“भारत को ऐसे पत्रकारों की आवश्यकता है जो बौद्धिक रूप से ईमानदार, सामाजिक रूप से संवेदनशील, तकनीकी रूप से सक्षम और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति गहराई से प्रतिबद्ध हों”: उप राष्ट्रपति

“मीडिया में न केवल दृष्टिकोण गढ़ने की शक्ति है, बल्कि राष्ट्र भी आकार देने की क्षमता है”: उप राष्ट्रपति
RKTV NEWS/नई दिल्ली 11 जून।उप राष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज उपराष्ट्रपति भवन में संसद टीवी द्वारा इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन (IIMC) के अंतिम वर्ष के स्नातकोत्तर विद्यार्थियों के लिए आयोजित एक माह के इंटर्नशिप कार्यक्रम के समापन समारोह को संबोधित किया।
इस पहल पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने स्मरण कराया कि इस वर्ष के प्रारंभी अपने IIMC दीक्षांत समारोह के दौरान उन्होंने संसद टीवी के माध्यम से छात्रों को व्यावहारिक प्रशिक्षण के अवसर देने का सुझाव दिया था। उन्होंने प्रस्ताव के शीघ्र क्रियान्वयन की प्रशंसा की और इंटर्न्स को मार्गदर्शन देने वाले संसद टीवी के पेशेवरों की सराहना की।
लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि भारत को ऐसे पत्रकारों और संचारकों की आवश्यकता है जो बौद्धिक रूप से ईमानदार, सामाजिक रूप से संवेदनशील, तकनीकी रूप से सक्षम और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति गहन रूप से प्रतिबद्ध हों। उन्होंने जोर देकर कहा कि मीडिया में न केवल दृष्टिकोण बनते हैं, बल्कि राष्ट्र भी आकार लेते हैं।
विद्यार्थियों से 2047 तक विकासशील भारत (विकसित भारत) के विजन में योगदान देने का आग्रह करते हुए उप राष्ट्रपति ने उन्हें ईमानदारी और निष्पक्षता के साथ भारत की विकास यात्रा प्रस्तुत करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि वैश्विक समुदाय आज जनसांख्यिकीय लाभ, तकनीकी नवाचार और लोकतांत्रिक लचीलापन के कारण भारत के प्रति नवीनीकृत रुचि रखता है।
ध्यानाकर्षण-मूलक मीडिया वातावरण में सनसनीखेजता के जोखिम के प्रति सतर्क करते हुए श्री राधाकृष्णन ने कहा कि विश्वसनीयता को लोकप्रियता पर नहीं, बल्कि तथ्यात्मक सटीकता और लोकहित पर आधारित होना चाहिए। उन्होंने उभरते पत्रकारों से सत्य, निष्पक्षता और जिम्मेदार रिपोर्टिंग बनाए रखने का आग्रह किया।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते प्रभाव का संदर्भ देते हुए उप राष्ट्रपति ने कहा कि जबकि प्रौद्योगिकी शोध और सत्यापन के लिए एक शक्तिशाली उपकरण हो सकती है, संपादकीय निर्णय मानव तर्क द्वारा निर्देशित होने चाहिए। उन्होंने गलत सूचना और डीपफेक्स के प्रति सतर्क रहने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
समावेशी पत्रकारिता पर बल देते हुए उप राष्ट्रपति ने कहा कि भारत की समग्र समझ के लिए केवल महानगरीय केंद्रों से परे रिपोर्टिंग आवश्यक है और देशभर के लोगों की आकांक्षाओं, चुनौतियों और उपलब्धियों पर अधिक ध्यान दिया जाना चाहिए।
समारोह में उपस्थित लोगों में राज्यसभा के उप सभापति हरिवंश; राज्यसभा के सचिव–सामान्य पी. सी. मोदी; उप राष्ट्रपति के सचिव और संसद टीवी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमित खरे; सूचना और प्रसारण मंत्रालय के सचिव चंचल कुमार; इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन (IIMC) की कुलपति डॉ. प्रज्ञा पालीवाल गोर और अन्य गणमान्य अतिथिगण शामिल थे।

