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“कृत्रिम बुद्धिमता” अंत की शुरूआत।

RKTV NEWS/अजय गुप्ता अज्ञानी, 04 जून। दुनिया विकासवाद की चरमता की तरफ तेजी से अग्रसर है चूँकि आधुनिक खोजे हमारे जीवन को तो आसान बना ही रही है और हमारे काम करने की क्षमता को छिन भी रही है। हम विज्ञान पर निर्भर होते-होते अपनी कार्य क्षमता खो चूँके है। जिसका हमें एहसास भी नहीं हो पा रहा है। विज्ञान हमारे जीवन में इतना दखल दे चूँका है कि इसके बीना अब जीवन ही सम्भव नहीं लगता। उदाहरण के तौर पर लैप टप, मोबाईल को देख सकते है जो बच्चो से बुजुर्गो तक को प्रभावित कर चुका है नवयुवक/नवयुवती को क्या कहा जाए और इसके अच्छे और बुरे परिणाम समाज के सामने है। मोबाईल ने मानव को अकेलापन और आभासी दुनिया में ढकेल दिया है जहाँ बचपन/जवानी/बुढ़ापा बेरंग और उत्तेजक होने लगा है।विज्ञान का जीवन में इतना दखल हो चूँका कि यह मानव जीवन को आसान बनाते-बनाते कब विनाश की ईबारत लिख देगा ठीक से कहा नहीं जा सकता। *ए-आई* मानव जीवन में एक क्रांतिकारी परिवर्तन लाया है इस *ए-आई* के अविष्कारक John McCarthy ने भी इसके गहन परिणामो के बारे शायद कभी नहीं सोचा होगा। विज्ञान कहीं वरदान है तो इसकी असावधानियां विनाशक भी हो सकती है। और इसके विनाशक क्षमता कल्पना से परे है। मानव विज्ञान को शायद बस में करना चाहता है मगर इसका दुष्परिणाम शायद मानव के बस में नहीं होगा।
आज धरती पर जो दुश्वारियां देखने को मिलती है उसके लिए कहीं ना कहीं विज्ञान का प्रत्यक्ष रुप से या अप्रत्यक्ष रुप से प्रभाव जरुर रहा है। जो इतने बडे जनसमूह के उपभोग के नतीजो के रुप में हमारे सामने आता रहता है। यें सारी प्राकृतिक-अप्राकृतिक घटनाएं हमारे कर्मो के नतीजे है। इसके लिए भगवान का मर्जी कहना एक जाने-अनजाने मानवीय अपराध है। मानव अपने कर्मो का नतीजा खूद भोगता है और भगवान को दोष देता है। यह मानव की नादानी है। जो अपने अपराध के लिए भगवान को दोष देता है। क्या भगवान ने कहा है ग्रह नक्षत्रो, सूर्य, चाँद, मंगल, बुध इत्यादि ग्रहो से छेड़-छाड़ करो, धरती आकाश पताल सभी जगह मानव निर्मित इलेक्ट्रो-केमिकल कचरे फैला दो, पेड़ो की अंधाधुंध कटाई कर दो, भगवान ने कहा नदियों पर बाँध बना दो, भगवान ने कहाँ नदियों, पहाड़ो,जंगलो के गर्भ में जा घर बना लो। भगवान ने कहा नदियों को ही प्यासा मार दो। भगवान ने कहा नदियों को गंदा कर दो, भगवान ने कहा पैसो के घोटाला कर जानलेवा ईमारते पूल सड़क बना दो भगवान ने कहा जंगल पहाड खत्म कर के शहरीकरण कर दो। भगवान ने कहा पर्वत के मस्तक पर चढ़ उसे कचड़ो से भर दो उसे दूषित कर दो, भगवान ने कहा है ज्ञान-विज्ञान का दुरुपयोग करो, भगवान की वजह से धरती पर ग्लोबल वार्मिंग बढ़ गया क्या?अब बस करो साहब अपना पाप का ठीकरा भगवान पर काहे फोड़ते हो यार!! शर्म करो ए-इंसान धरती पर दो तिहाई जल के रहते, गंगा का बिस्तृत दोआब के रहते, हरे-भरे जंगल को रहते, लोग भूखे-प्यासे मर रहे है आखिर क्यों भगवान ने ऐसा करने को कहा है क्या? अगर नहीं तो भगवान दोषी कैसे है??? जिस दिन मानव अपना अपराध स्वीकार कर लेगा यकीन मानें सुधार चालू हो जायेगा!!! धरती की आँचल वात्सल्य है!! अपने संतानो को दु:खी नहीं होने देगी बस विज्ञान को विनाश का हथियार ना बनाओ। अपने समझ का विस्तार करो लोभ का नहीं बस संयम रखो!!आज कृत्रिम बुद्धिमता की खोज मानव समुदाय ही नहीं धरती के लिए शायद अभिशाप बन जाए। आज मानव बिल्कुल ही मशीनो पर अधारित हो चुका है। अगर उन मशीनो में मानव का गुण भर दिया जाए तो फिर क्या कहने। आज तकनीक है कि मशीनो में जो गुण भरना चाहे वो भर सकते है। और अपने मनमाफिक उससे कार्य ले सकते है।
आज कम्प्यूटर अधारित, कार्य गेम, चलचित्र, खेल, सिरियल, बेहतरीन सीनसीनरी, सिनेमा सारे काम कम्प्यूटर अधारित हो गए है मानव व मानव बल की उपयोगिता घटती जा रही है। अब आने वाला समय रोबोटो का युग होगा मानव और मानवीय मूल्य खत्म हो जायेगे। मानव शक्ति का उपयोग और उपयोगिता न्यून हो जायेगी। सारे काम मशीन अधारित हो जायेंगे जो मात्र मानव के इशरत पर निर्भिक हो कर काम को अंजाम देगा जिसके परिणाम के बारे में उसकी सोच ही नहीं होगी। मानव समुदाय उसी के तरफ अग्रसर है और पूँजीवादी सोच व पूँजी मानव को चरम आनंद पाने की तरफ ढकेल रहा है। जहाँ गरीब हाशिए पर जा रहा हैं दुनिया एक बड़ी मानवीय त्रासदी की तरफ बढ़ रही है। आने वाले समय में मानव व पशु के दिमाग जैसा उसमें चीप ड़ाला जायेगा जो मशीन को मानव जैसा आकार देना चाहे वैसा ही मशीनी मानव तैयार हो जायेगा। जो ना थकेगा, ना उसे भूख लगेगी ना ही कोई वेतन लेगा। पैसे वाले लोग ऐसे मानव को खरीद लेगे और उसी से दैनिक कार्य लेगे,नतीजा होगा वास्तविक आदमी बेरोज़गार हो जायेगा और जीवन दुरुह हो जायेगा। मशीनी आदमी का उपयोग होटल हो, ऑफिस हो, रेलवे हो, न्यूज चैनल हो, सीरियल हो सिनेमा हो, युद्ध हो चाहे जीवन का कोई भी क्षेत्र हो सारे काम कृत्रिम बुद्धिमता(AI) वाले आदमी के माध्यम से ही होगा। यें मशीने परमाणु युद्ध करने से भी नहीं हिचकेगी बिन्दास हो कर काम को अंजाम देगा। और जितना मशीन मानव बनता जायेगा मनुष्य बेरोजगार होता जायेगा और धरती पर गजब की उबाऊँ स्थिती बन जायेंगी जहाँ मनुष्य जीवन से ज्यदा मौत को पसंद करेगा। धनाढ्य वर्ग जम कर मशीन का उपयोग करेगा जिससे देश के सभी क्षेत्रो में बेरोजगारी बढेगी। गरीबी-अमीरी के बीच की खाई बिकराल होंगी और अभाव और सम्पन्नता के बीच बढ़ती खाई धरती को विनाश की तरफ ढकेल देगी। आज विनाशक हथियारो की जो होड़ मची है उसका कही ना कहीं तो अंत होगा जो बना है वो तो कभी ना कभी तो बिगडेगा ही। चाहे मानव चलाए या मशीन चलाए या समयांतराल में खूद ही क्यूँ ना चलने लगे। क्योंकि धरती पर जो आया है उसका विनाश निश्चित है।

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