भाजपा–जदयू की सरकार में सार्वजनिक धन की खुली लूट:सुदामा प्रसाद
आरा/ भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)30 जुलाई।बिहार में 70 हजार करोड़ घोटाले का मुद्दा आरा सासंद सुदामा प्रसाद ने लोकसभा में पावसकालीन सत्र में उठाया।
उन्होंने कहा कि बिहार की राज्य वित्त पर हाल ही में जारी कैग रिपोर्ट (2023–24) में किए गए गंभीर खुलासों पर अपनी गहरी चिंता व्यक्त करता हूँ।रिपोर्ट के अनुसार, विभिन्न योजनाओं और विभागों को ₹70,877.61 करोड़ की राशि वितरित की गई, लेकिन इनकी उपयोगिता प्रमाणपत्र (Utilisation Certificates – UCs) अब तक प्रस्तुत नहीं की गई हैं। यह कुल 49,649 प्रमाणपत्रों से संबंधित है, जिससे पूरे फंड उपयोग पर सवाल खड़े हो जाते हैं।
जिन विभागों में सबसे अधिक वित्तीय अपारदर्शिता सामने आई है, वे हैं
• पंचायती राज विभाग – ₹28,154 करोड़
• शिक्षा विभाग – ₹12,623 करोड़
• नगर विकास विभाग – ₹11,065 करोड़
यह केवल प्रक्रियात्मक लापरवाही नहीं है, बल्कि संस्थागत स्तर पर वित्तीय कुशासन का प्रमाण है। बिहार ट्रेजरी कोड की धारा 271(ई) के अनुसार 18 महीने के भीतर UCs प्रस्तुत करना अनिवार्य है। राज्य सरकार ने न केवल इस नियम का उल्लंघन किया है बल्कि IGAS 1, 2, और 3 जैसे तीन राष्ट्रीय लेखा मानकों को भी ठेंगा दिखाया है।
और भी चिंताजनक तथ्य यह है कि ₹9,205.76 करोड़ की निकासी 22,130 एब्स्ट्रैक्ट कंटिजेंट बिल्स के माध्यम से की गई, जबकि इसके बदले डिटेल्ड कंटिजेंट बिल्स अब तक नहीं दिए गए—यह सीधे तौर पर वित्तीय शुचिता का उल्लंघन है।
अब मूलभूत सवाल उठते हैं
1. ₹70,000 करोड़ से अधिक की राशि कहां गई?
2. इसका कोई ऑडिट ट्रेल क्यों नहीं है?
3. इसके लिए जवाबदेह कौन है?
राज्य का GSDP भले ही 14.47% बढ़ा हो, लेकिन सरकार ने केवल 36% बचत राशि ही सरेंडर की और अपने 20% से अधिक बजटीय प्रावधानों का उपयोग नहीं किया। यह स्थिति वित्तीय कुशासन और प्रशासनिक विफलता को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।
यह स्पष्ट है कि भाजपा–जदयू की डबल इंजन सरकार बुरी तरह विफल रही है और जनता की गाढ़ी कमाई की खुली लूट को बढ़ावा दिया है।
उक्त जानकारी सांसद के निजी सचिव चन्दन कुमार ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।

