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भोपाल:पर्यावरण को नष्ट करने का अर्थ है अपने आप को नष्ट करना, मानव ही नहीं प्राणिमात्र को नष्ट करना, ईश्वर की बनाई सृष्टि को समाप्त करना:गोकुल सोनी

भोपाल/मध्यप्रदेश (मनोज कुमार प्रसाद)16 जून।पटेल प्रभा समिति के साहित्यिक सांस्कृतिक तत्वावधान में हैप्पी कृष्ण पब्लिक स्कूल संत आसाराम नगर कृष्णा मार्केट में पर्यावरण विषय पर एक व्याख्यान माला एवं गोष्ठी का आयोजन किया गया।
जिसमें अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार गोकुल सोनी ने अपने विचार रखें-
“भारतीय संस्कृति में प्रकृति केवल भौतिक संसाधन नहीं, अपितु चेतना का विस्तार मानी गई है। यहाँ नदियाँ माता हैं, पर्वत देवता हैं और वृक्ष जीवन के सहचर, पेड़ पौधे हमें औषधियां देते हैं एवं पर्यावरण का आध्यात्म का गहरा संबंध है।”
मुख्य अतिथि हिंदी लेखिका संघ की वर्तमान अध्यक्ष डॉक्टर गंगराड़े ने पर्यावरण पर अपने वक्तव्य में कहा कि शरीर और प्रकृति को देखे तो नदिया हमारी नस है पहाड़ हमारी अस्थियां हैऔर पेड़ हमारे फेफड़े है।नदी को गंदा करेंगे तो खून गंदा होगा पेड़ को काटेंगे तो सांस कैसे लेंगे।अतः पेड़ लगाए और उनकी सुरक्षा भी करे।
विशिष्ट अतिथि पद्मश्री नारायण व्यास जी ने अपने विचार रखते हुये बताया कि व्यास जी ने कहा कि
पुरातत्व व पर्यावरण का बहुत पुराना संबंध है, पुराने सिक्कों में वृक्ष व नदियों के चित्र उकेरे हुये हैं।संरक्षण नही होने से कुछ जीव व पौधे विलुप्त हो गये है ,जो जानकारी के आभाव में संरक्षित नही हो पाये हैं।
जातक व बोध कथाओं में पर्यावरण संरक्षण का संदेश है।
सरस्वत अतिथि अखिल भारतीय साहित्य परिषद की महामंत्री सुनीता यादव ने पर्यावरण पर अपने विचार रखते हुए बताया कि पर्यावरण परि + आवरण से बना हुआ है जो यह बताता है कि मनुष्य व जीव जंतुओं के आसपास का वातावरण उसके जीवन को कितना प्रभावित करता है। भूमि, नदी ,पेड़ आदि चीजों का अपने जीवन में विशिष्ट महत्व है *बिना प्राणवायु के हम एक सांस भी नहीं ले सकते क्योंकि पेड़ जब सांस छोड़ते हैं तो मनुष्य तक सांस आती है इसलिए पेड़ों का जीवन में सर्वाधिक महत्व है।
मनोहर पाटिल ने अपने वक्तव्य में कहा कि
*पंचतत्व के संतुलन से ही जीवन रहेगा, इसमें असंतुलन होने से ही विकृत स्थितियाँ बन रही हैं।*
अतः हमें जीवन शैली को प्रकृति संरक्षण करके सुधारना होगा।
स्वागत वक्तव्य श्रीराम माहेश्वरी जी ने प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम का सफल संचालन वरिष्ठ गीतकार पुरुषोत्तम तिवारी साहित्यार्थी ने किया सरस्वती वंदना डाॅ प्रतिभा द्विवेदी ने की एवं आभार होशियार सिंह पटेल ने किया। कार्यक्रम में डाॅ प्रतिभा द्विवेदी, सरोज दवे, सत्या राठौर, मनोहर पाटिल,नीतू सिंह,भंवरलाल श्रीवास, प्रेमचंद गुप्ता व कार्यक्रम में ने पर्यावरण संबंधित रचना का पाठ भी किया।

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