
RKTV NEWS/आरा (भोजपुर)27 अगस्त।आज स्वराज यात्रा आरा पहुँची। यहाँ के प्रबुद्ध वर्ग के बीच स्वराज यात्रियों ने अपने विचार साझा किए। ज्ञान यज्ञ परिवार के मुखिया और ज्ञान केंद्र योजना के प्रभारी मोहन गुप्ता ने मुनि जी के जीवन के विभिन्न पड़ावों और उनकी कृतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि मुनि जी ने “भावी भारत का संविधान” पुस्तक समाज को समर्पित करने के बाद स्वराज के सिद्धांतों पर आधारित एक व्यवस्था का मॉडल प्रस्तुत किया, जिसका प्रयोग रामानुजगंज में किया गया।
रामानुजगंज में लोक स्वराज के सिद्धांतों के अनुसार नगर पालिका का संचालन किया गया। प्रत्येक शुक्रवार को गांधी मैदान में 15 वार्डों के सभासद और नगरवासी एकत्र होकर प्रस्ताव पारित करते थे, जिनके आधार पर मुनि जी नगर पालिका के अध्यक्ष के रूप में कार्य करते थे। यह सहभागी लोकतंत्र (पार्टिसिपेटरी डेमोक्रेसी) का अनूठा और प्रेरक प्रयोग था। इस मॉडल के प्रभाव से रामानुजगंज भारत का एकमात्र अपराध-नियंत्रित नगर घोषित हुआ। यहाँ जनभागीदारी के माध्यम से नगरवासियों ने प्रत्येक नागरिक को हत्या, बलात्कार, लूट, चोरी, डकैती, मिलावट और धोखाधड़ी से बचाने की गारंटी दी थी। मुनि जी के मार्गदर्शन में नगरवासियों की सक्रियता के कारण कोई भी अपराधी बच नहीं पाया, और नगर में सुख-शांति का वातावरण बना रहा।
ज्ञान यज्ञ परिवार के कार्यकर्ता ज्ञानेंद्र आर्य ने प्रबुद्ध वर्ग के समक्ष ज्ञान केंद्र योजना को विस्तार से प्रस्तुत किया। उन्होंने वर्तमान व्यवस्था को लोक-नियंत्रित से लोक-नियुक्त प्रणाली की ओर ले जाने के दुष्प्रभावों और इसे सुधारने के उपायों पर विचार रखे। उन्होंने बताया कि वर्तमान संवैधानिक व्यवस्था में शक्ति का केंद्रीकरण इतना अधिक हो गया है कि व्यक्ति, परिवार, धर्म, समाज और जाति जैसी सामाजिक संस्थाएँ कमजोर हो गई हैं। समाज और राज्य के बीच के अनुबंध को संविधान बताते हुए, उन्होंने संविधान संशोधन में नागरिकों की प्रत्यक्ष भागीदारी की वकालत की और इसे संवैधानिक व्यवस्था परिवर्तन का नाम दिया।
सामाजिक व्यवस्था पर चर्चा करते हुए, उन्होंने समाज सशक्तिकरण को परिवार सशक्तिकरण से जोड़ा। उनके अनुसार, परिवार समाज की मूल इकाई है और व्यवस्था की सबसे छोटी इकाई भी परिवार ही होनी चाहिए, न कि व्यक्ति। इसे उन्होंने सामाजिक व्यवस्था परिवर्तन बताया। वैचारिक व्यवस्था परिवर्तन के अंतर्गत, उन्होंने विचारधाराओं और उन पर आधारित संगठनों के दुष्प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की। सभी उपस्थित लोग इस बात से सहमत दिखे कि विपरीत विचारधाराओं वाले लोगों के बीच संवाद के लिए एक साझा मंच होना चाहिए, जहाँ हर व्यक्ति स्वतंत्र रूप से अपने विचार व्यक्त कर सके। उनके अनुसार, वर्तमान समस्याओं का प्रमुख कारण विचार प्रचार का प्रभाव है, जबकि हमें विचार मंथन को प्राथमिकता देनी चाहिए।
ज्ञान यज्ञ परिवार ने रामानुजगंज में 12 से 16 फरवरी, 2026 को आयोजित होने वाले ज्ञानोत्सव के लिए सभी को विनम्रतापूर्वक आमंत्रित किया।
कार्यक्रम का आयोजन और संचालन स्वामी विक्रमादित्य और वरिष्ठ पत्रकार नरेंद्र सिंह ने किया। उपस्थित प्रबुद्ध वर्ग में से डॉ. उमेश ने स्वामी विक्रमादित्य को ज्ञान केंद्र के अध्यक्ष के रूप में प्रस्तावित किया, जिसे पत्रकार नरेंद्र सिंह , डॉ. सी.पी. पांडे, अरविंद सिंह सहित सभी विद्वानों ने सर्वसम्मति से स्वीकार किया। सभी ने स्वामी विक्रमादित्य के नेतृत्व में ज्ञान केंद्र के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई।
भिखारी ठाकुर सांस्कृतिक मंच पर आयोजित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ जया जैन और संचालन पत्रकार नरेंद्र सिंह ने किया।इस दौरान आगत अतिथियों द्वारा मंच परिसर में स्थापित भिखारी ठाकुर, बाबू ललन जी और उस्ताद बिस्मिल्लाह खान की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण किया गया। तत्पश्चात आगत अतिथियों का स्वागत स्वर्ण क्रांति सेना की राष्ट्रीय अध्यक्षा पूनम सिंह ,विनोद सिंह, डॉ भूषण, पप्पू सिंह आदि ने संयुक्त रूप से माला पहना कर किया।
कार्यक्रम में गायक धनी पांडे, बृज किशोर यादव, राम सकल सिंह भोजपुरिया ,यशवंत सिंह, उपेंद्र ठाकुर आदि शामिल रहे।
