
भोपाल/मध्यप्रदेश ( मनोज कुमार प्रसाद)01 अगस्त। पद्मश्री से सम्मानित वरिष्ठ साहित्यकार, पत्रकार, समाजसेवी एवं राष्ट्रभाषा प्रचार समिति के पूर्व संचालक पं. कैलाश चन्द्र पंत का शुक्रवार को उपचार के दौरान निधन हो गया। वे 90 वर्ष के थे और लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे। उनके निधन से साहित्य, पत्रकारिता, समाजसेवा एवं सांस्कृतिक जगत में शोक की लहर व्याप्त है।
पं. कैलाश चन्द्र पंत अपने सुदर्शन व्यक्तित्व, गरिमामय व्यवहार एवं आत्मीय स्वभाव के कारण सभी वर्गों में समान रूप से सम्मानित थे। उनके निधन पर साहित्य, राजनीति, पत्रकारिता एवं सामाजिक क्षेत्र से जुड़े अनेक लोगों ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति तथा शोकाकुल परिवार को इस दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की है।
उल्लेखनीय है कि इसी वर्ष मार्च में उन्हें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु द्वारा वर्ष 2025 के पद्मश्री सम्मान से अलंकृत किया गया था।
जीवन परिचय
पं. कैलाश चन्द्र पंत का जन्म 26 अप्रैल 1936 को मध्यप्रदेश के महू नगर में हुआ था। उनके पिता स्व. लीलाधर पंत तथा माता स्व. श्रीमती हरिप्रिया पंत थीं। उन्होंने साहित्याचार्य, साहित्य रत्न तथा हिन्दी में स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त की। बचपन से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक के रूप में उनके मन में राष्ट्रभक्ति के संस्कार विकसित हुए। आर्य समाज एवं संतों के सान्निध्य से उन्हें समाजसेवा की प्रेरणा मिली।
उन्होंने महू में स्वाध्याय विद्यापीठ की स्थापना की तथा राष्ट्रभाषा प्रचार समिति से सक्रिय रूप से जुड़े। क्रिश्चियन कॉलेज, इन्दौर के मेधावी छात्र के रूप में साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं वाद-विवाद प्रतियोगिताओं में उन्होंने अनेक पुरस्कार प्राप्त किए। विद्यार्थी जीवन से ही स्वावलंबन, अनुशासन एवं परिश्रम उनके व्यक्तित्व की पहचान रहे।
शिक्षा पूर्ण करने के बाद उन्होंने न्यायालय में सेवा की तथा इन्दौर के परसराम पुरिया हाई स्कूल में अध्यापन किया। इसके पश्चात पत्रकारिता को अपनी आजीविका बनाया। वे सोशलिस्ट कांग्रेस मेन, दिल्ली, नवभारत भोपाल, नवप्रभात भोपाल में सह-संपादक रहे तथा मासिक शिक्षा प्रदीप के संपादक एवं इन्दौर समाचार के संवाददाता रहे।
वर्ष 1977 में उन्होंने साप्ताहिक जनधर्म का प्रकाशन प्रारंभ किया, जिसका 1998 तक संपादन एवं प्रकाशन किया। इस दौरान आद्य शंकराचार्य स्मृति अंक, मंत्र-यंत्र-तंत्र विशेषांक, मालव विशेषांक एवं छत्तीसगढ़ विशेषांक जैसे महत्वपूर्ण विशेषांक प्रकाशित किए।
जनधर्म के माध्यम से उन्होंने “सारस्वत सम्मान” की स्थापना की, जिसके अंतर्गत भवानी प्रसाद मिश्र, नरेश मेहता, शिवमंगल सिंह ‘सुमन’ सहित अनेक प्रतिष्ठित साहित्यकारों को सम्मानित किया गया। वे हिन्दी साहित्य समिति, इन्दौर के उपसभापति तथा शहीद गणेश शंकर विद्यार्थी मेमोरियल पत्रकारिता ट्रस्ट, भोपाल के सचिव भी रहे।
वर्ष 1988 में बैजनाथ प्रसाद दुबे के निधन के पश्चात उन्हें सर्वसम्मति से राष्ट्रभाषा प्रचार समिति का मंत्री (संचालक) चुना गया। उनके नेतृत्व में हिन्दी भवन साहित्यिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बना। उन्होंने पं. मोतीलाल नेहरू पुस्तकालय, नरेश मेहता गोष्ठी कक्ष, महादेवी वर्मा कक्ष, वीरेन्द्र तिवारी कक्ष तथा साहित्यकार निवास की स्थापना एवं विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी पहल पर साहित्यिक पत्रिका ‘अक्षरा’ का प्रकाशन प्रारंभ हुआ तथा हिन्दी भवन के विकास हेतु स्थायी आय के साधन भी विकसित किए गए।
वे बाल निकेतन एवं पं. उद्धवदास मेहता न्यास सहित अनेक सामाजिक संस्थाओं से जुड़े रहे। वे ब्रह्मलीन जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के दीक्षित शिष्य थे। उनके सहयोग से भोपाल के नार्थ टी.टी. नगर स्थित झरनेश्वर मंदिर के निर्माण एवं विकास का कार्य सम्पन्न हुआ।
भोपाल गैस त्रासदी के बाद वर्ष 1986 में उन्होंने दिवंगत आत्माओं की शांति एवं पर्यावरण शुद्धि के लिए दशहरा मैदान में विराट अतिरुद्र महायज्ञ का आयोजन कराया। वर्ष 1994 में आयोजित साध्वी इंदिरा बेटी जी की भागवत कथा के सफल आयोजन में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
उनकी प्रमुख कृतियों में कौन किसका आदमी, धुंध के आर-पार, शब्द का विचार पक्ष, शैलेष मटियानी : सृजन यात्रा, संस्कार, संस्कृति और समाज तथा संकल्प की प्रतीक्षा में शामिल हैं। वे अनेक प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं के नियमित स्तंभकार भी रहे।
पं. कैलाश चन्द्र पंत ने *फिलीपींस, नेपाल, इज़राइल, इंडोनेशिया, ट्रिनिडाड एवं टोबैगो, लंदन, ह्यूस्टन, सूरीनाम तथा जोहान्सबर्ग सहित अनेक देशों की साहित्यिक एवं सांस्कृतिक यात्राएँ कीं।
विश्व हिन्दी सम्मान, नेहरू लिटरेसी अवार्ड, साहित्य भूषण सम्मान, लाल बलदेव सिंह पत्रकारिता सम्मान, परम विशिष्ट हिन्दी सेवी सम्मान, निराला साहित्य सम्मान, विष्णु प्रभाकर स्मृति सम्मान, कांतिलाल जोशी हिन्दी सेवी सम्मान, शंकराचार्य पत्रकारिता पुरस्कार, मध्यप्रदेश शासन का गणेश शंकर विद्यार्थी राष्ट्रीय पत्रकारिता पुरस्कार, पं. ब्रजलाल द्विवेदी साहित्यिक पत्रकारिता सम्मान, कर्मवीर सम्मान, केंद्रीय हिन्दी संस्थान का सुब्रह्मण्य भारती सम्मान तथा मध्यप्रदेश शासन संस्कृति विभाग का राष्ट्रीय शरद जोशी सम्मान सहित अनेक प्रतिष्ठित अलंकरण प्राप्त हुए।
पं. कैलाश चन्द्र पंत का निधन हिन्दी साहित्य, पत्रकारिता और समाजसेवा के क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति है। उनके योगदान को सदैव श्रद्धापूर्वक स्मरण किया जाएगा।
