बिजली गुल, सिस्टम सक्रिय: बागपत में ब्लैकआउट मॉक ड्रिल के माध्यम से आपदा प्रबंधन का प्रभावी प्रदर्शन।

जन सहभागिता से मिली अभूतपूर्व सफलता, हर घर तक पहुँची आपदा से निपटने की सी।

ब्लैकआउट मॉक ड्रिल: बागपत में आपदा प्रबंधन की तैयारी में दिखा अनुकरणीय समन्वय।

घायलों को रिस्पॉन्स टाइम में अस्पताल लेकर पहुंची एम्बुलेंस, सभी विभागों के आपसी समन्वय की हुई परीक्षा।
RKTV NEWS/बागपत(उत्तर प्रदेश)07 मई। शाम 7:15 बजे अचानक सायरन बजते हैं और लोग घबरा जाते हैं कि क्या हुआ। अचानक ब्लैकआउट हो जाता है और विकास भवन सहित पूरे जिले की सभी बत्तियाँ बुझ जाती हैं। फिर लड़ाकू हवाई जहाजों के आने की सूचना मिलती है और तेज आवाज़ से लोग और अधिक घबरा जाते हैं। जब प्रशासन सूचित करता है कि यह केवल ब्लैकआउट मॉक ड्रिल है, तब जाकर लोग चैन की साँस लेते हैं।
जनपद बागपत में आज सायं 7:15 बजे से 7:30 बजे तक आयोजित ब्लैकआउट मॉक ड्रिल का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। यह मॉक ड्रिल न केवल प्रशासनिक तैयारी की परीक्षा थी, बल्कि नागरिक जागरूकता और सहभागिता का भी वास्तविक प्रतिबिंब बनी। इस मॉक ड्रिल का उद्देश्य जिले की आपदा प्रबंधन योजना की समीक्षा, विभिन्न विभागों की विभागीय योजनाओं का मूल्यांकन और आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र की उपयोगिता को सुदृढ़ करना था।
ड्रिल की शुरुआत ठीक 7:15 बजे विकास भवन परिसर से सायरन के माध्यम से हुई। लखनऊ स्थित डायल 112 पर कॉल के माध्यम से सूचना प्राप्त हुई कि जिले में हवाई हमला संभावित है, जिसके क्रम में जिले के सभी ग्राम पंचायतों, नगर निकायों, धार्मिक स्थलों, सार्वजनिक स्थलों और प्रमुख चौराहों पर लाउडस्पीकर के माध्यम से एलान किया गया कि ड्रिल प्रारंभ हो चुकी है। एलान के साथ ही समूचे जनपद में बिजली आपूर्ति को नियोजित रूप से बाधित कर ब्लैकआउट की स्थिति बनाई गई।
कंट्रोल रूम को सूचना प्राप्त हुई कि विकास भवन में कुछ लोग चोटिल हो गए हैं, जिसके क्रम में तत्काल स्वास्थ्य विभाग को सूचित कर एम्बुलेंस की व्यवस्था की गई।
विकास भवन में बिजली गुल रही और अंदर फंसे लोगों को स्ट्रेचर के माध्यम से सकुशल बाहर लाकर एम्बुलेंस द्वारा अस्पताल भेजा गया। मलबे के नीचे दबे लोगों को भी रेस्क्यू किया गया। लोगों को बताया गया कि ऐसी स्थिति में किस प्रकार अपने घरों के भीतर सुरक्षित रहना चाहिए।
विकास भवन से सूचना प्राप्त हुई कि भूकंप के पश्चात डीआरडीए बिल्डिंग में आग लग गई है और कुछ लोग फंसे हुए हैं। तत्काल राहत कार्य शुरू किया गया। इस दौरान आग बुझाने की ड्रिल का भी प्रदर्शन हुआ, जिसमें फायर ब्रिगेड ने तत्परता से कार्य करते हुए आग बुझाई।
इस पूरी प्रक्रिया में एनसीसी और नेहरू युवा केंद्र के स्वयंसेवकों ने व्यवस्था बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आपदा विभाग, पुलिस, अग्निशमन, स्वास्थ्य विभाग आदि के विशेषज्ञों ने उपकरणों का प्रदर्शन किया। रेस्क्यू टीम ने घटनास्थल पर पहुँचकर स्थिति का आकलन किया। अग्निशमन विभाग ने पानी और फोम का प्रयोग कर आग बुझाई, सीढ़ियों की मदद से फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला और प्राथमिक उपचार देकर उन्हें अस्थाई फील्ड अस्पताल भेजा गया।
बिल्डिंग में भारी धुआँ होने के कारण ‘स्मोक एक्जॉस्टर’ का प्रयोग किया गया, जिससे राहत कार्य तेजी से आगे बढ़ा। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ तीरथ लाल ने बताया कि डॉक्टरों की टीम — जिसमें चिकित्सक, फार्मासिस्ट, स्टाफ नर्स आदि शामिल थे — घायलों की चिकित्सा हेतु तुरंत सक्रिय हो गई। छह घायलों में से चार को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दी गई और दो को अस्पताल में भर्ती किया गया।
नागरिकों ने भी अनुशासन और सहयोग की मिसाल पेश की — उन्होंने अपने घरों, दुकानों और प्रतिष्ठानों की लाइटें, इनवर्टर, जनरेटर, यहाँ तक कि मोबाइल की फ्लैश लाइट भी बंद कर दी। वाहन रोक दिए और घरों के भीतर अंधकार बनाए रखा। यह दृश्य न केवल प्रशासन के लिए उत्साहवर्धक था, बल्कि सामूहिक जिम्मेदारी का उत्कृष्ट उदाहरण भी।
ड्रिल के दौरान तीन प्रकार के एयर रेड सायरन का प्रयोग किया गया जिसमें पहला सायरन (ऊँच-नीच स्वर): नागरिकों को सतर्क कर सुरक्षित स्थानों की ओर निर्देशित किया गया। दूसरा सायरन (लगातार): स्थिति सामान्य होने की सूचना। तीसरा सायरन: अति संकट की स्थिति का संकेत (जिसका परीक्षण भी किया गया)।
इस ब्लैकआउट मॉक एक्सरसाइज में यूथ लीडर अमन कुमार के नेतृत्व में नेहरू युवा केंद्र, मेरा युवा भारत, एनसीसी, युवक मंगल दल, उड़ान यूथ क्लब, और आपदा मित्र के स्वयंसेवकों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने राहत कार्य, घायलों की सहायता और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाने में प्रशासन का सहयोग किया।
इस अभ्यास में पुलिस, स्वास्थ्य, अग्निशमन, विद्युत, नगर निकाय, आपदा प्रबंधन टीम सहित सभी विभागों ने सक्रिय सहभागिता की। कलेक्ट्रेट और पुलिस लाइन स्थित कंट्रोल रूम पूरी तरह क्रियाशील रहे।
विकास भवन को आपदा-प्रभावित क्षेत्र मानते हुए खोज एवं बचाव दल सक्रिय किया गया। रेस्क्यू किए गए लोगों को जिला अस्पताल भेजा गया जहाँ उन्हें चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराई गई। फायर ब्रिगेड टीम ने त्वरित प्रतिक्रिया के साथ मॉक फायर केस को नियंत्रित करने का प्रदर्शन किया।
इस ड्रिल का आयोजन जिलाधिकारी अस्मिता लाल के निर्देशन में और अपर जिलाधिकारी पंकज वर्मा के पर्यवेक्षण में हुआ। उन्होंने प्रत्येक सेक्टर से जुड़े अधिकारियों से फीडबैक लिया और प्रतिक्रिया की समीक्षा की। जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने कहा, “आपदा की घड़ी में केवल प्रशासन की नहीं, हर नागरिक की भूमिका अहम होती है। इस मॉक ड्रिल में बागपतवासियों ने जो अनुशासन और समझदारी दिखाई है, वह सराहनीय है।”
पुलिस अधीक्षक सूरज कुमार राय ने भी जन सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि “ऐसे अभ्यास न केवल तैयारी की परख हैं, बल्कि समाज को मानसिक रूप से आपदा के लिए तैयार करने का सशक्त माध्यम भी हैं।”
ब्लैकआउट मॉक ड्रिल क्यों है जरूरी?
ब्लैकआउट मॉक ड्रिल एक विशेष प्रकार का आपदा अभ्यास है, जिसका उद्देश्य नागरिकों और प्रशासन को हवाई हमले, युद्ध जैसी आकस्मिक परिस्थितियों में त्वरित, संगठित और सुरक्षित प्रतिक्रिया देना सिखाना होता है। इससे यह भी परखा जाता है कि बिना संचार और विद्युत सुविधा के जनसामान्य किस प्रकार अनुशासन और सजगता बनाए रखते हैं।
प्रशासन इस अभ्यास से प्राप्त अनुभवों को संकलित कर जनजागरूकता शिविरों, विद्यालयों में सत्रों और ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से व्यापक स्तर पर जागरूकता फैलाने की योजना बना रहा है। इसमें एनसीसी और नेहरू युवा केंद्र जैसे संगठनों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी नीरज कुमार श्रीवास्तव, अपर पुलिस अधीक्षक नरेंद्र प्रताप सिंह, डिप्टी कलेक्टर भावना सिंह, निकेत वर्मा, अमरचंद वर्मा, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. तीरथलाल, अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. दीपा सिंह, अधिशासी अधिकारी नगर पालिका बागपत के के भड़ाना, पुलिस क्षेत्राधिकारी सहित कई अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

