उन्होंने भविष्य की चुनौतियों से निपटने का सबसे प्रभावी हथियार बताया।
इसके अलावा कार्यक्रम के दौरान अनुमंडल पदाधिकारी रवि कुमार ने बच्चों की रचनात्मकता और तार्किक क्षमता को निखारने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव साझा दिए।
आगे उपायुक्त व अनुमंडल पदाधिकारी ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विभिन्न प्रखंडो के बच्चों व शिक्षकों को पुरिस्कृत किया। इस दौरान उपरोक्त के अलावा जिला शिक्षा पदाधिकारी, जिला शिक्षा अधीक्षक, सहायक जनसंपर्क पदाधिकारी संबंधित विभाग के अधिकारी व कर्मी आदि उपस्थित थे।


