
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)25 मार्च। ब्रह्मपुर धाम स्थित गौरी शंकर विद्यालय रोड में आशा देवी निवास परिसर में आयोजित श्रीमद्भागवत सप्ताह यज्ञ के तीसरे दिवस जीयर स्वामी जी महाराज के कृपा पात्र ब्रह्मपुरपीठाधीश्वर वाचस्पति आचार्य धर्मेन्द्र जी महाराज ने वेदव्यासजी के मन मे उत्पन्न विसाद को मिटाने व शांति हेतु देवर्षिनारद जी द्वारा बताए गये मार्ग पर प्रकाश डालते हुए द्रौपदी, उत्तरा,सुभद्रा और कुंती के दिव्य चरित्र की कथा सुनाई।
देवर्षिनारद के तीन जन्मो की कथा सुनाते हुए विदुर मैत्रेय संवाद की चर्चा करते हुए कहा कि जो है नही,पर है .जैसा लगता है वह माया है।माया से छुटकारा पाने का उपाय है.मायापति की शरणागति।जैसे ही जीव मायापति के शरण मे जाता है वैसे ही माया मानव जीवन मे बाधक नहीं,वरन साधक ,सहयोगी बन जाती है। इन्होंने कहा भगवान को साधन से नही, साधना से नहीं, वरन भाव से ,भक्ति से ,गुरू कृपा से प्राप्त किया जा सकता है।भगवान को भाव,प्रेम प्रिय है। राम ही केवल प्रेम पिआरा, जान लेहु जो जाननि हारा।
साथ ही श्रृष्टि विस्तार कथा करते हुए मनु शतरूपा के पुत्र उत्तानपाद, प्रिय व्रत और पुत्रियां देवहूति, आकुति ,प्रसुति के वंश की दिव्य कथा को प्रस्तुत करते हुये सती चरित्र का वर्णन ,शिवपार्वती विवाह की झांकी प्रस्तुत करते हुए विवाह प्रथा में प्रविष्ट कुरीतियों के निवारणार्थ तिलक दहेज मुक्त ,प्रदर्शन रहित विवाह संस्कार संवर्धन हेतु आग्रह किया। श्रीमद्भागवत का पाठ परायण पंडित अशोक द्विवेदी, रूद्राभिषेक आनंद मोहन तिवारी, पूजन अर्चन का कार्य हरिओम शास्त्री संपादित कर रहे हैं।नाल पर बेनीमाधव मिश्र,बैंजू पर उदय कुमार और हारमोनियम पर निराला बाबा संगत कर रहे है।
