
आरा/ भोजपुर ( ए सद्दाम बादशाह )02 जून।आरा नगर, जो कभी ऐतिहासिक विरासत और सांस्कृतिक चेतना के लिए जाना जाता था, आज जर्जर सड़कों और गड्ढों के कारण शर्मसार हो रहा है। शहर की सड़कें वर्षों से टूट-फूट का शिकार हैं, लेकिन दुर्भाग्यवश अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। सवाल ये उठता है कि जब एक नगर आयुक्त शहर की मूलभूत समस्याओं को भी हल नहीं कर पा रहा है, तो फिर ऐसे पदाधिकारी की ज़रूरत ही क्या है?
नगरवासियों का रोज़मर्रा का जीवन इन खराब सड़कों के कारण नारकीय हो चुका है — पैदल चलना मुश्किल, वाहन दुर्घटनाओं का ख़तरा हर मोड़ पर, और बरसात में तो मानो सड़कें तालाब बन जाती हैं। बावजूद इसके, प्रशासनिक चुप्पी और लापरवाही निरंतर जारी है।
हम लंबे समय से यह मांग कर रहे हैं कि आरा नगर निगम में किसी अनुभवी, संवेदनशील और जिम्मेदार IAS अधिकारी को नगर आयुक्त के पद पर नियुक्त किया जाए। एक ऐसा अधिकारी जो सिर्फ़ फाइलों में नहीं, बल्कि ज़मीन पर काम करने में विश्वास रखे। ऐसे अफसर की ज़रूरत है जो जनता की समस्याओं को प्राथमिकता दे, योजनाओं का ईमानदारी से क्रियान्वयन करवाए और नगर को विकास की राह पर अग्रसर करे।
आज आवश्यकता है निर्णयात्मक नेतृत्व की, पारदर्शी कार्यशैली की और ठोस परिणामों की। जनता अब सिर्फ़ वादों से नहीं, बदलाव से भरोसा करती है। आरा जैसे नगर को अब और उपेक्षित नहीं रखा जा सकता। अगर नगर आयुक्त की कुर्सी पर बैठे व्यक्ति में जनहित के लिए इच्छाशक्ति नहीं है, तो ऐसे पदाधिकारी को बदलना ही जनहित में होगा।
हमारी यह आवाज़ सिर्फ़ एक मांग नहीं, बल्कि जनता की पीड़ा की अभिव्यक्ति है। आरा deserves better — और यह तभी संभव है जब नेतृत्व जवाबदेह हो।
