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राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच के दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का दिल्ली में उद्घाटन।

डॉ इंद्रेश कुमार ने युवाओं को भारतीय संस्कृति और मातृभूमि के प्रति श्रद्धावान रहने की दी सलाह।

“भारतीय युवाओं के आदर्श कसाब नहीं, कलाम हैं” : डॉ इंद्रेश कुमार

नई दिल्ली/डॉ एम रहमतुल्लाह 27 मार्च।राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच (RSJM), विवेकानंद ग्लोबल यूनिवर्सिटी, जयपुर, दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर हिमालयन स्टडीज़ तथा जामिया मिल्लिया इस्लामिया के नेल्सन मंडेला सेंटर फॉर पीस एंड कॉन्फ्लिक्ट रेज़ोल्यूशन के संयुक्त तत्वावधान में “संस्कृति, जलवायु और इतिहास: विशाल भारत से सीख” विषय पर आयोजित दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन आज दिल्ली विश्वविद्यालय में हुआ। इस सम्मेलन में देश-विदेश के अनेक शिक्षाविदों, चिंतकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और शोधार्थियों ने भाग लिया।
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच के मुख्य संरक्षक तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य डॉ इंद्रेश कुमार ने युवाओं को भारतीय संस्कृति, सभ्यता और मातृभूमि के प्रति श्रद्धावान रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इस सत्र का उद्देश्य युवाओं के मन में “राष्ट्रवाद के बीज बोना” है। अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने बताया कि देश के विभिन्न वर्गों के युवाओं से संवाद के दौरान उन्होंने देखा है कि वे “हिंदुस्तानी पहचान” को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं और विदेशी शक्तियों द्वारा की जाने वाली वैचारिक हेरफेर के प्रति भी सजग हैं।
डॉ इंद्रेश कुमार ने युवाओं को स्वतंत्रता संग्राम के उन महान सेनानियों की याद दिलाई, जिन्होंने राष्ट्रवाद की भावना से प्रेरित होकर देश के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। उन्होंने कहा कि भारत की मूल पहचान प्रेम, भाईचारे और सहिष्णुता जैसे मूल्यों में निहित है, जो विश्व को शांति का संदेश देते हैं। उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच की सराहना करते हुए कहा कि यह मंच युवाओं को इन मूल्यों के साथ निर्भीक होकर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रहा है।
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि भारतीय युवाओं के आदर्श आतंकवाद के प्रतीक कसाब नहीं, बल्कि देश के महान वैज्ञानिक और पूर्व राष्ट्रपति डॉ ए.पी.जे. अब्दुल कलाम हैं, जिनके विचार और कार्य आज भी युवाओं को राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरित करते हैं।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक हर्षवर्धन त्रिपाठी ने भारतीय पारिवारिक व्यवस्था की विशेषताओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारतीय परिवार व्यवस्था सहानुभूति, सामाजिक संतुलन और स्थिरता (sustainability) जैसे मूल्यों को पोषित करती है। आज जब विश्व अनेक संकटों के दौर से गुजर रहा है, तब भारतीय जीवन-मूल्य पूरी दुनिया के लिए मार्गदर्शक बन सकते हैं।
इंडोनेशिया के प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता और पद्मश्री सम्मानित अगस इंद्र उद्याना ने ‘विशाल भारत’ की सांस्कृतिक अवधारणा में इंडोनेशिया के स्थान को रेखांकित करते हुए प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने इंडोनेशिया के ऐतिहासिक प्रम्बानन मंदिर के संरक्षण और पुनरुद्धार में भारत के सहयोग की सराहना भी की।
अहिंसा विश्व भारती के संस्थापक आचार्य लोकेश मुनि ने कहा कि एक सशक्त और समृद्ध राष्ट्र के निर्माण के लिए युवाओं का मानसिक और भावनात्मक रूप से स्वस्थ होना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने सुझाव दिया कि विद्यालयों की प्रारंभिक शिक्षा में नैतिक शिक्षा और मूल्य आधारित शिक्षण को विशेष महत्व दिया जाना चाहिए, जिससे आने वाली पीढ़ी में मानवीय संवेदनाएं और सामाजिक जिम्मेदारी विकसित हो सके।
फोरम फॉर अवेयरनेस ऑफ नेशनल सिक्योरिटी (FANS) के कार्यकारी अध्यक्ष जसबीर सिंह ने भारत की उस ऐतिहासिक परंपरा का उल्लेख किया, जिसमें यह देश विश्व का प्रमुख ज्ञान-केंद्र रहा है। उन्होंने कहा कि FANS द्वारा आयोजित संवाद और कार्यक्रम इसी गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाने का प्रयास हैं।
दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर हिमालयन स्टडीज़ के निदेशक प्रो. बी.डब्ल्यू. पांडे ने अपने विचार रखते हुए कहा कि ‘विकसित भारत’ के बिना ‘विशाल भारत’ की कल्पना अधूरी है। उन्होंने अपनी अंतरराष्ट्रीय यात्राओं के अनुभवों का उल्लेख करते हुए कहा कि दुनिया भारत के निरंतर विकास और उसकी संभावनाओं को गंभीरता से देख रही है।
वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक उदय माहुरकर ने भारत के राष्ट्रीय पुनर्जागरण की चर्चा करते हुए वीर सावरकर के योगदान और उनके संघर्षों पर प्रकाश डाला। उन्होंने समाज में बढ़ते विकृत अपराधों के पीछे अश्लील और पोर्नोग्राफिक कंटेंट को एक प्रमुख कारण बताया और इसके समाधान के लिए सामाजिक जागरूकता तथा नीतिगत कदमों की आवश्यकता पर बल दिया।
FANS के राष्ट्रीय महासचिव विक्रमादित्य सिंह ने भारतीय संस्कृति में ‘संवाद’ की परंपरा को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा केवल सैन्य शक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज की सामूहिक चेतना और सहभागिता से भी मजबूत होती है। उन्होंने कहा कि इसी कारण भारत आज “अराजकता के समुद्र में शांति का एक द्वीप” बना हुआ है।
उद्घाटन सत्र का समापन डॉ शकील हुसैन की पुस्तक “विशाल भारत: सांस्कृतिक और सभ्यतागत चेतना” के लोकार्पण के साथ हुआ।
इस अवसर पर गोलोक बिहारी राय, प्रो. विजय कुमार (गलगोटिया विश्वविद्यालय), प्रो. अनिल सौमित्र, डॉ राजीव प्रताप सिंह, डॉ साइश्ता समी, डॉ वर्णिका शर्मा, प्रो. गीता सिंह सहित देश-विदेश से आए अनेक शिक्षाविद, शोधार्थी और बुद्धिजीवी उपस्थित रहे।
उद्घाटन सत्र के बाद आयोजित दो तकनीकी सत्रों में “संस्कृति, जलवायु और इतिहास: विशाल भारत से सीख” विषय पर विभिन्न विद्वानों ने अपने शोध-पत्र प्रस्तुत किए और इस विषय के सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और समकालीन आयामों पर विस्तृत चर्चा की।

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