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पटना:वेनेजुएला पर अमेरिकी साम्राज्यवादी युद्ध के खिलाफ पटना में प्रतिवाद।

अमेरिका की दादागिरी का विरोध करना हमारा फर्ज,मोदी सरकार इस घटना की निंदा करे।

वेनेजुएला की जनता के साथ एकजुटता व्यक्त करें।

RKTV NEWS/पटना (बिहार )05 जनवरी।वेनेजुएला पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में किए गए आपराधिक हमलावर युद्ध, राजधानी काराकस को निशाना बनाकर की गई क्रूर बमबारी, सैन्य हमले तथा अंतरराष्ट्रीय कानूनों का खुला उल्लंघन करते हुए राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को बंधक बनाकर देश से बाहर ले जाने की घटना के खिलाफ आज पटना में AIPF के बैनर तले जोरदार प्रतिवाद आयोजित किया गया.
विरोध सभा को संबोधित करने वाले वक्ता में खेग्राम्स के महासचिव धीरेंद्र झा, सामाजिक कार्यकर्ता गोपाल कृष्ण, एमएलसी शशि यादव, किसान नेता शंभू नाथ मेहता, कुमार परवेज, दिव्या गौतम, AISA नेता सबा आफरीन, पूर्व विधायक गोपाल रविदास सहित कई वक्ताओं ने संबोधित किया.
कार्यक्रम का संचालन AIPF के संयोजक कमलेश शर्मा ने किया.
मौके पर भाकपा–माले के वरिष्ठ नेता के. डी. यादव, किसान सभा के नेता उमेश सिंह, सामाजिक कार्यकर्ता पंकज श्वेताभ, सुनील कुमार, पटना नगर सचिव जितेंद्र कुमार, शहजादे आलम, डॉ. प्रकाश कुमार, आफ्शा जबीं, पुनीत पाठक, आशुतोष कुमार, प्रमोद यादव, मुर्तजा अली, अनय मेहता, राखी मेहता, संजय कुमार सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे.
वक्ताओं ने कहा कि यह युद्ध केवल वेनेजुएला के खिलाफ नहीं है, बल्कि दुनिया भर के उन सभी लोगों के खिलाफ एक खुली चेतावनी है जो साम्राज्यवादी हुक्मरानों से अलग अपना भविष्य स्वयं तय करना चाहते हैं.
उन्होंने कहा कि जिस तरह इराक पर हमले, तेल की लूट और वहां के लोगों की तबाही को सही ठहराने के लिए झूठे बहाने गढ़े गए थे, वही झूठ आज वेनेजुएला के लोकतांत्रिक रूप से चुने गए राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के खिलाफ दोहराए जा रहे हैं, ताकि वहां की चुनी हुई सरकार को हटाया जा सके.
दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार वाले देश वेनेजुएला की लूट को जायज़ ठहराने के लिए तथाकथित “नारको-आतंकवाद” का बहाना फिर से इस्तेमाल किया जा रहा है. ट्रंप शासन द्वारा थोपा गया यह युद्ध अमेरिकी बहुराष्ट्रीय निगमों के हितों की सेवा के लिए वेनेजुएला के तेल पर कब्ज़ा करने और एक कठपुतली सरकार स्थापित करने का प्रयास है.
यह हमला लैटिन अमेरिका और कैरिबियन क्षेत्र में अमेरिकी हस्तक्षेप के लंबे और खूनी इतिहास का नया अध्याय है—जिसमें चुनावों में हस्तक्षेप, लोकतांत्रिक सरकारों को गिराना, जन आंदोलनों का दमन, हिंसा और विनाश शामिल रहे हैं.
ग्वाटेमाला से चिली तक, ग्रेनाडा से पनामा तक, तथाकथित मोनरो सिद्धांत हमेशा से इस क्षेत्र के लोगों को उनकी संप्रभुता और आत्मनिर्णय के अधिकार से वंचित करने का औजार रहा है.
सभा में इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की गई कि भारत सरकार ने अब तक इस घटना की निंदा नहीं की है, जो अत्यंत शर्मनाक है. वक्ताओं ने मांग की कि भारत सरकार तत्काल इस अमेरिकी आक्रमण की निंदा करे और वेनेजुएला की संप्रभुता के समर्थन में स्पष्ट रुख अपनाए.
सभा से आह्वान किया गया कि दुनिया भर की सभी लोकतांत्रिक और शांतिप्रिय ताकतें इस साम्राज्यवादी आक्रमण और औपनिवेशिक अधीनता की नई व्यवस्था थोपने के प्रयासों के खिलाफ एकजुट होकर खड़ी हों.

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