
RKTV NEWS/गिरिडीह(झारखंड )12 मई। उपायुक्त रामनिवास यादव की अध्यक्षता में आज समाहरणालय स्थित कार्यालय प्रकोष्ठ में “Advisory for the Protection and Rehabilitation of Uneducated Children, Women and Differently-abled Individuals Engaged in Begging” के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिले में भीख मांगकर जीवनयापन करने वाले बच्चों, महिलाओं एवं दिव्यांगजनों के संरक्षण, पुनर्वास, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं सामाजिक मुख्यधारा से जोड़ने को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक के दौरान उपायुक्त ने कहा कि भीख मांगना केवल सामाजिक समस्या ही नहीं बल्कि मानव गरिमा से जुड़ा गंभीर विषय है। समाज के वंचित एवं जरूरतमंद लोगों को सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है। उन्होंने संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ अभियान चलाकर ऐसे व्यक्तियों की पहचान एवं पुनर्वास सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। मौके पर पुलिस अधीक्षक, डॉ बिमल कुमार, अपर समाहर्ता,बिजय सिंह बीरूआ, अनुमंडल पदाधिकारी खोरीमहुआ, अनिमेष रंजन, सिविल सर्जन, डॉ बच्चा प्रसाद सिंह, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी, अनिता कुजूर, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी, अंजना भारती, जिला शिक्षा पदाधिकारी, वसीम अहमद, जिला शिक्षा अधीक्षक, मुकुल राज, जिला नियोजन पदाधिकारी, इमरान फारूखी, अग्रणी बैंक प्रबंधक, अमृत चौधरी, सहायक निदेशक सामाजिक सुरक्षा, कौशिक अप्पू, बाल संरक्षण पदाधिकारी, जीतू कुमार, उम्मीद एनजीओ के अधिकारी समेत अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।
उपायुक्त ने रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, बाजार क्षेत्र, सभी प्रखंड एवं अंचल कार्यालयों के आसपास तथा अन्य सार्वजनिक स्थलों पर भीख मांगकर गुजर-बसर करने वाले व्यक्तियों की नियमित जांच एवं पहचान अभियान चलाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि अभियान के दौरान विशेष रूप से बच्चों, महिलाओं एवं दिव्यांगजनों की पहचान कर उन्हें आवश्यक सरकारी योजनाओं से जोड़ा जाए।
बैठक में सिविल सर्जन को निर्देशित किया गया कि चिन्हित व्यक्तियों का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण कराया जाए तथा जरूरतमंदों को आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए। इसके अतिरिक्त मानसिक स्वास्थ्य, नशा मुक्ति एवं अन्य आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं की भी व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया।
शिक्षा विभाग को निर्देश दिया गया कि भीख मांगते पाए जाने वाले बच्चों को चिन्हित कर उन्हें विद्यालयों से जोड़ने की कार्यवाही प्राथमिकता के आधार पर की जाए। साथ ही बच्चों को निःशुल्क एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के साथ-साथ उनके समुचित देखभाल एवं पुनर्वास की दिशा में ठोस पहल सुनिश्चित की जाए।
उपायुक्त ने सूचना एवं जनसंपर्क विभाग को व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने का निर्देश देते हुए कहा कि “भीख मांगना अपराध है”, “बच्चों से भीख मंगवाना दंडनीय अपराध है” तथा “जरूरतमंदों को पुनर्वास एवं सम्मानजनक जीवन प्रदान करना समाज की जिम्मेदारी है” जैसे संदेशों का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए। उन्होंने विभिन्न माध्यमों से जागरूकता कार्यक्रम, पोस्टर, बैनर एवं सोशल मीडिया अभियान चलाने के निर्देश भी दिए।
बैठक में “उम्मीद” एनजीओ को जिले में सर्वे एवं डाटा संग्रहण का कार्य तत्काल प्रारंभ करने तथा चिन्हित व्यक्तियों से संबंधित विस्तृत प्रतिवेदन यथाशीघ्र जिला प्रशासन को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया। जिसमें उनका नाम, आयु, लिंग, स्वास्थ्य स्थिति, पारिवारिक पृष्ठभूमि एवं वर्तमान परिस्थिति शामिल हो। साथ ही सभी सूचनाओं को निर्धारित पोर्टल एवं डैशबोर्ड पर अपलोड करने का निर्देश दिया गया, ताकि पुनर्वास योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके। उपायुक्त ने कहा कि प्राप्त डाटा के आधार पर पुनर्वास एवं कल्याणकारी योजनाओं को प्रभावी रूप से लागू किया जाएगा। उपायुक्त ने सभी संबंधित विभागों को संवेदनशीलता एवं गंभीरता के साथ कार्य करने का निर्देश देते हुए कहा कि प्रशासन का उद्देश्य किसी को दंडित करना नहीं, बल्कि उन्हें सम्मानजनक जीवन एवं बेहतर भविष्य उपलब्ध कराना है।
