आरा/भोजपुर 18 सितंबर।बक्शी कुलदीप नारायण कल्चरल सोसायटी की ओर से भारतीय शास्त्रीय संगीत के संरक्षण हेतु प्रत्येक गुरुवार को आरा में सजेगी शास्त्रीय संगीत की महफिल। जिला स्तर पर शास्त्रीय संगीत के विकास के लिये संगीतज्ञों की एक बैठक स्थानीय महाजन टोली स्थित ठाकुरबाड़ी प्रांगण में की गई। बैठक की अध्यक्षता करते हुये गुरु बक्शी विकास ने कहा कि आरा की सांगीतिक गतिविधियों का इतिहास अत्यंत गौरवशाली व समृद्ध रहा है। 20वीं सदी के मध्य में डागर बंधु व पंडित ॐकार नाथ ठाकुर जैसे महान संगीतज्ञों ने आरा को “संगीतज्ञों का तीर्थ” और “छोटकी बनारस” की संज्ञा से अलंकृत किया है। महान गायिका विदुषी गिरजा देवी का पहला सार्वजनिक मंचीय प्रस्तुति की शुरुआत भी आरा से ही हुई है। आरा के लियॆ यह कीर्तिमान स्थापित करने में महान संगीतज्ञ व जमीरा के राजा पखावज सम्राट बाबू ललन जी के नाम से विख्यात स्व. शत्रुंजय प्रसाद सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। संगीत की एक लंबी परंपरा को आरा ने आज भी संजोये रखा है। इस गौरवशाली परंपरा से आज की पीढ़ी को अवगत करवाने के लिये एक नये आयोजन की शुरुआत होने जा रही है। वरिष्ठ तबला वादक सुशील देहाती ने कहा कि आरा की सांगीतिक गरिमा को ध्यान में रखते हुये प्रत्येक गुरुवार को महाजन टोली स्थित ठाकुरबाड़ी प्रांगण में शास्त्रीय संगीत की सभा आयोजित की जा रहीं है। गुरुवार को ठाकुरजी का पट आम लोग के दर्शन के लिये खोली जाएगी। संगीतज्ञ महेश यादव ने कहा कि ठाकुरबाड़ी की संगीत परंपरा एक शताब्दी से कायम है। यह आरा की सांगीतिक पृष्ठभूमि को समृद्व करने में महत्वपूर्ण बिंदु है। विदुषी बिमला देवी ने कहा कि युवाओं में शास्त्रीय संगीत को लेकर यह दुविधा होती है कि वो प्रस्तुति कहां करेंगे। यह मंच ऐसे कलाकारों को सक्रिय रखने में महत्वपूर्ण होगा। संचालन दूरदर्शन के कलाकार कथक नर्तक अमित कुमार ने किया। बैठक में अजीत पाण्डेय, श्रेया पाण्डे, खुशी कुमारी गुप्ता समेत कई युवा संगीतज्ञ उपस्थित थे।
