12 दिनों में बिक्री का आंकड़ा हुआ 15 करोड़ पार।

ओल के रसगुल्ले चासनी में लगा रहे गोते।

देशी व्यंजनों के चटखारे ले रही युवा पीढ़ी।

अग्नि सुरक्षा के प्रति किया जा रहा जागरूक।

छात्रा समृद्धि की नीले नीले अम्बर पर चांद जब आये… की सांस्कृतिक प्रस्तुति ने बांधा समां।
RKTV NEWS/पटना(बिहार )24 दिसंबर।नीरा से बने तिलकुट और लड्डू , ओल का रसगुल्ला, केला की जलेबी, मक्के की रोटी के साथ चना की साग का स्वाद बिहार सरस मेला में ही मिलेगा । लिहाजा आगंतुक इन मिठाइयों और देश प्रदेश की मशहूर व्यंजनों का जमकर लुत्फ उठा रहे हैं।
पिज्जा, चाउमीन और मोमोज के इस दौर में देशी व्यंजनों का क्रेज युवाओं में जमकर रहा है। बिहार समेत देश के 25 राज्यों के मशहूर व्यंजन का आगंतुक खूब स्वाद ले रहे हैं और हस्तशिल्प की खरीददारी कर रहे हैं। ।
ग्रामीण विकास विभाग के तत्वाधान में जीविका द्वारा सरस मेला 12 दिसंबर से गाँधी मैदान, पटना में आयोजित है l
आधुनिकता के इस दौर में युवाओं के बीच ग्रामीण शिल्प एवं हस्तकला का क्रेज बिहार सरस मेला में देखने को मिल रहा हैं l आज के युवा वर्ग के लिए अपने घर , दुकान और संस्थान के साज-सज्जा हेतु लिए ग्रामीण उद्धमियों द्वारा निर्मित उत्पाद उनकी पहली पसंद बन गया हैं l सभी को सरस मेला का इंतजार रहता हैं लिहाजा सरस मेला के प्रति हर उम्र और हर वर्ग का आकर्षण देखते ही बन रहा है।
और यही वजह है कि मेला में खरीद-बिक्री का आंकड़ा उतरोत्तर वृद्धि कर रहा है l 12 दिनों में खरीद-बिक्री का आंकड़ा 15 करोड़ रुपया से आगे बढ़ गया है । मेला के 12 वें दिन मंगलवार 23 दिसंबर को डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक उत्पादों एवं व्यंजनों की खरीद-बिक्री हुई l
बिहार सरस मेला कई मायने में खास है l एक तरफ ग्रामीण शिल्प, हुनर एवं उत्पाद और व्यंजन को प्रोत्साहन एवं बाज़ार तो दे ही रहा है सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनायें भी फलिफुत होती हुई दिख रही हैं l
बिहार सरकार द्वारा जीविका द्वारा संचालित “सतत जीविकोपार्जन योजना” से लाभान्वित परिवारों की जिन्दगी में आये बदलाव की बानगी सरस मेला के स्टॉल पर प्रदर्शित हो रही है l सारण जिला के मांझी गाँव से आई सीता देवी के पति की मृत्यु शराब सेवन से हो गई थी l पति की मौत के बाद वो असहाय हो गई थी l लेकिन सतत जीविकोपार्जन योजना ने उन्हें स्वावलंबन की राह दिखाई है l उन्हें बजरंग बलि स्वयं सहायता समूह से जोड़कर उनके हुनर को बाज़ार से जोड़ा गया l सीता देवी ने सिक्की पोल की चूड़िया, बाली, टोकरी आदि का निर्माण कर उन्हें बेच रही हैं l सरस मेला में वो पहिली बार आई हैं l 12 दिनों में सीता देवी ने सतत जीविकोपार्जन योजना के स्टॉल 50 हजार रुपये से ज्यादा की सिक्की कला के अंतर्गत खुद द्वारा गढ़ी गई उत्पाद एवं कलाकृतियां बेच चुकी हैं l सीता बताती हैं कि जीविका से जुड़कर उनके जीवन में बदलाव आया है l पति की मौत का गम तो है लेकिन स्वावलंबन और सशक्तिकरण की राह ने उनके जीवन को बदल दिया है l सतत जीविकोपार्जन योजना और अब मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना ने उनके जीवन में खुशहाली लाई है। सीता देवी की तरह सैकड़ों ग्रामीण महिलाएं अपने जीवन में आये बदलाव को लेकर एक कुशल उद्यमी के तौर पर सरस मेला में उपस्थित है ,जहाँ महिला सशक्तिकरण की झलक देखते ही बन रही है l
कल तक घर की चाहरदीवारी में कैद गाँव की महिलायें अब बाहर निकल कर अपने हुनर से बनाये गए उत्पादों द्वारा अपनी प्रतिभा और क्षमता से लोगों को न सिर्फ चकित कर रही हैं बल्कि महिला सशक्तिकरण की दिशा में नित नया आयाम स्थापित कर रही है l
सेमिनार हॉल मे ग्रामीण विकास मंत्रालय , भारत सरकार के ग्रांट थ्रोटन द्वारा एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया l
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में सरस मेला में आई महिला उद्यमियों को उनके द्वारा उत्पादित उत्पादों का उत्पादन एवं गुणवत्ता बढ़ाने, बिक्री और ब्रांडिंग के गुर सीखाये गए l 50 से अधिक ग्रामीण महिला उद्यमियों को दिल्ली से आये सुमित सूद एवं सिमरन धवन ने प्रशिक्षण दिया l सेमिनार कक्ष में आयोजित कार्यक्रम का संयोजन फ़रहत प्रवीण कर रही हैं l
सांस्कृतिक कार्यक्रम के तहत मुख्य मंच पर आई.आई.बी.एम् के तत्वाधान में विद्या केंद्र के कलाकारों ने पर्यावरण संतुलन हेतु दर्शकों को जागरूक करने के उद्देश्य से नाटक “धरती की आखिरी पुकार” की प्रस्तुति की l
पांचवी वर्ग की छात्रा समृद्धि संस्कृति ने “नीले नीले अम्बर पर चाँद जब आये” गीत की प्रस्तुति कर दर्शकों की वाहवाही लुटी l तत्पश्चात अरुण और उनकी टीम ने लोक नृत्यों की प्रस्तुति की l राहुल सहनी समेत कई कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से शमा बाँधा l मुख्य मंच पर महिला उद्यमियों ने अपने उद्यमी बनने और सरस मेला के सफ़र के बारे में दर्शकों को बताया l सांस्कृतिक कार्यक्रम का संयोजन आशा कुमारी , परियोजना प्रबंधक , जीविका हैं उन्हें निगम कुमारी एवं फ़रहत प्रवीण सहयोग प्रदान कर रही हैं l मुख्य मंच पर मंच संचालन नाज़िश बानो, राज्य परियोजना प्रबंधक, जीविका ने किया l
बिहार सरस रसोई परिसर में ऍस.डी.आर.ऍफ़ द्वारा गैस सिलेंडर से लगी आग को लेकर मॉक ड्रील आयोजित की गई l इस कार्यक्रम के तहत फ़ूड ज़ोन में स्टॉल धारकों एवं आगंतुकों को गैस सिलेंडर से लगी आग से बचने और बुझाने का तरीका बताया गया।
मेला में ग्राहक सेवा केंद्र क्रेताओं और विक्रेताओं के सुविधा के लिए स्थापित किये गए हैं l इन स्टॉल पर क्रेता और विक्रेता रुपये की जमा -निकासी कर रहे है l सभी स्टॉल पर कैशलेश खरीदारी की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।
बिहार सरस मेला में बिहार समेत 24 अन्य राज्यों में आंध्र प्रदेश, गुजरात , आसाम, छत्तीसगढ़, गोवा, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, महाराष्ट्र, कर्णाटक, केरल, मध्य प्रदेश, मणिपुर, उड़ीसा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड, पंजाब, जम्मू-कश्मीर, दिल्ली, सिक्किम, और तमिलनाडु की स्वयं सहायता समूह की महिला उद्यमी एवं स्वरोजगारी अपने उत्पाद, कलाकृतियों एवं व्यंजन को लेकर उपस्थित हैं।
विभिन्न स्टॉल्स पर आचार-पापड़ , रोहतास का सोनाचुर चावल और भागलपुर के कतरनी चावल लोगो द्वारा बहुत पसंद किये जा रहे है l पापड़, मिठाई , मुरब्बे, रोहतास की गुड़ की मिठाई, खादी के परिधान, अगरबत्ती, लाह की चूड़ियां, सीप और मोती से बने श्रृगार की वस्तुएं , घर- बाहर के सजावट के सामान, खिलौने के अलावा मधुबनी पेंटिंग पर आधारित मनमोहक कलाकृतियाँ, कपड़े , कालीन, पावदान, आसाम और झारखण्ड से आई बांस और ताड़-खजूर के पत्ते से बनी कलाकृतियाँ गाँव की हुनर को प्रदर्शित करते हुए लोगों को मुग्ध कर रही हैं l सहारनपुर के लकड़ी के फर्नीचर, झूले और साज-सज्जा के उत्पादों की खूब बिक्री हो रही है l कृत्रिम फूल और बचपन के पारंपरिक खिलौनों की भी मांग है l

