नई दिल्ली/15 दिसंबर।राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 14 दिसंबर को राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस के अवसर पर नई दिल्ली में राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण पुरस्कार 2023 और ऊर्जा संरक्षण पर राष्ट्रीय चित्रकला प्रतियोगिता पुरस्कार प्रदान किए।
सभा को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि हम सभी का स्वास्थ्य और खुशी प्रकृति के संरक्षण और अच्छे स्वास्थ्य में निहित है। यदि हम उपलब्ध संसाधनों का इष्टतम उपयोग करते हैं, तो प्रकृति और धरती माता पर अनावश्यक दबाव डाले बिना सभी की ऊर्जा और अन्य ज़रूरतें पूरी हो सकेंगी। उन्होंने कहा कि इष्टतम उपयोग के साथ-साथ सभी हितधारकों को ऊर्जा दक्षता और नवाचार को बढ़ावा देना होगा। ऊर्जा बचत के उपायों को बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करना होगा। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि ऊर्जा की बचत ही ऊर्जा उत्पादन है – यह संदेश बहुत उपयोगी है। उन्होंने सभी से इस संदेश को फैलाने के लिए हर संभव प्रयास करने का आग्रह किया
राष्ट्रपति ने कहा कि 21वीं सदी में विश्व समुदाय को ऊर्जा दक्षता बढ़ाने और नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग बढ़ाने के लिए निरंतर सक्रिय रहना होगा। हमें पवन, सौर और लघु एवं सूक्ष्म जल विद्युत परियोजनाओं से ऊर्जा का उत्पादन बढ़ाना होगा। अधिक नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग करने के साथ-साथ हमें कम संसाधनों से अधिक ऊर्जा उत्पादन के प्रयास भी करने होंगे। उन्होंने कहा कि हमें अपने स्थिरता प्रयासों में ट्रिपल बॉटम लाइन की अवधारणा के साथ आगे बढ़ना चाहिए। किसी भी व्यवसाय से न केवल आर्थिक लाभ होना चाहिए बल्कि पर्यावरणीय और सामाजिक लाभ भी होना चाहिए।
राष्ट्रपति ने कहा कि भारत ने स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में हमेशा एक जिम्मेदार देश के रूप में काम किया है। लेकिन हम समय-समय पर यह भी स्पष्ट करते रहे हैं कि जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता निश्चित रूप से कम हो रही है लेकिन जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा भी हमारे देश में आवश्यक है। भारत स्वच्छ कोयला प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा दे रहा है ताकि कोयला निष्कर्षण और उपयोग की प्रक्रिया अधिक कुशल और पर्यावरण अनुकूल बन सके। यह पर्यावरण के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का ही परिणाम है कि दस वर्षों की अवधि में भारत जलवायु परिवर्तन प्रदर्शन सूचकांक की रैंकिंग में 30वें से 7वें स्थान पर आ गया है।
राष्ट्रपति ने कहा कि ‘हरित ऊर्जा खुली पहुंच नियम, 2022’ और नवीकरणीय खरीद दायित्व जैसे प्रयास भी वर्ष 2030 तक राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान के लक्ष्य को प्राप्त करने की भारत की यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि ‘लाइफ’ के अनुरूप यानी पर्यावरण के लिए जीवनशैली, भारत ने अब “ग्रीन क्रेडिट” की पहल की है जो हमारी परंपराओं से संबंधित पर्यावरण संरक्षण प्रथाओं को प्रोत्साहित करती है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ये प्रयास हमारे स्वच्छ ऊर्जा और पर्यावरण लक्ष्यों को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण साबित होंगे।
ऊर्जा संरक्षण के महत्व पर संदेश फैलाने और ऊर्जा दक्षता और संरक्षण में राष्ट्र की उपलब्धियों को प्रदर्शित करने के लिए हर साल 14 दिसंबर को राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस मनाया जाता है।


