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जयपुर:मुख्य सचिव की अध्यक्षता में ज्ञान भारत मिशन की बैठक।

ज्ञान भारतम ऐप से अपने पास रखी 75 वर्ष पुरानी पांडुलिपी को भी करवा सकते हैं रजिस्टर।

ज्ञान भारतम’ मिशन के तहत राजस्थान बना देश का अग्रणी राज्य।

भारतीय ज्ञान परंपरा की थाती अब तक 15 लाख से अधिक पांडुलिपियों का हुआ सर्वे।

RKTV NEWS/जयपुर(राजस्थान )28 अप्रेल। भारत की बौद्धिक और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए ‘ज्ञान भारतम’ मिशन के अंतर्गत राजस्थान ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। ज्ञान भारतम मिशन की बैठक मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में मंगलवार को शासन सचिवालय में आयोजित की गई। उन्होंने निर्देश दिए कि जिस व्यक्ति को लिपि की समझ हो उसे ही नोडल अधिकारी बनाया जाए। संस्कृत भाषा के लिए संस्कृत विभाग के विभागाध्यक्षों को नोडल अधिकारी बनाया जाए। पांडुलिपियों का सर्वेक्षण लक्ष्य – केंद्रित होकर किया जाए जिसमें प्रमुख पांडुलिपियां जिनका भारत के इतिहास में प्रभाव रहा हो उनका संकलन किया जाये।
बैठक में बताया गया कि प्रदेश में अब तक कुल 15 लाख 21 हजार 34 पांडुलिपियों का सत्यापन किया जा चुका है, जो पूरे भारत में सर्वाधिक है। ज्ञानभारतम मिशन का मुख्य लक्ष्य भारत की विशाल पांडुलिपि विरासत का सर्वेक्षण, संरक्षण, डिजिटलीकरण और प्रसार करना है।
राज्य में जयपुर जिला 4,91,688 पांडुलिपियों के साथ शीर्ष पर है, इसके बाद बीकानेर (3,39,740) और जोधपुर (1,90,847) का स्थान है। राजस्थान में ‘राजस्थान प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान, जोधपुर’ को नोडल विभाग और ‘राजस्थान संस्कृत अकादमी, जयपुर’ के निदेशक को राज्य नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। इस मिशन में विभिन्न क्लस्टर सेन्टर और स्वतंत्र केंद्रों द्वारा सहयोग किया जा रहा है।
इस मिशन के तहत जिला कलेक्टरों द्वारा नामित नोडल अधिकारी जिला स्तर पर सर्वेक्षण की निगरानी कर रहे हैं। सर्वेक्षण में सरकारी स्कूलों के शिक्षकों, पुस्तकालयाध्यक्षों और विश्वविद्यालयों के छात्रों ‘सर्वेक्षण प्रगणक’ के रूप में शामिल किया गया है। यह टीम घर-घर जाकर और विभिन्न संस्थाओं (मंदिरों, मठों, निजी पुस्तकालयों, शोध संस्थानों) में जाकर पांडुलिपियों की भौतिक पुष्टि, स्थिति का आकलन और मैपिंग कर रही है।
सर्वेक्षण के दौरान पांडुलिपि स्वामियों के अधिकारों का पूरा सम्मान किया जा रहा है। पूरी प्रक्रिया में सांस्कृतिक संवेदनशीलता सुनिश्चित की जा रही है। मिशन का उद्देश्य इन अमूल्य दस्तावेजों को आधुनिक तकनीक के माध्यम से डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराना है ताकि आने वाली पीढ़ियां अपनी सभ्यता एवं भारतीय ज्ञान परंपरा के ज्ञान से लाभान्वित हो सके।
बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव, युवा मामले एवं खेल विभाग प्रवीण गुप्ता, प्रमुख शासन सचिव आयुर्वेद एवं भारतीय चिकित्सा पद्धति विभाग सुबीर कुमार, शासन सचिव कला साहित्य एवं संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग शुची त्यागी, सूचना एवं जनसंपर्क आयुक्त राकेश शर्मा, शासन उप सचिव कला एवं संस्कृति अनुराधा गोगीया, राजस्थान प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान, जोधपुर गोमती शर्मा, निदेशक पुरातत्व विभाग पंकज धीरेन्द्र, सहायक नोडल अधिकारी डॉ. नितिन गोयल एवं वीसी के माध्यम से ज्ञान भारतम मिशन के सचिव इंद्रजीत सिंह एवं जिला कलेक्टर भी जुड़े।

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