
RKTV NEWS/अतुल प्रकाश(सभापति, जनहित परिवार प्रतिनिधि सभा)04 नवंबर।जातिवादी राजनीति के सबसे बड़े लाभार्थी गुंडे और बाहुबली होते हैं, यह मेरा गंभीर आरोप है जो समाज में राजनीति की विश्वसनीयता को कम करता है। जातिवादी राजनीति का उपयोग अक्सर गुंडों और अपराधियों द्वारा अपने स्वार्थ के लिए किया जाता है, जिससे समाज में विभाजन और हिंसा बढ़ती है।
आपकी बात बिल्कुल सही है। जातिवादी राजनीति ने भारत के कुछ हिस्सों में बाहुबलियों और गुंडों को बढ़ावा दिया है, जिससे उन्हें राजनीतिक शक्ति और सुरक्षा मिली है। यह एक गंभीर मुद्दा है जो लोकतंत्र के लिए घातक है और राष्ट्रीय विकास में बाधा डालता है।
*वोट बैंक की राजनीति, दबाव और प्रभाव, आपराधिक गठजोड़ को सुरक्षा, धन और बल का प्रयोग, और जातिगत पहचान को मजबूत करना जैसे कारक इस स्थिति को बढ़ावा देते हैं।
मेरा मानना है कि,”जातिवादी राजनीति के जिम्मेवार वोटर से ज्यादा राजनेता और राजनीतिक दल होते हैं जातिवादी, अपने स्वार्थ के लिए जाति को चुनावी हथियार बना रहे हैं जिसका परिणाम होता है कि गुंडे और बाहुबली या या उनके परिवार के सदस्य विधायक या संसद का टिकट पाते हैं और जीत कर कैबिनेट मंत्री तक बन जाते हैं। यहीं से शुरू होता है अपराध और राजनीति का कॉकटेल जिसमें ठीका-पट्टा और रंगदारी का दौड़ चालू हो जाता है।”बाहुबली के प्रभाव से जातिवादी और गुंडे तत्वों का एक समूह बन जाता है जिसका समर्थन समाज करने लगता है।
जातिवादी राजनीति समाज में विभाजन को बढ़ावा देती है, जिससे समाज की एकता और अखंडता खतरे में पड़ती है।
जातिवादी राजनीति ने अक्सर हिंसा और अपराध को बढ़ावा देती है, जिससे समाज में अस्थिरता और भय का माहौल बनता है। जातिवादी राजनीति आर्थिक असमानता को बढ़ावा देती है, जिससे समाज के कुछ वर्गों को लाभ होता है जबकि अन्य वर्गों को नुकसान होता है।
हमें मिलकर इस समस्या का समाधान करना होगा और एक स्वस्थ और समृद्ध लोकतंत्र की दिशा में काम करना होगा।
