संभव अभियान में 428 अति गंभीर कुपोषित बच्चे चिन्हित, ई-कवच पोर्टल पर अपडेट होगा डाटा।
75 आंगनवाड़ी केंद्र बनेंगे ‘लर्निंग लैब’, बच्चों की पढ़ाई और पोषण साथ-साथ।
8वां राष्ट्रीय पोषण माह: कुपोषण पर जीतेगा बागपत, स्वस्थ पीढ़ी बनेगी जिले की पहचान।
RKTV NEWS/बागपत(उत्तर प्रदेश)18 सितंबर। जिलाधिकारी अस्मिता लाल की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में पोषण समिति की समीक्षा बैठक आयोजित हुई जिसमें जनपद में कुपोषण की रोकथाम, महिलाओं एवं बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार, और आंगनवाड़ी केंद्रों को आधुनिक स्वरूप में विकसित करने की दिशा में प्रगति की समीक्षा हुई।
बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने स्पष्ट कहा कि वर्तमान समय में मोटापा एवं कुपोषण एक गंभीर जनस्वास्थ्य समस्या बनता जा रहा है। उन्होंने चीनी, नमक और तेल के अत्यधिक उपयोग को इसका प्रमुख कारण बताते हुए निर्देश दिए कि जनपद स्तर पर जागरूकता अभियानों के माध्यम से लोगों को संतुलित आहार अपनाने के लिए प्रेरित किया जाए। उन्होंने कहा कि यदि बच्चों और महिलाओं की खान-पान की आदतों में सुधार लाया जाए तो भविष्य में बीमारियों का बोझ काफी हद तक कम किया जा सकता है।
8वें राष्ट्रीय पोषण माह एवं ‘स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार’ अभियान के तहत जागरूकता कार्यक्रमों के आयोजन हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने कहा कि महिलाओं का स्वास्थ्य केवल परिवार की ही नहीं बल्कि समाज और राष्ट्र की प्रगति का आधार है। इसलिए गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और किशोरी बालिकाओं तक सही पोषण संबंधी जानकारी और सेवाएँ पहुंचाई जाएं।
हाल ही में चयनित मुख्य सेविकाओं को जल्द ही ब्लॉकों में आवंटित करने का निर्णय लिया गया, ताकि योजनाओं के कार्यान्वयन और निगरानी को और मजबूती मिल सके। जिलाधिकारी ने कहा कि प्रत्येक सेविका को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके कार्यक्षेत्र में पोषण संबंधी योजनाएं सही ढंग से लागू हों।
बच्चों को आकर्षित करने और उन्हें रचनात्मक माहौल देने के लिए आंगनवाड़ी केंद्रों में बाल पेंटिंग का उपयोग किया जाएगा। इससे बच्चे न केवल सीखने की प्रक्रिया में रुचि लेंगे बल्कि मानसिक रूप से भी विकसित होंगे। इसके साथ ही, जनपद के 75 आंगनवाड़ी केंद्रों का कायाकल्प कर उन्हें लर्निंग लैब के रूप में विकसित किया जा रहा है। इन लैब्स में सभी आवश्यक मानक जैसे स्वच्छता, शिक्षा सामग्री, और आधुनिक सीखने के साधन सुनिश्चित किए जाएंगे। जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि इन लैब्स का वातावरण ऐसा हो जो बच्चों को खेल-खेल में सीखने के लिए प्रेरित करे।
जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि सभी आंगनवाड़ी केंद्रों में पोषण वाटिकाओं का निर्माण कराया जाए, ताकि स्थानीय स्तर पर हरी एवं पौष्टिक सब्जियों का उत्पादन हो सके और बच्चों को ताज़ा पोषणयुक्त भोजन उपलब्ध कराया जा सके। इसके अलावा जल संरक्षण इकाइयाँ स्थापित की जाएंगी, जिससे केंद्रों पर पोषण वाटिका हेतु जल उपलब्धता बनी रहे। बैठक में बताया गया कि जनपद ने पोषण ट्रैकर पर 95.75 प्रतिशत प्रगति हासिल की है, जो एक उल्लेखनीय उपलब्धि है। जिलाधिकारी ने शत प्रतिशत लक्ष्य पूर्ण करने के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी ने अति कुपोषित बच्चों की स्थिति पर विशेष चिंता व्यक्त की। बैठक में जानकारी दी गई कि संभव अभियान के तहत 428 अति गंभीर कुपोषित बच्चों (SAM श्रेणी) की पहचान की गई है, जिनमें से 396 बच्चों का डेटा पोर्टल पर दर्ज हो चुका है। उन्होंने निर्देश दिया कि शेष बच्चों को तत्काल पोर्टल पर पंजीकृत किया जाए और ई-कवच एप पर भी स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से नियमित रूप से डेटा अपडेट किया जाए। इससे बच्चों की निगरानी आसान होगी और उन्हें आवश्यक पोषण एवं स्वास्थ्य सेवाएँ समय पर उपलब्ध कराई जा सकेंगी।
जनपद में वर्तमान में 23 आंगनवाड़ी केंद्रों का निर्माण कार्य चल रहा है, जिनमें से 19 केंद्र लोकार्पण के लिए तैयार हो चुके हैं। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि इन केंद्रों का लोकार्पण समयबद्ध ढंग से सुनिश्चित किया जाए और शेष केंद्रों को भी शीघ्र पूरा किया जाए। बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने जिला पंचायती राज अधिकारी को भी विशेष रूप से निर्देशित किया कि वे पोषण मिशन और आंगनवाड़ी केंद्रों से जुड़े कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाएँ और निर्धारित समयसीमा के भीतर कार्य पूरा कराएँ।
इस अवसर पर अपर जिलाधिकारी वित्त/राजस्व पंकज कुमार, सम्बंधित एसडीएम, अधिशासी अधिकारी के के भड़ाना, जिला कार्यक्रम अधिकारी नागेंद्र मिश्रा सहित अन्य अधिकारीगण मौजूद रहे।

