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बागपत:राज्यपाल एवं केंद्रीय मंत्री ने किसानों को दिया समृद्धि का मंत्र: प्राकृतिक खेती बनेगी बागपत की पहचान।

चौधरी चरण सिंह की कर्मभूमि से किसान कल्याण का नया अध्याय शुरू: ‘बागपत ब्लूम’ ब्रांड का हुआ शुभारंभ।

आधुनिक हो रही खेती, योजनाओं से जुड़ अब स्मार्ट बने किसान, दिल्ली की मार्केट से जुड़कर आय करे दोगुनी।

अब नाम भी, दाम भी: किसानों की मेहनत को पूरी पहचान दिलाएगा बागपत ब्लूम ब्रांड, राज्यपाल एवं केंद्रीय मंत्री ने किया लॉन्च।

किसान मेले में खूब मिली योजनाओं की जानकारी, एक नई प्रेरणा से जीवंत हुआ जनपद बागपत।

जनपद के प्रगतिशील किसान, उद्यमी एवं एफपीओ हुए सम्मानित, बागपत में हरित क्रांति को बढ़ावा देने का दोहराया संकल्प।

RKTV NEWS/बागपत(उत्तर प्रदेश)19 दिसंबर।भारत रत्न एवं देश के पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की 123वीं जयंती के उपलक्ष्य में आज किशनपुर बराल में आयोजित किसान सम्मान समारोह एवं भव्य किसान मेले ने गुरुवार को जनपद को एक नई ऊर्जा से सराबोर कर प्रेरित किया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि गुजरात एवं महाराष्ट्र के राज्यपाल आचार्य देवव्रत जी रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता केंद्रीय राज्यमंत्री जयंत चौधरी जी ने की।
इस अवसर पर अतिथियों ने किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने का आवाहन किया गया। कार्यक्रम में कहा गया कि रासायनिक तत्वों के अत्यधिक उपयोग से भूमि की उर्वरता लगातार नष्ट हो रही है और यदि यही स्थिति रही तो आने वाले 40 वर्षों में खेती योग्य भूमि नहीं बचेगी। इसलिए प्राकृतिक खेती को जीवन और कृषि दोनों के लिए अपनाना आवश्यक है। प्राकृतिक खेती से किसान स्वयं भी स्वस्थ रहेगा और उसकी उत्पादकता व आय में भी वृद्धि होगी।
प्राकृतिक खेती और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में बागपत प्रशासन निरंतर संकल्पित होकर कार्य कर रहा है। जिलाधिकारी अस्मिता लाल की पहल पर प्रशासन और किसानों के संयुक्त प्रयास से तैयार “बागपत ब्लूम” ब्रांड का शुभारंभ गुरुवार को गुजरात एवं महाराष्ट्र के राज्यपाल आचार्य देवव्रत जी एवं केंद्रीय राज्यमंत्री जयंत चौधरी जी द्वारा किया गया। इस ब्रांड के माध्यम से बागपत के कृषि उत्पादों को “फील्ड टू मार्केट” मॉडल के तहत नई और व्यापक बाजार पहुंच मिलेगी, जिससे किसानों को उनके उत्पादों का बेहतर मूल्य प्राप्त हो सकेगा।
बागपत ब्लूम ब्रांड के अंतर्गत चिया बीज, अलसी के बीज, मोरिंगा पाउडर, पीली व काली सरसों का तेल, ऑर्गेनिक शहद, गुड़-शक्कर, गुड़ की डली, काला गुड़, खांडसारी, गाय का घी और सिरका जैसे उत्पाद शामिल किए गए हैं। ये सभी उत्पाद जनपद में गठित कृषि उत्पादक संगठनों (एफपीओ) द्वारा तैयार किए जा रहे हैं, जो अब बागपत की पहचान और स्वाद को राष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाएंगे।
बागपत ब्लूम किसानों को संगठित कर उत्पादन, मूल्य संवर्धन और विपणन से जोड़ने की एक समग्र रणनीति है जिसके तहत एग्रो बिजनेस मॉडल से कृषि उत्पादक संगठन जुड़ रहे है। वहीं किसान कल्याण मेले के दौरान जनपद में उत्पादन कर रहे कृषि एवं कृषि आधारित विभागों द्वारा अपने-अपने स्टॉल लगाए गए जिसमें लोगों ने भ्रमण कर सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी की।
इस अवसर पर 13 कृषि उत्पादक संगठनों (एफपीओ) को सूचीबद्ध किया गया और उन्हें मंच से सम्मानित भी किया गया। यह सम्मान एफपीओ मॉडल को मजबूत करने और किसानों को संगठित कृषि की दिशा में आगे बढ़ाने का प्रतीक बना। बागपत ब्लूम के माध्यम से जनपद के प्राकृतिक और विशिष्ट कृषि उत्पादों को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की पहल की शुरुआत हुई।
किसान सम्मान समारोह के दौरान जिन एफपीओ एवं कृषि आधारित संगठनों को सम्मानित किया गया, उनमें प्रमुख रूप से संरक्षक फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड, उन्नत किसान बायो एनजी एफपीओ लिमिटेड, बिनौली कृषक विकास प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड, कृषक सखी प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड, बागपत ऑर्गेनिक फार्मट प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड, बागपत नेचुरल प्राइवेट लिमिटेड, शकुन सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड, वेदांशी प्राकृतिक उत्पाद, ताराचंद एग्रो फूड, पंवार ऑर्गेनिक फार्म, सुमन नीड्स फूड प्रोडक्ट्स, कृषि क्लेश, पुष्प उद्यान, आम निर्यातक, हनी हट, शांति प्राकृतिक कृषि उत्पाद, साथ ही कृषि विभाग, उद्यान विभाग एवं गन्ना विभाग शामिल रहे।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित राज्यपाल देवव्रत आर्य ने मंच से अपने जीवन के अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि वे हरियाणा के कुरुक्षेत्र में गुरुकुल के प्रधानाचार्य रह चुके हैं और अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने प्राकृतिक खेती को नजदीक से समझा और अपनाया। उन्होंने यह भी बताया कि वे पहले हिमाचल प्रदेश (2015–2019) और उसके बाद गुजरात (2019–वर्तमान) के राज्यपाल रहे हैं तथा सितंबर 2025 से महाराष्ट्र के राज्यपाल के रूप में भी कार्यभार संभाल चुके हैं। राज्यपाल देवव्रत आर्य आर्य समाज से जुड़े हैं और प्राकृतिक खेती के प्रबल समर्थक हैं।
राज्यपाल ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कृषि प्रधान जनपद बागपत का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां लगभग 1,07,000 हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि है, जिसमें से लगभग 85 प्रतिशत क्षेत्रफल में गन्ने की खेती की जाती है। अपने परिक्षेत्र दौरे के दौरान उन्होंने बागपत के किसानों को प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूक किया और उन्हें इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
राज्यपाल देवव्रत आर्य ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि गुरुकुल विद्यालय में प्रधानाचार्य रहते हुए उन्होंने 35 वर्षों तक लगभग 180 हेक्टेयर भूमि में प्राकृतिक खेती की है, जो रासायनिक खेती की तुलना में अधिक उत्पादन देती है। उन्होंने किसानों से आवाहन किया कि वे प्राकृतिक खेती अपनाकर अपनी उत्पादकता, व्यवसाय और राजस्व को बढ़ाएं। उन्होंने कहा कि रासायनिक खादों के प्रयोग से भूमि से केंचुए समाप्त हो रहे हैं, जबकि केंचुओं की मौजूदगी से भूमि की उर्वरता स्वाभाविक रूप से बढ़ती है।
उन्होंने हरित क्रांति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्ष 1960 में डॉ. स्वामीनाथन एम.एस. के नेतृत्व में हरित क्रांति की शुरुआत हुई थी। पंतनगर विश्वविद्यालय द्वारा जब भूमि की जैविक क्षमता का परीक्षण किया गया, तब ऑर्गेनिक कार्बन 2 से 2.5 प्रतिशत के बीच पाया गया था, लेकिन आज यह घटकर 0.5 प्रतिशत से नीचे पहुंच गया है, जो भूमि के बंजर होने का संकेत है। उन्होंने कहा कि रासायनिक खेती में लागत बढ़ रही है, उत्पादन घट रहा है और प्रदूषण बढ़ता जा रहा है, इसलिए अब समय आ गया है कि “जहर वाली खेती” छोड़कर प्राकृतिक खेती अपनाई जाए।
राज्यपाल ने भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की स्मृति में आयोजित किसान कल्याण मेले का उल्लेख करते हुए कहा कि चौधरी चरण सिंह जी अपने जीवन में दो महान व्यक्तित्वों से विशेष रूप से प्रभावित थे—आध्यात्मिक रूप से स्वामी दयानंद सरस्वती जी से और राजनीतिक रूप से महात्मा गांधी जी से। उन्होंने किसानों के उत्थान के लिए सशक्त और दूरदर्शी कार्य किए। यह हम सभी के लिए सौभाग्य की बात है कि बागपत उनकी कर्मभूमि रही और हम उनके जन्मदिवस को हर्ष, उल्लास और उत्सव के साथ मना रहे हैं।
अपने संबोधन के अंत में राज्यपाल देवव्रत आर्य ने कहा कि व्यक्ति को किसी भी प्रकार के नशे से दूर रहना चाहिए और स्वस्थ जीवनशैली अपनानी चाहिए। उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि वे प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर खेती करें, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए धरती सुरक्षित रह सके।
वहीं अपने संबोधन में केंद्रीय राज्यमंत्री जयंत चौधरी ने कहा कि आने वाले समय में किसानों का सशक्तिकरण सबसे बड़ी चुनौती है। किसानों को उनकी फसल की पूरी लागत और उचित मूल्य मिलना चाहिए, ताकि उनका परिवार, ग्रामीण समाज और देश की अर्थव्यवस्था सुरक्षित रह सके। उन्होंने कहा कि महामहिम राज्यपाल देवव्रत जी चौधरी साहब की कर्मभूमि को देखना चाहते थे। राज्यपाल स्वयं शिक्षक भी हैं और किसान भी, और उन्होंने गुरुकुल शिक्षा पद्धति को जीवंत करने के लिए उल्लेखनीय प्रयास किए हैं।
उन्होंने कहा कि आज जीवन के हर क्षेत्र में विज्ञान को शामिल करना आवश्यक है। यदि देश आज प्रगति कर रहा है तो उसमें युवा पीढ़ी की नई सोच और ऊर्जा की बड़ी भूमिका है। युवा भारत की सोच और शक्ति को आज पूरी दुनिया स्वीकार कर रही है। हर व्यक्ति चाहता है कि उसका क्षेत्र और गांव विकसित हो, और जब लोग यहां से लौटेंगे तो उन्हें लगेगा कि वे एक प्रेरक और शानदार कार्यक्रम से लौट रहे हैं।
जयंत चौधरी ने किसानों की भूमिका पर बात करते हुए कहा कि यहां अधिकांश किसान छोटे काश्तकार हैं, जिनके पास कम भूमि है, लेकिन खेती में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि किसानों के समूहों के लिए एफपीओ (किसान उत्पादक संगठन) जैसी बड़ी योजना बनाई गई है, जिससे किसानों को संगठित होकर जुड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज एक ऐसी उत्पादन इकाई देखने को मिली, जिसे देखकर गर्व होता है, लेकिन छोटे उद्यमियों को योजनाओं की पूरी जानकारी नहीं मिल पाती।
उन्होंने कृषि उत्पादन और फसलों की स्थिति पर कहा कि इस बार गन्ने की पैदावार उन्हें कुछ हल्की और कमजोर प्रतीत हो रही है। उन्होंने यह भी कहा कि गन्ने के अलावा दूसरी फसलों में आज अधिक संभावनाएं दिखाई दे रही हैं। बागवानी, फल, सब्जी और मसालों की खेती में किसान संगठित होकर आगे बढ़ सकते हैं।
जयंत चौधरी ने गन्ना उद्योग का उदाहरण देते हुए कहा कि जब चौधरी अजित सिंह सरकार में शामिल हुए थे, तब उन्होंने उद्योग को बढ़ावा दिया ताकि किसानों को उनकी फसल का सीधा और मूल्यकारी लाभ मिल सके। गन्ना उद्योग ऐसा उदाहरण है, जिसमें किसानों ने वास्तविक लाभ देखा है। उन्होंने कहा कि उद्योग स्वस्थ रहे, किसानों को आर्थिक सुरक्षा मिले और सरकार ऐसी नीतियां बनाए जिससे किसानों को उनकी मेहनत का पूरा फल मिल सके। इसके लिए किसानों का सरकारी योजनाओं से जुड़ना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि किसान अपनी उपज विदेशों तक भी पहुंचा सकते हैं और यदि वैश्विक स्तर पर तुलना की जाए तो यहां के किसान किसी से पीछे नहीं हैं। उन्होंने बताया कि कुटीर उद्योगों के लिए इस बार 2000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है और 10 लाख रुपये तक की सब्सिडी की व्यवस्था भी है, लेकिन बहुत कम किसानों को इसकी जानकारी है। किसान अधिकतर अपने खेतों में व्यस्त रहते हैं, इसलिए आवश्यक है कि जागरूकता शिविर लगाए जाएं, ताकि योजनाओं का लाभ सही लोगों तक पहुंचे।
जयंत चौधरी ने कहा कि आज खेती-किसानी में तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का हस्तक्षेप बढ़ रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि कितने किसानों को नई योजनाओं और तकनीकी अवसरों की जानकारी है। उन्होंने बताया कि किसानों के लिए निशुल्क 15 घंटे का एक विशेष कोर्स तैयार किया गया है, जिसमें आईटी विभाग भी शामिल है। विभिन्न कंपनियों को जोड़कर बनाया गया यह कोर्स किसानों के लिए पूरी तरह मुफ्त है और इसके साथ माइक्रोसॉफ्ट कंपनी का प्रमाणपत्र भी दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह कोर्स वे स्वयं भी करने जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि जनवरी माह में एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसे राष्ट्रपति का आशीर्वाद प्राप्त होगा। साथ ही किसान दिवस यानी चौधरी चरण सिंह जयंती भी आने वाली है। उन्होंने कहा कि लोग इस दिवस को अपने-अपने तरीके से मनाते हैं, लेकिन उनके मंत्रालय में भी इस अवसर पर विशेष कार्यक्रम रखा गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि चौधरी चरण सिंह केवल किसान नेता ही नहीं थे, बल्कि एक कुशल प्रशासक भी थे और इस पक्ष को भी समझना आवश्यक है।
जयंत चौधरी ने चौधरी चरण सिंह के विचारों को याद करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी पुस्तक में लिखा है कि जैसा व्यवहार, आचरण और सेवा हम दूसरों के साथ करते हैं, वही हमें अपने जीवन में भी उतारना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि किसानों की लंबे समय से यह मांग रही है कि खेतिहर मजदूरों की उपलब्धता और उनके हितों को सुनिश्चित करने के लिए कानून पर गंभीर चर्चा हो।
अपने संबोधन के अंत में जयंत चौधरी ने कहा कि एक आम नागरिक के लिए सरकारी योजनाएं सरल और सुलभ होनी चाहिए। इसी उद्देश्य से उनके मंत्रालय में एक सप्ताह का विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें मंत्रालय की सभी योजनाओं को अधिक सुलभ और प्रभावी बनाने के लिए व्यापक मंथन किया जाएगा।
इस अवसर पर उत्तर प्रदेश सरकार विज्ञान प्रौद्योगिकी मंत्री अनिल कुमार ,छपरौली विधायक डॉ अजय कुमार, जिलाधिकारी अस्मिता लाल, कार्यक्रम संयोजक उपसभापति रमाला शुगर मिल जयदेव, जिला अध्यक्ष सुभाष गुर्जर सहित आदि लोग उपस्थित रहे।

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