
मो०:8228828371)
पहला प्रेम!
हाँ वही,
मेरा पहला प्रेम।
जब हम आँखें खोलते हैं,
तो सबसे पहले उसी को देखते हैं।
उसके बिना हमारा जीवन अधूरा सा लगता है।
हां वही,
मेरी प्रियतमा।
जब मैं बेचैन होता हूँ,
तो वह मुझे सहारा देती है।
मेरी बेरोज़गारी में मुझे व्यस्त रखती है।
वही तो हमारी मनोरंजन कराती है।
वह बेरोज़गार लोगों के लिए
एक गौडफादर की तरह है।
जिन लोगों के पास कोई काम नहीं,
उन्हें भी वह,
कुछ न कुछ करने का अवसर देती है।
उससे लगाव,
लोगों को पागलपन से दूर रखता है।
स्त्री, पुरुष, बच्चे, युवा,बूढ़े
सभी के सभी,
उसी के आकर्षण में बँधे हुए हैं।
लोग दिन भर,
उसी में लगे रहते हैं।
कभी-कभी वह मनुष्य को,
गुस्सैल, चिड़चिड़ा और ज़िद्दी भी बना देती है।
वह बच्चों को भी,
समय से पहले युवा बना देती है।
फिर भी लोग,
उससे बहुत प्रेम करते हैं।
वह एक ऐसी दुल्हन की तरह है।
जिसका आकर्षण,
कभी कम नहीं होता।
क्योंकि वह,
मानव जीवन का,
एक आवश्यक हिस्सा बन चुकी है।
दिन-ब-दिन,
वह लोगों को अपनी ओर,
अपनी दिलकश अदाओं से,
आकर्षित करती रहती है।
अब वह,
लोगों के मानो आदत सी बन गई है।
लोग उसकी रहस्य जानने के लिए,
उसी में दिन भर व्यस्त रहते हैं।
उससे थोड़ा-सा ज्ञान पाकर,
लोग अपने को,
बुद्धिमान समझने लगते हैं।
क्या तुम,
मेरी उस प्रियतमा को जानना चाहोगे?
अगर हां,
तो सुनो,
मेरी प्रियतमा है मेरी मोबाइल,
और उसकी आत्मा है इंटरनेट।
लोग उसके पीछे पागल है,
उसको छोड़ कर दूसरी चीज,
अब अच्छी नहीं लगती।
इसलिए लोग,
अब चुपचाप मोबाइल चलाते हैं,
अकेले गुनगुनाते हैं,
और अकेले ही मुस्कुरा लेते हैं।
कोई उन्हें पागल दीवाना नहीं कहता,
क्योंकि अब सभी लोगों का व्यवहार,
शायद एक-सा ही हो गया है।
मोबाइल और इंटरनेट ने
एक नई दुनिया बना दी है।
और हम उसी दुनिया में
खुशी-खुशी से जी रहे हैं।
वे हमें
अकेले रहते हुए भी,
खुद में,
खुश रहने का हुनर देती हैं।
यही तो चमत्कार हैं।
मोबाइल का।
कि बेरोजगारों के लिए काम,
और नेताओं के लिए आराम ले कर आई है।
वरना सड़कों पर कभी प्रदर्शन,
और जलते हुए पुतलों का दर्शन था।
आज वो सब कहां हैं,
सब लोग अमन चैन से,
अपने अपने मोबाइल में व्यस्त हैं।
जी हां—-
व्यस्त हैं ————-।

