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ललकार

ललकार

वीर, तलवार नोंक पर कवन नयका सपन चढ़वलऽ,
बोलऽ जवान, कवन नयका बीआ देश खेत में डललऽ।

रक्त बीज मलेच्छ के पेट बरछा भोंकत बानी,
यमराज के आत्मा के झूला चढ़ खेल खेलत बानी।

नइखे कवनो बात कहहूँ के, का कह हम्हू सुनाई,
टूटब ना अपने में त पूरा आजादी हम्हीं मनाईब।

भारत माता के दिव्य चरण सोझा में बा;
सुलगत आग में आहुति खातिर जान हाजिर बा।

दुशमन के मूड़ी छीलब चाहे जतना शिश चढ़ावे पड़े,
कुछुवो होवे भले, सीमा से कदम पीछा ना पड़े।

अगिआइल लोहित कुंड से बाण के झरना फूटी लगले,
नर मुंडन से परबत ढपाये लागी अब लगले।

रणचण्डी कामाख्या जतना चहीहें मूंड चढ़ाइब,
लाशन पर रखत पाँव, लेले फौज आगे बढ़ जाइब।

यज्ञ जारी रहे, आहुति में तनिका शाकल्य डलाइल बा,
फूंकी, ललकारी देश के आग हरदम भभकत रहो ज्वाला बा।

जब एक-एक लोग के कलेजा में तितकी अंगार बन जाई,
जनीहऽ भारत के कमजोरी के पाप उतर जाई।

देख लीहऽ कइसन शत्रु संहारक युद्ध होवे वाला बा,
अजबे विनाशकारी भयंकर मुंड छीलन हावे वाला बा।

बँच के भाग ना पावे पइहें एको बैरी चहलो पर,
हिन्द देश के तलवार जनीहऽ गजबे धार वाला बा।

जल होखस अथाह लोहित में, बाँहिन बटोर बान्हब,
का हिम्मत तूफान ठहर ना जइहें, जसहीं नजर उठाइब।

बदरी पानी ढरकइहे, कहब जहवाँ ओहीजे ढ़रकावऽ
नदिओ मुँहवा ओनिये फेरिहें, जेने चाहब धारा ओने घूमावऽ।

शांति देवता समझस, आज जवन राक्षस हंसी उड़ावत बा,
ठग सियारो बा, बा कुत्ता भँकत आ सापों डंसत बा।

बाकी लगले दिन पलटब, फिर ऊहे दूनों हथवा जोडिहें,
तनिका आँख गुडेरब, सब सोखई बदमाशी छोडिहें।

‘वीर भोग्या वसुन्धरा’ मंत्र पाठ जोर से होवे के चाहीं,
गरजऽ गुस्सा से शोर से नभ. के पेट फाटे के चाहीं।

लागल बा जे आग का खाली सीमा धहधह जारी?
अकिल हेराइल बा तोहरो आजादी पर संकट बा भारी।

भारत माता के मान सम्मान गौरव पर भइल घात गंभीर,
मातु मुकुट पर चढ़ आवत बा, छली ढपले मुँह पर चीर।

माथा पर चढ़ जे नाची, ना छोड़ब, कवन बात के डर बा,
जनमल से मरल फेर फेर ना, भिडंत में एके बार मरे के बा।

कमजोर कहावे के लागल दाग, ना छोड़ब अब बोले खातिर,
कहला के बदला फेरलो बिन, रहबो ना करब अब बाकिर।
बैरी के रोकब राह, एकरा के हम कइसे छोड़ब,
जब तक रही चलत साँस, आपन गुस्सा उतार के छोड़ब।

गरज-गरज के बोल हिमालय, ऊँच सिंहासन वालन से,
बोल बंगाल के खाड़ी से, कन्या कुमारी पास सागर ज्वार-भाठा से।

चढ़ के बोल कुतुव मिनार से, हर खम्भ-स्तंभन से,
गंगा, यमुना, सतलज से बोल, बोल नर्मदा, कावेरी तट तीरन से।

हर किला परकोटा गढ़ से बोल, बोल सब खण्डहरण से,
बोल चितौड़ के माटी से, सिंहगढ़ के धूल कणन से।

वीर बहादुर होखस सूतल उनका अभी जगावऽ,
नव जवान के मुँह पर, जटा खोल सब सन्त घुमावऽ।

केहू जहवा सूतल होवे, झकझोर झोर जगावऽ,
वीर विक्रम, अब तलवार पर धरगर शान चढ़ावऽ।

देखऽ कहवाँ चाणक्य-चन्द्रगुप्त नींद में बाड़न,
तूही रहबऽ नींद में सूतल त, पूरा देश झपकइले बाड़न।

संग्राम-उदय-प्रताप के जा दउड़त ले आवऽ,
गोविन्द, शिवाजी, सरजा के अभी अभी उठावऽ।
दधिचि के हड्डी से बनल धेनुहा पर लगले बाण चढ़ावऽ,
वैराग्य वीर वृन्दा फकीर भाई के खोज के आगे लावऽ।

लक्ष्मीबाई जहवाँ होखास उनका आगे करऽ,
जीजा बाई होखस जहवाँ उनकर पाँव के धरऽ।

जिनगी में जे कबहुँ आभी-गाभी ना सहलखा,
होके आजिज जे कबो देशवा तक छोड़लखा;
माथ ठेठावत बानी, बाकी आज गोहरावत बानी,
लागत बा आजाद हिन्द नेताजी अबे आवत बानी।

रग-रग में भरल जोम बा जेकरा में, शाहनवाज ढ़ील्लन के लावऽ बा जोश जेकरा में।

अस्सी बरस के वीर दादा कुँवर के ढूढ़-दूढ़ऽ,
गंगीया माई के भूजा दान देबे खातिर ढूढ़ऽ।

शेरशाहसूरी के जाके लावऽ, जरासंध अखाड़ा के धूल चढ़ावऽ, सबके लावऽ सबके लावऽ, देखऽ झपटले सबके लावऽ।

लाल-बाल-पाल के दउड़ बुलाव, अब्दुल बारी, सरसैयद के लावऽ, राजन बाबू के देखऽ, सदाकत आश्रम से खोंखते दौड़त बाड़न, लावऽ।

अरविन्द विवेका साथे दयानन्द के खोज निकालऽ,
खोज-खोज वीर पुत्रन के लहू के टीका करऽ।

करो वा मरो वाला गाँधी के लावऽ, वारदोली के वीर बल्लभ के लावऽ
बैरिस्टर बाबा साहेब भीमराव के जा दौड़ऽ ले आवऽ,
टनटना टन विरसा साथे टैगोर, मालवीय के लावऽ।

जाके देखऽ कहवाँ टीपू सुल्तान नींद में बाड़न,
देखऽ मंगल पांडे साथे राजगुरु, सुखदेव कहाँ बाड़न।

देखऽ का अशफाक आ उसमानो सूतल बाड़न,
का अलबर्ट एक्का आ भाई हमीद अबो गढ़ाते बाड़न।

जेकर बम से वायसराय के कलेजा थर्राइल रहे,
वीर भगत बलवान का अबहू रूठल बाड़न ?

सबसे कहे के काम बा, रूठल छोड़ किरिपा करस,
बैरी विनाश खातिर बम लेले बाज अस टूटस।
आमूल चूल बदलाव जब लावे के होला,
क्रांतिकाल के लपट सगरो बस लाल लाल होला।

जवानी जब जागेला धधकत अंगार अस होला,
बहादुरी कोमल कोंढ़ी ना, भयानक बस भयानक होला।

का बा करे के जिनगी में नीमन से बुझले बानी,
जोड़ हाथ रहीं खाड़, ह पाप खूब पहचनले बानी।

छलले बा इहे धरम के पाठ अब के पहचनलीं,
बल के पराक्रम, प्रताप के बुझलीं, हथजोरी कमजोरी ह जनलीं।

ऊना रहन धीम शांत अक्खड़ के अक्खड़ रहन,
ऊहे रहन ठीक नीक, हथजोड़वा दंडवत वाला गलत रहन।

चल के कहींजा गलती माफ करस मत रूठस,
लेले बम बाज अस दुश्मन के मूंडी थूरस।

अब एक निशाना बस, खून के नदी बहायीं;
साबरमती अब सतलज से ईहे गोहार लगायीं।
उठऽ होखऽ खाड़, संउसे देश तोहरा पीठ पर बा, केहू ना बोली अब गाभी, संउसे देश एक पाँव पर बा।

ना मिलीहें मतिभरम अब एको, जे शांति पाठ के पोथी पतरा खोली, भाला बरछा नाहिंयो जे थाम्हीं, कम से कम जयकार त बोली।

अब देर करऽ मत उठऽ उठऽ भूल पर संउसे देश रोवत बा उठऽ, तू रहबऽ आगे त हम कब रहब पीछा, डेग बढ़वते बढ़व, उठऽ।

खउलत खून दमकत चेहरा, ई इतिहास पूर्वज के बा, इँचे-इँच साहसी योद्धन के धधकत रूप सोझा में बा।

जवन देश के अतना बेटा समर भूमि में खेलले बाड़न, फाँसी-फंदा, तीर-कमान, बम-बारूद के झेलले बाड़न,
केकर कुब्बत बा अइसन योद्धन के जंजीर लगाई, जे जइहें पकड़े, झुलस आग अपने राख हो जाई।

खाली तीर कटार बरछा भाला ना, तप-त्याग भी होवे के चाहीं,
बलिदान के यज्ञ आ जप, अब जोर-जोर से होवे के चाही।

अइसन जोर से गरजऽ, अम्बर में आग के लपट पहुँचे,
इन्द्रीय मरले नकजत्तू बइठल होखस ऊहो छोड़ के पहुँचे।

युग-सन्यासी जतना जप-तप कइले बाड़न इहवाँ,
एके काम अब करस, रन खातिर मंत्रन में आग फूँकस,
धेनुहा-बाण के साथे-साथे, बैरी विध्वंसक बातन के नेवतस ।

विचारक अब गौर करस, कइसे तलवार गढ़ाई,
ऋषि-मुनी सोंचस, कइसे बलिदान के आग भड़काईं।

दिउका देह लगावे वाला योगी जागस,
जिनगी में अब कम्पन लावस, बंदूक के बैरल के जंग, अब रगड़-रगड़ चमकावस।

केनहू होवे छीपल तेजई, खोज-खोज साथ जूटावे के बा,
सँउसे भारत के युद्ध में, समर में बेखटके पहुँचावे के बा।

हिमालय के गंभीर बन बइठे के ना, अब जड़मूल से डोले पड़ी।

मत मूँदले रहस शिव तीसरका नैन, बैरी विनाश खातिर खोले पड़ी।

आके अशोक तेज धार से काटस अतना मूड़ी, तौलाये ना पावे,
बड़ा ज्ञान बा गौतम के, उहो अब जयकार मनावे।

ई ना हउवे गुफा भूजबरा, ई युद्धभूमि, रणभूमि ह,
ना जाते के नाक, ना माला फेरे के, ई तोप-तलवार के भूमि ह।

सुनऽ संउसे देश ललकरले बा, मारे के बा मारे के बा,
रण में पछाड़ देब हम, समर भूमि बीच लोहा गाड़ल प्रण बा।

हम मलेच्छ के मार भगाइब, शिखर शैल के पार भगाइब,
मानसरोवर बीच नहा के, शिव डमरू के आज बजाइब।

रचनाकार: डॉ कृष्ण दयाल सिंह
(लेखक वर्तमान में आरा के वरिष्ठपुरी में निवास करते है,संपर्क:9570805395)

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