
RKTV NEWS/कासगंज (उत्तर प्रदेश) 30 अप्रैल। आज श्रीमती कस्तूरी देवी पराशर इंटर कालेज सैलेरी धाम कासगंज के तत्वावधान में छात्र-छात्राओं के हित में ‘ सफलता के मंत्र ‘ पर एक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन हुआ। रांची विश्वविद्यालय के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो डा जंग बहादुर पाण्डेय ने मुख्य अतिथि के रूप मे इस विषय पर गहन प्रकाश डाला। डा पाण्डेय ने कहा कि नीति कहती है कि संसार में अपना कल्याण चाहने वालों को 7 जगहों पर बुलाए जाने पर भी वहाँ नहीं जाना चाहिए,चले गये तो वहां नहीं रहना चाहिए और रह गये तो किसी से नहीं कहना चाहिए वो है वेश्यालय,मदिरालय,जुआलय,हिंसालय,चिकित्सालय, न्यायालय और नरकालय और 7 जगहों पर बिना बुलाए भी वहां अवश्य जाना चाहिए, वहां रहना चाहिए और मौका मिले तो वहां कुछ न कुछ कहना चाहिए – विद्यालय, पुस्तकालय, अनाथालय, अनुसंधानालय,शिक्षकालय,देवालय और स्वर्गालय। इस देश का सौभाग्य या दुर्भाग्य यह है कि जहाँ हमें बिन बुलाए जाना चाहिए वहाँ जाने से कतराते हैं,कोई न कोई बहाना बनाते हैं ,और जहाँ नहीं जाना चाहिए वहाँ बिन बुलाए चले जाते हैं।डा जे बी पाण्डेय ने कहा कि भारत युवाओं का देश है और युवाओं के पास जोश है और बुजुर्गों के पास होश है।यदि युवा अपने जोश में बुजुर्गों के होश के साथ मिला दें, तो सफलता उनके चरण चूमेगी।उन्होंने छात्रों की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए कहा कि सफलता के लिए मन को नियंत्रित करना परमावश्यक है और मन को एकाग्र करने का एक अमोघ अस्र है-मन के पहले ‘ न ‘ लगाएं शब्द बनेगा नमन। नमन से मन का अहंकार दूर होगा और मन शांत होगा और मन शुभ कार्य की ओर अग्रसर होगा। मन के पीछे ‘ न ‘ लगाएं शब्द बनेगा मनन। एकाग्र होकर अध्ययन और चिंतन करने की क्रिया का नाम मनन है। नमन + मनन=ज्ञान की प्राप्ति=जीवन में मनोवांछित फल की प्राप्ति यानि सफलता अर्थात् बल्ले बल्ले। डा पाण्डेय ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि सूखी उम्मीदो की कोई डाली नहीं होती,बंद किस्मत की कोई ताली नहीं होती।झुक जाए जो मां बाप और गुरु के चरणों में,उसकी झोली कभी खाली नहीं होती।
संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे महाविद्यालय के प्रबंधक एवं व्यवस्थापक न्याय मूर्ति डा प्रेम नारायण पराशर ने कहा कि यह हम सबके लिए गौरव का संदर्भ है कि रांची से आकर प्रो डा जे बी पाण्डेय हमारे छात्र-छात्राओं को सफलता के राज जैसे महत्वपूर्ण विषय पर मंत्र दे रहे हैं। संगोष्ठी की संयोजिका दिनेश पराशर ने कहा कि विद्यार्थियों को अपने माता पिता और गुरु की बात आंख मूंदकर मान लेनी चाहिए, इसी में उनका कल्याण है। विशिष्ट अतिथि के रूप में कांग्रेस की लोकप्रिय दिव्या शर्मा ने कहा कि अभिवादन शीलस्य नित्यं वृद्धोपसेविन: ,चत्वारि सत्य वर्धन्ते,आयुर्विद्या यशो बलम्।
अर्थात् अभिवादन,आचरण और वृद्धों की नित्य सेवा से आयु,विद्या ,यश और बल की प्राप्ति होती है। विद्यार्थियों को माता पिता और गुरु की आज्ञा का पालन आंख मूंद कर करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि हमें परशुराम से सफलता का मंत्र सीखना चाहिए। जीवन में सफलता के लिए शस्त्र और शास्त्र दोनों का ज्ञान अपेक्षित है।अर्चिका मिश्रा ने कहा कि जीवन में सफलता के लिए नियमित और एकाग्र चित्त अध्ययन अपेक्षित है।जो आज के विद्यार्थी नहीं कर रहे हैं-यह दुखद एवं चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि विद्या धनं सर्व धन प्रधानम्।
अति विशिष्ट अतिथि के रूप में वृंदावन के परम संत एवं गीता के मर्मज्ञ विद्वान डा के कृष्ण मूर्ति ने संगोष्ठी का समाहार करते हुए कहा कि ईच्छा -शक्ति, बुद्धि,कल्पना ,मेहनत और लगन से कामयाबी पाई जा सकती है।
सैलेई के जे पी पराशर,दिनकर दीक्षित,रमा कान्त मिश्र, डा श्रीकृष्ण शरद्, रामाश्रय पचौरी,डा दीपक कुमार बैरागी,ज्ञानेश कुमार बशिष्ठ, भोजपुर आरा के निर्भय डिहरा से पधारे परम संत स्वामी श्रीरंग जी महाराज,पंडित शुभम् कुमार एवं छोटे लाल शर्मा ने भी विचार व्यक्त किए।संगोष्ठी में महाविद्यालय के सभी शिक्षक -शिक्षिका वृंद -डा रमेश चंद्र पाण्डेय प्राचार्य ,शेखर राघव,जोगेश उपाध्याय, अर्जुन सोलंकी,मुनेश कुमार,किरण मिश्रा, संगीता तिवारी, शिल्पी वशिष्ठ,नीलम राजपूत,ममता राजपूत उपस्थित रहें।डा के कृष्ण मूर्ति के नेतृत्व में वृंदावन से आई गीता आश्रम की ब्रह्म चारिणी छात्राएं और ब्रह्म चारी छात्र भी उपस्थित रहे।
सुंदर कार्य क्रम के आयोजन के लिए डा पाण्डेय ने महाविद्यालय परिवार के प्रति आभार जताया और सबके मंगल की कामना की।
मान मिले सम्मान मिले,सुख संपत्ति का वरदान मिले।
कदम कदम पर मिले सफलता,सदियों तक पहचान मिले।
आगत अतिथियों का भव्य स्वागत महाविद्यालय के विद्वान प्राचार्य डा रमेश चंद्र पाण्डेय ने, सरस्वती वंदना महाविद्यालय की हिंदी शिक्षिका किरण मिश्रा के नेतृत्व में छात्राओं ने, सुंदर संचालन संगीता तिवारी ने,फोटो ग्राफी डा दीपक वैरागी ने तथा धन्यवाद ज्ञापन ममता राजपूत ने किया।
हॉल छात्र -छात्राओं से खचाखच भरा था और सभी डा पाण्डेय के सारगर्भित वक्तव्य को सुनकर अभिभूत थे। सबने संगोष्ठी की सफलता की भूरिश: प्रशंसा की। समापन शांति पाठ एवं राष्ट्रगान से हुआ।
