PFMS-IFMS को अधिक प्रभावी और उपयोगकर्ता-केंद्रित बनाने पर चर्चा।

एआई तकनीक से प्रदेश के वित्तीय प्रबंधन को मिलेगा नया आयाम: मुख्य सचिव
RKTV NEWS/जयपुर(राजस्थान )12 मई। राज्य सरकार के वित्तीय प्रबंधन तंत्र को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और तकनीक-सक्षम बनाने की दिशा में मंगलवार को शासन सचिवालय में मुख्य सचिव वी.श्रीनिवास की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में केंद्र सरकार के वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग की महालेखा नियंत्रक टीसीए कल्याणी ने PFMS-IFMS सहित विभिन्न वित्तीय प्रबंधन विषयों पर विस्तृत चर्चा की।
मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश में पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम (PFMS) को और अधिक मजबूत एवं व्यवस्थित बनाने के लिए समय-समय पर क्षमता निर्माण कार्यशालाएं आयोजित की जाए। इन कार्यशालाओं के माध्यम से अधिकारियों एवं कर्मचारियों को समुचित प्रशिक्षण प्रदान कर वित्तीय प्रबंधन प्रणाली को अधिक सुचारु बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में केन्द्र सरकार के सहयोग से जिला कोषाधिकारियों के लिए भी कार्यशालाएं आयोजित कर प्रशिक्षित किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में SNA SPARSH (समयोजित प्रणाली एकीकरण शीघ्र हस्तान्तरण) केअंतर्गत वर्तमान में 70 केंद्रीय प्रायोजित योजनाएं (CSS Schemes) तथा 160 राज्य स्तरीय योजनाएं शामिल की जा चुकी हैं। वित्तीय निगरानी एवं योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को और आधुनिक बनाने के लिए राज्य में एआई आधारित डैशबोर्ड विकसित किया जाएगा, जिससे रियल-टाइम मॉनिटरिंग और बेहतर निर्णय प्रक्रिया संभव हो सकेगी।
मुख्यसचिव ने कहा कि राजस्थान में उच्च शिक्षा के विकास के लिए उत्कृष्ट शैक्षणिक एवं प्रशासनिक वातावरण है। यहां प्रत्येक क्षेत्र में शिक्षण प्रशिक्षण के लिए उच्च स्तर के शैक्षणिक संस्थान संचालित हैं। उन्होंने कहा कि जयपुर में नई आईसीएएस (इंडियन सिविल अकाउण्ट्स सर्विस) एकेडमी स्थापित करने के लिए उपयुक्त भूमि का चयन किया जाएगा।
महालेखानियंत्रक टीसीए कल्याणी ने कहा कि एआई आधारित डैशबोर्ड राज्य सरकार की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार किया जाएगा। इसके लिए नॉलेज पार्टनर की सहायता लीजाएगी तथा राज्य सरकार से उन प्रमुख क्षेत्रों की जानकारी प्राप्त की जाएगी,जिनकी प्रभावी निगरानी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम (PFMS) केवल एक आईटीप्लेटफॉर्म नहीं, बल्कि यह देश की महत्वपूर्ण वित्तीय अवसंरचना के रूप में कार्य कर रहा है। यह केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय लेन-देन, डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) योजनाओं, वेतन, पेंशनतथा सब्सिडी वितरण जैसी व्यवस्थाओं को पारदर्शी और जवाबदेह तरीके से संचालित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में देश की जीडीपी का एक बड़ा हिस्सा PFMS प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रवाहित होता है। पिछले वित्तीय वर्ष में इस प्रणाली के जरिए 327 करोड़ से अधिक ट्रांजैक्शन किए गए। इसके साथ 1100 से अधिक DBT योजनाएं तथा 35 लाख से अधिक इंप्लीमेंटिंग एजेंसियां जुड़ी हुई हैं।
श्रीमती कल्याणी ने बताया कि आने वाले दशक की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए PFMS को अधिक आधुनिक, सरल, लचीलाऔर उपयोगकर्ता-केंद्रित बनाया जाना आवश्यक है। इसके तहत आसान यूजर इंटरफेस,मोबाइलएक्सेस, सरल वर्कफ्लो और बहुभाषीय सुविधाओं के विकास के साथ एआई आधारित तकनीकका उपयोग किया जाएगा, ताकि उपयोगकर्ता को सिस्टम संचालन के लिएअत्यधिक तकनीकी ज्ञान या जटिल प्रक्रियाओं पर निर्भर न रहना पड़े।
बैठक में प्रमुख शासन सचिव वित्त वैभव गालरिया एवं केंद्र सरकार के वित्त विभाग के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

