
आरा/भोजपुर( डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा) 14 जून। पुण्यतिथि पखवाड़ा के तहत आज स्थानीय बस पड़ाव परिसर स्थित भिखारी ठाकुर सांस्कृतिक मंच पर स्थापित राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त मृदंगवादक शत्रुंजय प्रसाद सिंह की पुण्यतिथि एक परिचर्चा के रूप में मनायी गयी।जिसका नेतृत्व कवि नंद किशोर सिंह “कमल”ने तथा मंच संचालन शोध संस्थान के संस्थापक अध्यक्ष नरेंद्र सिंह पत्रकार ने किया।
भिखारी ठाकुर सामाजिक शोध संस्थान के बैनर तले आयोजित परिचर्चा “बाबू ललन जी और उनका व्यक्तित्व व कृतित्व”पर बोलते हुए डॉ किरण कुमारी, अधिवक्ता अशोक कुमार सिंह,कर्मचारी नेता गोप गुट सुमन कुमार,शिक्षक मुन्ना राय,उत्तम सिंह “शशि”,डॉ कुमार शिलभद्र,व्यास कमलेश आंनद,दीपक सिंह, वरिष्ठ रंगकर्मी डॉ अनिल कुमार सिंह आदि ने बाबू ललन जी को संगीत के संत की उपाधि देते हुए कहा कि जमींदार परिवार के होने के बावजूद भी उनका जीवन संगीत कला के प्रति समर्पित रहा।उन्होंने आरा के जमीरा कोठी में शास्त्रीय संगीत को लेकर ऐसे ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए की आरा को मिनी बनारस कला के क्षेत्र में कहा जाने लगा।देश का ऐसा कोई घराना बचा नहीं रहा जो जमीरा कोठी में नहीं आया हो।बाबू ललन जी के एक बुलावे पर देश के चर्चित गायक यहां पर आने को आतुर हो उठते थे।शास्त्रीय गान की हस्तियां यहां आना अपना सौभाग्य मानती थी।
वक्ताओं ने कहा कि इस परिवार(बाबू ललन जी) ने संगीत के साथ साथ समाज को शिक्षा के क्षेत्र में भी योगदान दिया जिसका प्रत्यक्ष उदाहरण है हित नारायण क्षत्रिय स्कूल, शत्रुंजय प्रसाद सिंह संगीत महाविद्यालय आदि।मृदंगवादुकी में तो इनका जोड़ ही नहीं था।
परिचर्चा कार्यक्रम शुरू होने के पूर्व बाबू ललन जी के साथ साथ उस्ताद बिस्मिल्लाह खां और भिखारी ठाकुर की प्रतिमा पर अतिथियों ने माल्यार्पण किया।
अंत में अग्निवीर दानिश आलम की हेलीकॉप्टर दुर्घटना में हुई मृत्यु पर दो मिनट का मौन धारण कर श्रद्धांजलि दी गई। उपस्थित लोगो में मो सगीर आलम, संजय कुमार सिंह, रंगकर्मी धर्मशिला देवी, जितेंद्र पासवान,बिनोद कुमार सिंह,प्राकृतिक चिकित्सा नंद किशोर राम, वरिष्ठ रंगकर्मी मो सरफराज,अंबुज आकाश,पत्रकार अश्विनी कुमार पिंटू,पप्पू सिंह पियनिया,विजय कुमार सिंह,रंगकर्मी संजय कुमार सिंह आदि प्रमुख थे।
