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सवर्ण समाज को शोषित के रूप में चिन्हित करने का प्रयास अस्वीकार्य: डॉ अनूप श्रीवास्तव

कायस्थ समाज के साथ-साथ समस्त सवर्ण समाज के लोगों को 8 मार्च 2026 को दिल्ली के रामलीला मैदान में अपराह्न 12:00 बजे आयोजित होने वाले “यूजीसी रोल बैक महासम्मेलन” में भारी संख्या में पहुंचने की अपील।

RKTV NEWS/नई दिल्ली 24 फरवरी।अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अनूप कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि अखिल भारतीय कायस्थ महासभा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) बिल का पूर्ण एवं दृढ़ता से विरोध करती है। इन विनियमों के लागू होने पर सवर्ण समाज को व्यवस्थित रूप से शोषक के रूप में चिन्हित किया जाएगा, जिससे समाज में एक ऐसी खाई पैदा होगी जो कभी भर नहीं पाएगी।
ये बातें अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अनूप कुमार श्रीवास्तव ने निजी आवास पर आयोजित एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता में कहीं। उन्होंने आगे कहा कि यूजीसी के इन नए प्रावधानों में इक्विटी कमिटी में सवर्ण समाज (सामान्य वर्ग) की कोई हिस्सेदारी सुनिश्चित नहीं की गई है। इससे सवर्ण समाज को बिना किसी सुनवाई के दंडित करने और उनके शोषण का कानूनी मार्ग प्रशस्त होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि सवर्ण समाज ने भारत की आजादी से पहले, आजादी के दौरान और आजादी के बाद भी राष्ट्र निर्माण में अनगिनत त्याग और आहुतियां दी हैं।
उन्होंने कहा कि सवर्ण समाज को समाज के पिछड़े वर्गों के उत्थान के लिए सरकार द्वारा चलाए जा रहे किसी भी कार्यक्रम से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन वोट बैंक की राजनीति में अंधा होकर सरकार यदि सवर्ण समाज के शोषण का कानूनी रास्ता बना दे, तो सवर्ण समाज चुप नहीं बैठेगा।
डॉ. श्रीवास्तव ने याद दिलाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को मात्र दो सीटों वाली पार्टी से विश्व की सबसे बड़ी पार्टी बनाने में सवर्ण समाज—चाहे क्षत्रिय हों, ब्राह्मण हों, बनिया हों या कायस्थ—का अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान रहा है। सवर्ण समाज की सहजता और राष्ट्रप्रेम को उनकी कमजोरी समझने की भूल सरकार को कभी नहीं करनी चाहिए।
डॉ. अनूप कुमार श्रीवास्तव ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि यदि भाजपा अपनी इस भूल को सुधारते हुए इस विवादास्पद बिल को वापस (रोलबैक) ले लेती है, तो सवर्ण समाज इस गलती को भुला सकता है। अन्यथा, आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों तथा उसके बाद होने वाले सभी चुनावों में भाजपा को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है, क्योंकि अंततः जनता ही किसी भी राजनीतिक दल के भाग्य का निर्धारण करती है—और भाजपा इस सत्य को अच्छी तरह समझती है।
अंत में, डॉ. श्रीवास्तव ने कायस्थ समाज के साथ-साथ समस्त सवर्ण समाज के लोगों से अपील की है कि वे 8 मार्च 2026 को दिल्ली के रामलीला मैदान में अपराह्न 12:00 बजे आयोजित होने वाले “यूजीसी रोल बैक महा सम्मेलन” में भारी संख्या में पहुंचें और इस अन्यायपूर्ण विनियम के विरुद्ध अपनी एकजुट आवाज बुलंद करें।
इस प्रेस वार्ता का मुख्य उद्देश्य विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा जनवरी 2026 में अधिसूचित “प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशंस, 2026” (यूजीसी इक्विटी विनियम 2026) के प्रावधानों के विरुद्ध अपनी दृढ़ आपत्ति दर्ज करना था।
विदित हो की डॉ. अनूप कुमार श्रीवास्तव, जो पूर्व में भारत सरकार के प्रधान आयुक्त सहित कई महत्वपूर्ण पदों पर रहकर राष्ट्र सेवा कर चुके हैं।

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