
RKTV NEWS/नई दिल्ली, 05 नवम्बर।दुनिया भर में जंगली जीव-जंतुओं और पक्षियों की लुप्तप्राय प्रजातियों के अवैद्य व्यापार पर नजर रखने वाली संस्था ‘अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव व्यापार संधि (सीआईटीईएस)’ ने गुजरात के जामनगर स्थित वनतारा परियोजना और उससे जुड़ी दो संस्थाओं ‘ग्रीन ज़ूलॉजिकल रेस्क्यू एंड रिकवरी सेंटर’ (जीजेडआरआरसी) और ‘राधाकृष्ण टेम्पल एलिफेंट वेलफेयर ट्रस्ट’ (आरकेटीडब्लयूईटी) की बेहतरीन कार्यप्रणालियों और कामकाज की खुलकर सराहना की है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने भी वनतारा को क्लीन चिट दी थी।
जांच रिपोर्ट में सीआईईटीएसने कहा है कि दोनों संस्थान बहुत ही उच्च मानकों के आधार पर संचालित हो रहे हैं। यहां पशुओं के लिए आधुनिक बाड़े, चिकित्सीय देखभाल और उन्नत सुविधाएं उपलब्ध हैं। रिपोर्ट के मुताबिक इन संस्थानों ने पशु-चिकित्सा के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण सफलताएं हासिल की हैं। एक कदम आगे बढ़कर रिपोर्ट में यह सलाह दी गई कि पशु चिकित्सा के अनुभव को इन संस्थानों को वैज्ञानिक समुदाय के साथ साझा करना चाहिए।
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की वन्यजीव सुरक्षा और नियामक व्यवस्था अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरी उतरी है, और वनतारा पशु-संरक्षण के क्षेत्र में नई मिसाल कायम कर रहा है। सीआईईटीएस ने कहा कि भारत सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि जीजेडआरआरसी और आरकेटीडब्लयूईटी द्वारा की गई सभी पशु-आयात प्रक्रियाएं भारतीय कानूनों के अनुसार पूरी तरह वैध और पारदर्शी हों।
संस्था ने जांच में पाया कि सभी पशु, सीआईईटीएस निर्यात या पुनः-निर्यात परमिट पर ही भारत लाए गए हैं। बिना परमिट के कोई भी पशु भारत नहीं लाया गया। इसके अलावा, किसी भी वाणिज्यिक उद्देश्य से पशुओं के आयात या बिक्री का भी कोई संकेत पाया गया।
