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बागपत:एसआईआर फॉर्म भरकर जमा करे नागरिक, मजबूत लोकतंत्र की शुरुआत आपसे: जिलाधिकारी

आने वाली पीडियों के लिए बुजुर्गों का परिवर्तन लाएगा समाज में नए बदलाव।

सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ समाज की सहभागिता जरूरी, सभी की भूमिका अहम।

समाज की उन्नति के लिए नागरिकों से संवैधानिक मूल्यों को आत्मसात करने का आह्वान।

RKTV NEWS/बागपत(उत्तर प्रदेश)19 दिसंबर।सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत बड़ौत के बड़का रोड स्थित ख़िदमत सोसाइटी के सौजन्य से विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण अभियान एसआईआर एवं सामाजिक जागरूकता बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने समाज के प्रभावशाली वर्ग के लोगों, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों आदि से परिवर्तन के वाहक बनने न आह्वान किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी ने स्पष्ट कहा कि कानून तभी प्रभावी होता है, जब समाज उसके साथ खड़ा हो। समाज को स्वयं भी सामाजिक कुरीतियों को अस्वीकार करना होगा। उन्होंने भ्रूण हत्या, दहेज प्रथा, घरेलू हिंसा और ऑनर किलिंग जैसी कुरीतियों को समाज के विकास में सबसे बड़ी बाधा बताया।
जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने कहा कि आज भी समाज में ऐसी सोच मौजूद है, जो बेटियों को जन्म लेने से पहले ही समाप्त कर देती है। यह न केवल कानूनी अपराध है, बल्कि मानवीय मूल्यों पर सीधा प्रहार भी है। उन्होंने कहा कि एक ओर समाज नवरात्रि में कन्या पूजन करता है, वहीं दूसरी ओर बेटियों के अस्तित्व को स्वीकार नहीं करता—यह विरोधाभास आत्ममंथन की मांग करता है।
उन्होंने कहा हम कुछ ऐसा करें कि अगली पीढ़ी हम पर नाज करें आगे के जो एक विजन है एक रास्ता है उसके रूप में मैं बताना चाहती हूं कि आप बुजुर्ग है परिवर्तन की असली शक्ति जो है वह आप में है आप जो जैसा बताएंगे वैसा ही प्रभाव जो है समाज पर पड़ेगा वह समाज उसको लागू करेगा और सच्चा बदलाव तभी आएगा जब आप आवाज उठाएंगे दहेज प्रथा समाप्त हो ऑनर किलिंग को स्वीकार करें
उन्होंने कहा कि “बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ” सामाजिक व्यवहार में इसी बदलाव का संकल्प है। बेटी भी परिवार की कुलदीपक हो सकती है, यदि उसे समान अवसर, सम्मान और शिक्षा दी जाए। दहेज प्रथा पर कड़ा रुख अपनाते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि यह कोई परंपरा नहीं बल्कि समाज को भीतर से खोखला करने वाली कुरीति बन चुकी है। आज दहेज घरेलू हिंसा, आत्महत्या और हत्या जैसे अपराधों का कारण बन रहा है। चिंताजनक बात यह है कि पढ़े-लिखे और तथाकथित सभ्य परिवार भी इस कुप्रथा को बढ़ावा दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिस समाज में महिलाओं को देवी के रूप में पूजा जाता है, उसी समाज में यह कैसे स्वीकार की जा सकती है। दहेज मुक्त विवाह ही महिलाओं के सम्मान और सुरक्षित भविष्य की दिशा में पहला कदम है।
ऑनर किलिंग और जाति आधारित भेदभाव पर बोलते हुए डीएम ने कहा कि संविधान प्रत्येक नागरिक को समान अधिकार देता है। सामाजिक प्रतिष्ठा या जाति के नाम पर हिंसा किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने दो टूक कहा कि कानून को हाथ में लेने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रेम विवाह को अपराध की तरह देखना और हिंसा को मौन स्वीकृति देना समाज की आत्मा को कमजोर करता है। यदि समाज को आगे बढ़ना है, तो उसे संवैधानिक मूल्यों को सामाजिक मूल्यों में बदलना होगा।
जिलाधिकारी ने विशेष रूप से समाज के बुजुर्गों, खाप पंचायतों और सामाजिक संगठनों की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ग्रामीण और कस्बाई भारत में खाप पंचायतें और सामाजिक संगठन मार्गदर्शक स्तंभ की भूमिका निभाते हैं। यदि ये संस्थाएं सुधार के पक्ष में खड़ी होती हैं, तो परिवर्तन स्वतः जमीन तक पहुंचता है। उन्होंने कहा कि सामाजिक बदलाव के लिए समाज के प्रभावशाली वर्गों को आगे आना होगा और गलत परंपराओं का बहिष्कार करना होगा।
बैठक में जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने एसआईआर अभियान की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मतदाता सूची का शुद्धीकरण लोकतंत्र की मजबूती के लिए अत्यंत आवश्यक है। मृत, स्थानांतरित या अपात्र नामों का सूची में बने रहना लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर करता है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे नामांकन प्रपत्र भरें, आवश्यक सुधार कराएं और प्रशासन का सहयोग करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि एसआईआर का उद्देश्य किसी का नाम हटाना नहीं, बल्कि वास्तविक और पात्र मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा करना है।
एसआईआर को लेकर फैली भ्रांतियों पर डीएम ने कहा कि इस प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता और निष्पक्षता बरती जा रही है। किसी भी नागरिक के मताधिकार के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। जिन लोगों को किसी प्रकार की शंका या प्रश्न हैं, उनके समाधान के लिए प्रशासनिक टीमें मौके पर मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची जितनी सशक्त होगी, लोकतंत्र उतना ही मजबूत होगा। यह प्रक्रिया नागरिकों को लोकतंत्र में सहभागी बनाने के लिए है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता चौधरी सुभाष शर्मा (चौरासी देशखाप ब्राह्मण समाज) ने की। बैठक में देशखाप चौधरी संगठन, बड़ौत व्यापार मंडल, इंडस्ट्री एंड ट्रेड वेलफेयर एसोसिएशन, जस्टिस एंड राइट कमेटी, केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन, बड़ौत रेहड़ी संगठन सहित अनेक सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। ख़िदमत सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ. इरफान मलिक भी मौजूद रहे। बैठक के अंत में सामाजिक संगठनों ने दहेजमुक्त विवाह, बेटी के जन्म को उत्सव के रूप में मनाने, सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध निरंतर जागरूकता फैलाने तथा एसआईआर अभियान में सक्रिय सहयोग का संकल्प लिया।
जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने अपने संबोधन का समापन करते हुए कहा कि सशक्त समाज और सशक्त लोकतंत्र एक-दूसरे के पूरक हैं। यदि समाज जागरूक होगा, तो कानून प्रभावी होगा और लोकतंत्र मजबूत बनेगा। यही आने वाली पीढ़ियों के लिए सबसे बड़ी विरासत होगी।
इस अवसर पर एसडीएम बागपत अमरचंद वर्मा, डिप्टी कलेक्टर मनीष यादव ,जिला विकास अधिकारी राहुल वर्मा सहित खाप पंचायत के सम्मानित गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

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