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बागपत:डीएम अस्मिता लाल की अध्यक्षता में छोटी एवं सहायक नदियों के पुनरोद्धार की हुई समीक्षा।

बागपत में सहायक नदियों के पुनरोद्धार की शुरुआत, हर विभाग को मिली जिम्मेदारी।

सहायक नदियों को पुनर्जीवित करने की कवायद, जनभागीदारी से बनेगा मॉडल।

वर्षा जल संचयन और भूजल संरक्षण में सहायक बनेंगी छोटी नदियां।

RKTV NEWS/बागपत(उत्तर प्रदेश)30 जुलाई।जल संरक्षण, भूगर्भ जल स्तर में सुधार और पारिस्थितिक संतुलन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभागार में जनपद की छोटी एवं सहायक नदियों के पुनरोद्धार के संबंध में गहन समीक्षा बैठक की। बैठक में उन्होंने संबंधित विभागों को स्पष्ट एवं समयबद्ध दिशा-निर्देश देते हुए कहा कि यह कार्य केवल प्रशासनिक दायित्व नहीं, बल्कि भावी पीढ़ियों के लिए एक स्थायी विरासत है। नदियों के कायाकल्प से सम्पूर्ण क्षेत्र में पर्यावरण संतुलन स्थापित होगा।
बैठक में विशेष रूप से हिंडन नदी की सहायक नदियों के कायाकल्प पर चर्चा की गई, जो जनपद के बारह गांवों असारा, गोपालपुर खड़ाना, इब्राहिमपुर माजरा, गंगनाली, असरफाबाद, नांगल, कंडेरा, बामनौली, रंछाड़, रहटना, बरनावा और फखरपुर शेखपुर से होकर बहती है। वर्षों से उपेक्षा झेल रही यह सहायक नदी अब प्रशासन की प्राथमिकता में शामिल हो गई है, और इसके पुनरोद्धार के लिए बहुआयामी रणनीति तैयार की जा रही है।
जिलाधिकारी ने वन विभाग को निर्देशित किया कि नदी के दोनों किनारों पर वृहद स्तर पर वृक्षारोपण कराया जाए ताकि मृदा क्षरण रोका जा सके और पर्यावरण संतुलन स्थापित हो। जिलाधिकारी ने जिला पंचायत राज अधिकारी को निर्देशित किया कि वह नदी के प्रवाह को बाधित करने वाली सिल्ट और कीचड़ की समयबद्ध सफाई की कार्ययोजना तैयार करें। उन्होंने कहा कि नदियों का अविरल प्रवाह सुनिश्चित करना शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है, और इसके लिए नियमित निगरानी जरूरी है।
बैठक में रमाला चीनी मिल द्वारा नदी में छोड़े जाने वाले अपशिष्ट जल की शुद्धिकरण व्यवस्था पर भी चर्चा हुई। जिलाधिकारी ने सख्त लहजे में कहा कि इफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट की नियमित जांच की जाए और किसी भी स्थिति में मानकों से समझौता न हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि उद्योगों द्वारा प्रदूषित जल नदियों में छोड़ा गया तो उनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी। भूगर्भ जल स्तर को संरक्षित करने की दिशा में अटल भूजल योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी चर्चा की गई। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि जलग्रहण क्षेत्रों में चेक डैम, वर्षा जल संचयन गड्ढे एवं रिचार्ज स्ट्रक्चर का निर्माण शीघ्र कराया जाए ताकि वर्षा जल भूमि में समाहित हो और जल संकट से निपटने में सहायता मिले।
जिलाधिकारी ने सहायक नदियों से जुड़े ग्राम पंचायतों की सक्रिय भागीदारी पर विशेष बल देते हुए कहा कि नदी पुनरोद्धार कार्य में ग्रामीणों, युवाओं, स्वयंसेवी संगठनों और विद्यालयों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए। बैठक में वन विभाग, जल निगम, भूमि संरक्षण, पंचायत राज, गन्ना विकास, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सहित अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। जिलाधिकारी ने सभी विभागों से समन्वित प्रयासों की अपेक्षा जताते हुए निर्देश दिए कि नदी पुनरोद्धार कार्य को मिशन मोड में समयबद्ध रूप से पूरा किया जाए।
इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी नीरज कुमार श्रीवास्तव ,अपर जिलाधिकारी पंकज वर्मा ,अधिशासी अभियंता सिंचाई रजनीश कुमार सहित आदि अधिकारी उपस्थित रहे।

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